Healthy Foods: बुखार की वजह से शरीर हो गया कमज़ोर? इन फूड्स से दोबारा लौटेगी बॉडी एनर्जी
Healthy Foods: बुखार उतरने के बाद अक्सर शरीर टूटा-टूटा सा लगता है। कमजोरी, चक्कर, भूख न लगना और सुस्ती ये सब संकेत हैं कि शरीर को अब खास पोषण की जरूरत है। कई लोग दवा तो समय पर ले लेते हैं, लेकिन रिकवरी के दौरान सही खानपान पर ध्यान नहीं देते, जिसकी वजह से कमजोरी लंबे समय तक बनी रहती है।
डॉक्टर भी मानते हैं कि बुखार के बाद शरीर को हल्का, सुपाच्य और पोषण से भरपूर आहार चाहिए। सही डाइट न केवल एनर्जी वापस लाती है, बल्कि इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करती है। आइए जानते हैं ऐसे फूड्स के बारे में, जो बुखार के बाद शरीर को तेजी से रिकवर करने में मदद करते हैं।
5 फूड्स से बॉडी में मिलेगी भरपूर एनर्जी
मूंग दाल खिचड़ी
बुखार के बाद सबसे सुरक्षित और असरदार भोजन मूंग दाल की खिचड़ी मानी जाती है। यह हल्की होती है, जल्दी पचती है और शरीर को जरूरी प्रोटीन व कार्बोहाइड्रेट देती है। इसमें थोड़ा घी मिलाने से शरीर को ताकत भी मिलती है।
नारियल पानी
बुखार में शरीर से पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है। नारियल पानी प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक की तरह काम करता है। यह शरीर को हाइड्रेट रखता है और कमजोरी दूर करने में मदद करता है।
मौसमी फल
सेब, पपीता, केला और संतरा जैसे फल विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होते हैं। ये शरीर को तुरंत ऊर्जा देते हैं और इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं। ध्यान रखें कि फल ताजे और साफ हों।
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दूध और दही
अगर डॉक्टर ने मना न किया हो तो हल्का गुनगुना दूध या ताजा दही भी लिया जा सकता है। इनमें प्रोटीन और कैल्शियम होता है, जो कमजोरी दूर करने में सहायक है। दही आंतों के लिए भी फायदेमंद होता है।
सब्जियों का सूप
गाजर, लौकी, पालक या टमाटर का हल्का सूप शरीर को जरूरी विटामिन देता है। सूप पचने में आसान होता है और भूख भी बढ़ाता है। इसमें ज्यादा मसाले न डालें।
किन चीजों से बचें?
बुखार के बाद तली-भुनी, ज्यादा मसालेदार और जंक फूड से दूर रहें। कैफीन और कोल्ड ड्रिंक्स भी रिकवरी को धीमा कर सकते हैं। शरीर को पूरा आराम और पर्याप्त नींद देना भी उतना ही जरूरी है जितना सही खाना।
(Disc।aimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी डॉक्टर/विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें।)
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(लेखक:कीर्ति)
Char Dham Yatra: चार धाम यात्रा की प्लानिंग कर रहे हैं? परेशानी से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
Char Dham Yatra: हर साल लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड की पवित्र पहाड़ियों में स्थित चार धाम के दर्शन के लिए निकलते हैं। यमुनोत्री मंदिर, गंगोत्री मंदिर, केदारनाथ मंदिर और बद्रीनाथ मंदिर की यह यात्रा आस्था, रोमांच और प्रकृति का अनोखा संगम है। बर्फ से ढकी चोटियां, घुमावदार रास्ते और तेज़ बहती नदियां इस सफर को यादगार बना देती हैं।
लेकिन पहाड़ी इलाकों की यह यात्रा जितनी खूबसूरत है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी हो सकती है। मौसम, स्वास्थ्य और यात्रा प्रबंधन में छोटी सी लापरवाही परेशानी का कारण बन सकती है। अगर आप चार धाम यात्रा की प्लानिंग कर रहे हैं, तो इन जरूरी बातों का ध्यान जरूर रखें।
चार धाम यात्रा के दौरान ध्यान रखें ये बातें
मौसम की सही जानकारी लेकर ही निकलें
चार धाम क्षेत्र में मौसम तेजी से बदलता है। मई-जून में भी ठंड महसूस हो सकती है, जबकि बरसात में भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। यात्रा से पहले मौसम का अपडेट जरूर लें और उसी अनुसार कपड़े पैक करें। रेनकोट, जैकेट और गर्म कपड़े साथ रखना जरूरी है।
हेल्थ चेकअप कराना न भूलें
ऊंचाई वाले इलाकों में ऑक्सीजन का स्तर कम होता है, जिससे सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। हृदय, अस्थमा या ब्लड प्रेशर के मरीज यात्रा से पहले डॉक्टर से सलाह लें। जरूरी दवाइयां, फर्स्ट एड किट और पानी की पर्याप्त व्यवस्था साथ रखें।
रजिस्ट्रेशन और परमिट जरूरी
सरकार की ओर से चार धाम यात्रा के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। ऑनलाइन या ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है। इससे आपात स्थिति में प्रशासन को आपकी जानकारी उपलब्ध रहती है और यात्रा सुगम रहती है।
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यात्रा का सही समय चुनें
भीड़ से बचना चाहते हैं तो पीक सीजन (मई-जून) के बजाय सितंबर-अक्टूबर का समय बेहतर माना जाता है। इस दौरान मौसम भी अपेक्षाकृत स्थिर रहता है और दर्शन में कम समय लगता है।
बजट और बुकिंग पहले से करें
होटल, गेस्ट हाउस और हेलीकॉप्टर सेवा की बुकिंग पहले से कर लेना समझदारी है। सीजन में अचानक रुकने की जगह मिलना मुश्किल हो सकता है। साथ ही, कैश और डिजिटल पेमेंट दोनों विकल्प साथ रखें क्योंकि कई दूरदराज इलाकों में नेटवर्क की समस्या हो सकती है।
पर्यावरण का रखें ध्यान
चार धाम यात्रा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी संवेदनशील क्षेत्र है। प्लास्टिक का उपयोग कम करें, कचरा निर्धारित स्थान पर ही डालें और प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान करें।
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