Responsive Scrollable Menu

मेडल के बड़े दावेदार एथलीटों के खराब प्रदर्शन की वजह:ओलिंपिक का ‘चोकिंग सिंड्रोम’; दुनिया के सबसे बड़े मंच पर चैम्पियंस को हरा देता है उनका अपना ही नर्वस सिस्टम

अमेरिकी फिगर स्केटर इलिया मालिनिन, जिन्हें दुनिया ‘क्वाड गॉड’ कहती है, धरती के इकलौते इंसान हैं जो हवा में 4.5 रोटेशन वाला जंप लगा सकते हैं। दिसंबर में उन्होंने एक प्रोग्राम में 7 क्वाड्रुपल जंप लगाकर इतिहास रचा था। वे लगातार 12 अंतरराष्ट्रीय इवेंट जीत चुके थे, लेकिन इटली विंटर ओलिंपिक के फाइनल में कई बार गिरे और सीधे आठवें नंबर पर आ गए। उन्होंने माना कि यह दबाव किसी भी अन्य टूर्नामेंट से बिल्कुल अलग था और नसें सुन्न पड़ गई थीं। यही हाल अल्पाइन स्कीयर माइकेला शिफ्रिन का है। शिफ्रिन के नाम इतिहास में सबसे ज्यादा 108 वर्ल्ड कप जीत दर्ज हैं, लेकिन 2018 के बाद से वे ओलिंपिक रेस में एक भी मेडल नहीं जीत पाई हैं। फ्रीस्कीइंग के आंद्री रगेट्ली भी 57 प्रतिशत पोडियम रेट के बावजूद लगातार तीसरे ओलिंपिक में बिना मेडल के लौट गए। इन एथलीट्स में न टैलेंट की कमी है न तैयारी की, वे दुनिया में सर्वश्रेष्ठ हैं, फिर भी हार गए। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, यह इन दिग्गजों की कोई शारीरिक कमजोरी नहीं है, बल्कि नर्वस सिस्टम की स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। जब इंसान अत्यधिक सामाजिक दबाव का सामना करता है, तो शरीर इसे बड़े ‘खतरे’ के रूप में देखता है। आम टूर्नामेंट्स में दिमाग जीतने पर फोकस करता है। लेकिन ओलिंपिक में, जहां दांव पर ‘सार्वजनिक अपमान’ होता है, शरीर में कोर्टिसोल का स्तर अचानक बढ़ जाता है। एथलीट का दिमाग जीतने के बजाय हार से बचने की मोड में चला जाता है। विज्ञान की भाषा में ‘वेगस नर्व’, जो हार्ट रेट कंट्रोल करके शरीर को शांत रखती है, दबाव में काम करना कम कर देती है। इससे नियंत्रण बिगड़ जाता है और सटीक मोटर कंट्रोल छिन जाता है। जो तकनीक खिलाड़ियों ने हजारों बार सफलतापूर्वक की है, दबाव में वे उसके हर स्टेप के बारे में सोचने लगते हैं। इसे ‘एक्सप्लिसिट मॉनिटरिंग’ कहा जाता है। दिमाग का यह कंट्रोल्ड प्रोसेसिंग उनके नैचुरल फ्लो को पूरी तरह से रोक देता है। ये चीजें दिखाने के लिए काफी हैं कि दुनिया का सबसे बड़ा मंच ओलिंपिक सिर्फ शारीरिक ताकत का खेल नहीं है, बल्कि दुनिया की नजरों के सामने प्राकृतिक सुरक्षा तंत्र को हराने की कला भी है। दिमागी ‘ऑपरेटिंग सिस्टम’ की ट्रेनिंग है जरूरी भारी दबाव से निपटने के लिए एथलीट्स को मानसिक ट्रेनिंग चाहिए। इसके लिए धीमी सांसों और बायोफीडबैक तकनीकों से ‘वेगस नर्व’ को मजबूत करना पहला कदम है। इसके अलावा, प्रैक्टिस के दौरान लाइव स्ट्रीमिंग कर अनजान दर्शकों के रियल-टाइम कमेंट्स का सामना करने वाली ‘सिमुलेशन ट्रेनिंग’ काफी मददगार होती है। सबसे अहम यह है कि दुनिया की नजरों को ‘खतरे’ के बजाय ‘चुनौती’ मानने की मानसिक आदत डाली जाए।

Continue reading on the app

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लटक गई 'ट्रेड डील'? नए सिरे से तय हो सकती है बैठक

सूत्रों का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को अंतिम रूप देने के लिए प्रस्तावित बैठक को अब नए सिरे से तय किया जाएगा। जानकारी को मुताबिक दोनों देश अब बदली हुई परिस्थितियों के हिसाब से आकलन करेंगे। 

Continue reading on the app

  Sports

पाकिस्तान से भी बुरी हालत में टीम इंडिया, एक मैच भी हारा तो हो सकता है टी20 वर्ल्ड कप से बाहर!

T20 World cup semi final scenario : भारतीय टीम के लिए आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप में साउथ अफ्रीका के खिलाफ सुपर 8 की पहली हार ने मुश्किल खड़ी कर दी है. अब टीम को अपने बचे हुए दोनों मुकाबले जीतने होंगे. एक मैच भी हारा तो उसके आगे जाने का रास्ता बंद हो सकता है. Mon, 23 Feb 2026 06:06:19 +0530

  Videos
See all

Iran America War Live Updates: ईरान ने मार गिराए B-2 बॉम्बर! | Iran Protest Trump |Khamenei |US War #tmktech #vivo #v29pro
2026-02-23T02:13:49+00:00

Pakistan Afghanistan War Live: पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक के बाद भड़का अफगानिस्तान, युद्ध शुरू?|Breaking #tmktech #vivo #v29pro
2026-02-23T02:11:09+00:00

Tiger Viral Video टाइगर की शिवभक्ति का वीडियो देखकर लोग हैरान N18S Shorts | #tmktech #vivo #v29pro
2026-02-23T02:13:35+00:00

Akhilesh Yadav Big Statement On Rambhadracharya | रामभद्राचार्य पर ये क्या बोल गए अखिलेश यादव? #tmktech #vivo #v29pro
2026-02-23T02:10:22+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers