RBI ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा, जीडीपी अनुमान बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत किया
मुंबई, पांच जुलाई वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को उम्मीद के मुताबिक प्रमुख नीतिगत दर रेपो को 5.25 प्रतिशत पर कायम रखा। इसके साथ आरबीआई ने ‘तटस्थ’ रुख को भी बरकरार रखा है। इसका मतलब है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक स्थिति के हिसाब से नीतिगत दर में समायोजन को लेकर लचीला बना रहेगा।
आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि के अनुमान को 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। वहीं मुद्रास्फीति के अनुमान को 5.1 प्रतिशत से घटाकर 5.0 प्रतिशत कर दिया है। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक में किये गये निर्णय की जानकारी देते हुए कहा, ‘‘एमपीसी ने मौजूदा परिस्थितियों पर गौर करते हुए आम सहमति से नीतिगत दर को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का निर्णय किया है।’’ रेपो वह ब्याज दर है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिये केंद्रीय बैंक से कर्ज लेते हैं।
आरबीआई के रेपो दर को यथावत रखने के फैसले से आवास, वाहन और वाणिज्यिक कर्ज की मासिक किस्त जस-की-तस बने रहने की संभावना है। चालू वित्त वर्ष की तीसरी मौद्रिक समीक्षा पेश करते हुए मल्होत्रा ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष प्रमुख व्यापारिक मार्गों को बाधित कर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बना हुआ है उल्लेखनीय है कि पिछले साल फरवरी से दिसंबर, 2025 तक रेपो दर में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की जा चुकी है। फरवरी, अप्रैल और जून की द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में भी नीतिगत दर को यथावत रखा गया था।
Amarnath Yatra जम्मू से स्थगित की गई, अनुच्छेद 370 के सात वर्ष पर सुरक्षा बढ़ाई गई
जम्मू, पांच अगस्त अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के सात वर्ष पूरे होने के अवसर पर जम्मू कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने के बीच बुधवार को यहां आधार शिविर से वार्षिक अमरनाथ यात्रा स्थगित कर दी गई। हालांकि, प्रशासन ने जम्मू के भगवती नगर आधार शिविर से एक दिन के लिए अमरनाथ यात्रा स्थगित करने का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया, लेकिन आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि मौजूदा सुरक्षा स्थिति को देखते हुए एहतियात के तौर पर यह कदम उठाया गया है। सूत्रों के अनुसार, बुधवार सुबह जम्मू के आधार शिविर से श्रद्धालुओं के किसी भी नए जत्थे को अनंतनाग जिले के पहलगाम और गांदरबल जिले के बालटाल स्थित दोनों आधार शिविरों के लिए रवाना नहीं होने दिया गया।
उन्होंने बताया कि प्राधिकारियों ने जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुरक्षा बलों के काफिलों की आवाजाही भी रोक दी। आमतौर पर यह कदम तब उठाया जाता है, जब सुरक्षा एजेंसियां सुरक्षा कारणों से इस रणनीतिक राजमार्ग पर आवाजाही कम करना चाहती हैं। यह राजमार्ग कश्मीर को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाला एकमात्र ऐसा राजमार्ग है जिस पर हर मौसम में आवागमन संभव रहता है।
यात्रा स्थगित करने का यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है, जब सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) सहित कई राजनीतिक दल पांच अगस्त को ‘काला दिवस’ के रूप में मना रहे हैं। यह दिवस केंद्र सरकार द्वारा तत्कालीन जम्मू कश्मीर राज्य को अनुच्छेद 370 के तहत प्राप्त विशेष दर्जा पांच अगस्त 2019 को समाप्त करने और राज्य का पुनर्गठन कर उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के फैसले के सात वर्ष पूरे होने पर मनाया जा रहा है। इन तीनों दलों ने जम्मू और अन्य स्थानों पर अलग-अलग विरोध कार्यक्रमों की घोषणा की थी।
वे जम्मू कश्मीर का विशेष संवैधानिक दर्जा बहाल करने और पूर्ण राज्य का दर्जा लौटाने की मांग कर रहे हैं। देश की सबसे बड़ी वार्षिक धार्मिक यात्राओं में शामिल अमरनाथ यात्रा व्यापक बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था के बीच कराई जाती है। सुरक्षा एजेंसियों के आकलन और खुफिया सूचनाओं के आधार पर प्रशासन समय-समय पर यात्रा और काफिलों की आवाजाही की समीक्षा करता रहता है।
इस वर्ष अब तक 4.60 लाख से अधिक श्रद्धालु दक्षिणी हिमालय में 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा में दर्शन कर चुके हैं। तीन जुलाई से शुरू हुई यह यात्रा 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन संपन्न होगी।
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