पिछले हफ्ते टॉप-10 कंपनियों में से 6 का मार्केट कैप 63,478 करोड़ रुपए बढ़ा
मुंबई, 22 फरवरी (आईएएनएस)। भारत की टॉप-10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से 6 का संयुक्त बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) पिछले सप्ताह 63,478.46 करोड़ रुपए बढ़ गया। इस दौरान लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) सबसे ज्यादा फायदे में रहीं।
व्यापक बाजार भी सकारात्मक रुख के साथ बंद हुआ। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 187.95 अंक यानी 0.22 प्रतिशत चढ़ा।
लाभ कमाने वाली टॉप कंपनियों में लार्सन एंड टुब्रो का मार्केट कैप 28,523.31 करोड़ रुपए बढ़कर 6,02,552.24 करोड़ रुपए हो गया।
वहीं, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का मूल्यांकन 16,015.12 करोड़ रुपए बढ़कर 11,22,581.56 करोड़ रुपए पहुंच गया।
एचडीएफसी बैंक का मार्केट कैप 9,617.56 करोड़ रुपए बढ़कर 14,03,239.48 करोड़ रुपए हो गया। इसी तरह, भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) का मूल्यांकन 5,977.12 करोड़ रुपए बढ़कर 5,52,203.92 करोड़ रुपए हो गया।
बजाज फाइनेंस का बाजार पूंजीकरण भी 3,142.36 करोड़ रुपए बढ़कर 6,40,387 करोड़ रुपए हो गया।
हालांकि, सभी कंपनियों के लिए ये सप्ताह सकारात्मक नहीं रहा। भारती एयरटेल का मार्केट कैप 15,338.66 करोड़ रुपए घटकर 11,27,705.37 करोड़ रुपए रह गया।
वहीं, आईसीआईसीआई बैंक का मूल्यांकन 14,632.10 करोड़ रुपए घटकर 9,97,346.67 करोड़ रुपए हो गया।
इंफोसिस का मार्केट कैप 6,791.58 करोड़ रुपए घटकर 5,48,496.14 करोड़ रुपए रह गया, जबकि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) का मार्केट कैप 1,989.95 करोड़ रुपए घटकर 9,72,053.48 करोड़ रुपए हो गया।
देश की सबसे मूल्यवान कंपनियों की सूची में एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, आईसीआईसीआई बैंक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, भारतीय जीवन बीमा निगम और इंफोसिस शामिल हैं।
इस बीच, निफ्टी के तकनीकी स्तर पर विशेषज्ञों ने कहा कि 25,800 का स्तर इमीडिएट रेजिस्टेंस है; इसके बाद 26,000 और 26,200 के स्तर महत्वपूर्ण रहेंगे।
वहीं, नीचे की ओर 25,300 और 25,100 प्रमुख सपोर्ट स्तर हैं। यदि निफ्टी 25,000 के नीचे मजबूती से टूटता है, तो गिरावट का दबाव बढ़ सकता है और बाजार में सुधारात्मक कमजोरी तेज हो सकती है।
--आईएएनएस
डीबीपी/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
सरकारी खर्च में समायोजन से तीसरी तिमाही में 23.4 प्रतिशत घटा भारत का कैपेक्स: आईसीआरए
नई दिल्ली, 22 फरवरी (आईएएनएस)। वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में भारत के पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में सालाना आधार पर 23.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यह जानकारी रविवार को जारी आईसीआरए की नई रिपोर्ट में सामने आई है।
आईसीआरए द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, सरकारी खर्च में कमी के कारण इस तिमाही में आर्थिक विकास की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है। हालांकि, त्योहारी मांग और राज्यों के स्तर पर बढ़े पूंजीगत खर्च से कुल आर्थिक गतिविधियों को सहारा मिलता रहेगा।
वहीं, राज्य सरकारों ने बेहतर प्रदर्शन दिखाया। 24 राज्यों के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, उनकी संयुक्त पूंजीगत व्यय और शुद्ध ऋण में तीसरी तिमाही में 21.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जो पिछली तिमाही की गिरावट के बाद सुधार दर्शाता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पूर्ण रूप से देखा जाए तो, इन राज्यों का कुल कैपेक्स दूसरी तिमाही के 1.8 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर तीसरी तिमाही में 2.1 लाख करोड़ रुपए हो गया, जो लगभग केंद्र सरकार के पूंजीगत खर्च के बराबर है।
कुल मिलाकर, केंद्र और राज्यों का संयुक्त पूंजीगत व्यय वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में 4.2 लाख करोड़ रुपए रहा, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही के 4.4 लाख करोड़ रुपए से थोड़ा कम है।
यह तुलना दूसरी तिमाही में दर्ज 16.7 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि से की जा सकती है, जो पहले की तेज रफ्तार के बाद सामान्य स्थिति में आने का संकेत देती है।
आईसीआरए ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर घटकर 7.2 प्रतिशत रह सकती है, जबकि पिछली तिमाही में यह 8.2 प्रतिशत थी।
हालांकि, इस नरमी के बावजूद वृद्धि दर 7 प्रतिशत से ऊपर रहने की उम्मीद है, जिसे मजबूत त्योहारों की मांग और जीएसटी सुधार के लाभ का सहारा मिलेगा।
आईसीआरए की मुख्य अर्थशास्त्री और रिसर्च प्रमुख अदिति नायर ने कहा कि नए आधार वर्ष के तहत जीडीपी वृद्धि का अनुमान लगाना अभी भी चुनौतीपूर्ण है।
उन्होंने कहा, लगातार धीमी पड़ती वृद्धि के कारणों में प्रतिकूल आधार प्रभाव, सरकारी पूंजीगत खर्च में कमी, राज्य सरकारों के राजस्व खर्च में सुस्ती और कमजोर माल निर्यात शामिल हैं।
राजस्व के मोर्चे पर, केंद्र सरकार के गैर-ब्याज राजस्व व्यय में गिरावट की रफ्तार काफी कम हुई है।
तीसरी तिमाही में यह सालाना आधार पर 3.5 प्रतिशत घटा, जबकि दूसरी तिमाही में इसमें 11.2 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज की गई थी।
इस बीच, 24 राज्यों का संयुक्त गैर-ब्याज राजस्व खर्च 2.7 प्रतिशत बढ़ा, हालांकि यह पिछली तिमाही की तुलना में धीमी गति से बढ़ा।
कुल मिलाकर, केंद्र और राज्यों का संयुक्त गैर-ब्याज राजस्व खर्च तीसरी तिमाही में 0.3 प्रतिशत बढ़ा, जबकि दूसरी तिमाही में इसमें हल्की गिरावट दर्ज की गई थी।
--आईएएनएस
डीबीपी/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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