J&K: किश्तवाड़ में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़, जैश के दो आतंकी ढेर
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में रविवार (22 फरवरी) को सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई. यह कार्रवाई ऑपरेशन त्राशी-I के तहत की गई. भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की संयुक्त टीम ने मिलकर यह अभियान चलाया. मुठभेड़ में प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े दो आतंकियों को मार गिराया गया, जबकि एक आतंकी के घायल होने की खबर है.
अधिकारियों ने दी ये जानकारी
अधिकारियों के अनुसार, छातरू क्षेत्र के पासेरकुट इलाके में आतंकियों की मौजूदगी की पुख्ता सूचना मिली थी. इसके बाद रविवार सुबह करीब साढ़े 10 बजे संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया गया. पहाड़ी पर बने एक मिट्टी के घर में छिपे आतंकियों ने जवानों को देखते ही अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाला और दोनों तरफ से जमकर गोलीबारी हुई.
VIDEO | Kishtwar: One terrorist has been killed in an ongoing encounter in Jammu & Kashmir's Kishtwar district, authorities report. pic.twitter.com/aajSQcKGZn
— Press Trust of India (@PTI_News) February 22, 2026
Aamlaki Ekadashi 2026: कब है आमलकी एकदाशी? इस दिन बनेंगे 4 शुभ संयोग, जानें सही तारीख, मुहूर्त और पूजा विधि
Aamlaki Ekadashi 2026: हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है. हर महीने दो एकादशी व्रत होते हैं. एक व्रत कृष्ण पक्ष में और दूसरा शुक्ल पक्ष में रखा जाता है. इन एकादशी के नाम अलग-अलग होते हैं. फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी कहा जाता है. इसे रंगभरी एकादशी भी कहते हैं. इस एकादशी पर व्रत पूर्वक भगवान लक्ष्मीनारायण, श्रीराधाकृष्ण और शिवपार्वती जी की पूजा करने का विधान हैं.
इसके साथ ही आंवला वृक्ष की भी पूजा की जाती है. इस एकादशी का व्रत रखने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. दांपत्यजीवन में मधुरता आती है. सभी पाप कर्म और संकटों से मुक्ति मिलती है. इसके साथ ही मोक्ष की प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं इस साल एकादशी व्रत कब रखना शुभ होगा.
आमलकी एकादशी व्रत 2026 तिथि
फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 27 फरवरी को सुबह 12 बजकर 33 मिनट पर शुरु होगी. एकादशी तिथि का समापन 27 फरवरी को रात 10 बजकर 32 मिनट पर होगा. 27 फरवरी को आमलकी एकादशी व्रत रखना शुभ होगा.
व्रत पारण का समय
आमलकी एकादशी व्रत का पारण 28 फरवरी को होगा. पारण का समय सुबह 06 बजकर 48 मिनट से सुबह 09 बजकर 05 मिनट तक रहेगा. इस मुहूर्त में व्रत का पारण करने से व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है.
आमलकी एकादशी पर 4 शुभ संयोग
इस साल आमलकी एकादशी पर बेहद शुभ संयोग बन रहा है. एकादशी तिथि के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग, आयुष्मान योग और सौभाग्य योग का दिव्य संयोग रहेगा. इन योग में पूजा करने पर पूजा का दोगुना फल प्राप्त होता है.
आंवला वृक्ष 2026 शुभ मुहूर्त
आमलकी एकादशी के दिन श्रीहरि की पूजा के साथ आंवला वृक्ष की पूजा करने का विधान है. शास्त्रों के मुताबिक, आंवला वृक्ष भगवान श्रीहरि के आंसूओं की बूंदों से प्रकट हुआ था. इसलिए इसे श्रीहरि का स्वरुप माना जाता है. यही वजह है आंवला में चमत्कारी औषधीय गुण होते हैं. इस दिन आंवला वृक्ष की पूजा शुभ मुहूर्त में करनी चाहिए. इस साल पूजा का मुहूर्त सुबह 06.48 मिनट से सुबह 11.08 मिनट तक रहेगा.
आमलकी एकादशी 2026 पूजा विधि
आमलकी एकादशी के दिन सबसे पहले स्नान करें फिर व्रत का संकल्प लें. उसके बाद उत्तर-पूर्व दिशा में चौकी बिछाकर उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं.
चौकी पर भगवान लक्ष्मीनारायण, श्रीराधाकृष्ण और शिव-पार्वती जी के श्रीविग्रह की स्थापना करें. भगवान का गंगाजल से अभिषेक करें. चंदन और फूलों से श्रंगार करें. इसके बाद भगवान को गुलाल और अबीर अवश्य लगाएं. मौसमी फलों और दूध से बने पदार्थों का भोग लगाएं.
तुलसी पत्र अवश्य चढ़ाएं. श्रद्धा भक्ति के साथ आरती करें. पूजा के बाद विष्णु चालीसा, श्रीकृष्ण चालीसा, शिव चालीसा का पाठ करें. ऊं नमो भगवतये वासुदेवाय मंत्र का जाप करें. आंवला वृक्ष पर जल चढ़ाएं और रोली लगाकर पूजन करें. साथ ही आंवला वृक्ष की आरती करने के बाद परिक्रमा करें. सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मण और गरीबों को दान दें.
आमलकी एकादशी का महत्व
शास्त्रों के अनुसार आमलकी एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा मिलती है. इसके साथ ही जीवन में सभी सुख प्राप्त होते हैं. जीवन के सभी संकट और परेशानिया दूर होती हैं. साधक को ज्ञात और अज्ञात सभी तरह के पाप कर्मों से छुटकारा मिल जाता है. साधक को अंत समय पर भगवान के बैकुंठ लोक में स्थान प्राप्त होता है. मोक्ष की प्राप्ति होती है.
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