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Israel Election: फलस्तीनी नागरिकों के सामने मतदान को लेकर भारी असमंजस

(तमीर सोरेक, पेन स्टेट यूनिवर्सिटी) न्यूयॉर्क, 22 अक्टूबर (द कन्वरसेशन) इजराइल में चुनाव आमतौर पर मतदाताओं के लिए विकल्प चुनने का अवसर होते हैं। हालांकि, इजराइल के फलस्तीनी नागरिकों के लिए देश के राष्ट्रीय चुनाव एक विकल्प से ज्यादा दुविधा पेश करते हैं। इजराइल में 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव में फलस्तीनी नागरिकों के सामने मतदान करने या उससे दूर रहने की दुविधा है। देश में मतदान के पात्र लोगों में लगभग छठा हिस्सा फलस्तीनी नागरिकों का है और करीबी मुकाबले में उनके वोट नतीजे को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, कई फलस्तीनी नागरिकों का मानना है कि मतदान करने से ऐसी व्यवस्था को वैधता मिल सकती है, जो उनकी आवाज दबाती है और उनकी नागरिकता को सशर्त मानती है। 2022 के पिछले आम चुनाव के बाद से गाजा में तबाही और बड़े पैमाने पर लोगों की हत्या, फलस्तीनी नागरिकों की अभिव्यक्ति एवं विरोध प्रदर्शन पर पाबंदियों तथा प्रमुख विपक्षी दलों द्वारा अरब राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन से इनकार ने इस दुविधा को और गहरा कर दिया है।

----- नागरिकता से मिली सुरक्षा ----- इजराइल के लगभग एक करोड़ नागरिकों में करीब 17 लाख फलस्तीनी हैं। इनमें से अधिकतर उन अरब लोगों के वंशज हैं, जो उस जमीन पर रह गए थे जो बाद में इजराइल का हिस्सा बनी। वहीं, 1948 के अरब-इजराइल युद्ध के दौरान करीब सात लाख 50 हजार फलस्तीनियों को उनके घरों से जबरन निकाल दिया गया था और उनमें से ज्यादातर को लौटने नहीं दिया गया। आठ नवंबर 1948 को युद्ध के दौरान जल्दबाजी में कराई गई जनगणना ने यह तय करने में भूमिका निभाई कि नए राज्य में किसे शामिल माना जाएगा। तब अपने घरों में अनुपस्थित लोगों को पंजीकरण और नागरिकता की प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। इनमें पड़ोसी देशों या तत्कालीन ब्रिटिश शासन वाले फलस्तीन के अन्य इलाकों में शरण लेने वाले लोग भी शामिल थे। इससे विस्थापित फलस्तीनियों के लिए नागरिकता हासिल करना और घर लौटना लगभग असंभव हो गया। जो फलस्तीनी इजराइल में रह गए, उनके लिए नागरिकता निष्कासन के खिलाफ सुरक्षा का माध्यम बनी। हालांकि, नागरिकता उन्हें भेदभाव और दमन से बचाने में पूरी तरह सफल नहीं रही।

----- राजनीतिक प्रभाव में उतार-चढ़ाव ----- जॉर्डन नदी और भूमध्य सागर के बीच इजराइल, गाजा और कब्जे वाले पश्चिमी तट की आबादी में फलस्तीनियों की हिस्सेदारी लगभग आधी है, लेकिन उनमें से एक-तिहाई से भी कम के पास इजराइली नागरिकता है। नागरिकता रखने वाले फलस्तीनी इजराइल के कुल नागरिकों का लगभग 17 प्रतिशत हैं। इजराइल की स्थापना के बाद से फलस्तीनी नागरिकों के पास मतदान का अधिकार है, लेकिन उनकी राजनीतिक भागीदारी में बाधाएं हैं। 1970 के दशक से फलस्तीनी संघर्ष के साथ नेताओं के जुड़ाव के आधार पर उम्मीदवारों और दलों को चुनाव से बाहर करने की कोशिशें हुई हैं। उच्चतम न्यायालय ने आमतौर पर ऐसे प्रयासों को रोका है। 1992 से 1995 के बीच फलस्तीनी दलों का राजनीतिक प्रभाव बढ़ा, जब यित्जाक राबिन की सरकार दो अरब-बहुल दलों के समर्थन पर निर्भर थी। इन दलों ने ओस्लो शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और अरब समुदायों को सरकारी धन आवंटित करने में भेदभाव कम करने की कोशिश की। उनके समर्थन से अरब समुदायों में सार्वजनिक निवेश बढ़ा। 2021-2022 की अल्पकालिक सरकार भी एक अरब दल के समर्थन पर निर्भर थी, जिससे स्थानीय मुद्दों पर कुछ सुधार हुए।

----- सिमटता राजनीतिक दायरा ----- सितंबर में इजराइल के केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने अरब दलों के दो गठबंधनों—जॉइंट लिस्ट और यूनाइटेड अरब लिस्ट—तथा कुछ उम्मीदवारों को अयोग्य ठहराने की कोशिश की। 2022 के चुनाव में इन गठबंधनों में शामिल दलों को अरब बहुल इलाकों में पड़े करीब 86 प्रतिशत वोट मिले थे। उच्चतम न्यायालय ने दोनों गठबंधनों को चुनाव से बाहर करने के फैसले पलट दिए। हालांकि, नेशनल डेमोक्रेटिक असेंबली के नेता सामी अबू शहादेह को अयोग्य ठहराने के मामले में अदालत ने संकेत दिया कि उसके अधिकतर न्यायाधीश उनके खिलाफ फैसला दे सकते हैं। सात अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में हुए हमलों के तुरंत बाद लिखे उनके लेख को आलोचकों ने इजराइली नागरिकों के नरसंहार का समर्थन माना था। अबू शहादेह ने इस आरोप का खंडन किया और संभावित हानिकारक मिसाल से बचने के लिए अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। इजराइल डेमोक्रेसी इंस्टीट्यूट के जुलाई 2026 के सर्वेक्षण में लगभग एक-तिहाई यहूदी उत्तरदाताओं ने अरब नागरिकों के मतदान के अधिकार का विरोध किया। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन के समर्थकों में यह अनुपात करीब 55 प्रतिशत था। फलस्तीनी मतदाताओं को डर-धमकी और मतदान में बाधाओं का भी सामना करना पड़ता है। गैर-मान्यता प्राप्त बेदुइन गांवों के निवासियों को मतदान केंद्रों तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।

----- मतदान से दूरी और भागीदारी की कीमत ----- मतदान से दूर रहने पर फलस्तीनी नागरिक संगठित अपराध और अरब समुदायों में बढ़ती हिंसा जैसे मुद्दों पर कार्रवाई का अवसर गंवा सकते हैं। लेखक के अनुसार, नेतन्याहू और अधिकतर विपक्षी दलों की फलस्तीनियों के अधिकारों और आत्मनिर्णय को लेकर नीतियों में बहुत कम अंतर है। न तो सत्तारूढ़ गठबंधन और न ही प्रमुख विपक्षी दल दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करते हैं। अरब समुदायों में आपराधिक संगठनों की हिंसा भी बड़ी चिंता है। मई में हुए एक सर्वेक्षण में आधे से अधिक अरब उत्तरदाताओं ने अपने समुदायों में हिंसा को अपनी मनोदशा पर नकारात्मक असर डालने वाला प्रमुख कारण बताया। लगभग 77 प्रतिशत अरब नागरिक अगली सरकार में अरब दलों की भागीदारी का समर्थन करते हैं, जबकि विपक्ष के कई दल इसके खिलाफ हैं। चुनाव में ‘यूनाइटेड अरब लिस्ट’ इजराइल की शासन व्यवस्था में भागीदारी को प्राथमिकता देती है, जबकि ‘जॉइंट लिस्ट’ समान अधिकारों के साथ फलस्तीनी राष्ट्रीय पहचान और एकजुटता बनाए रखने की पक्षधर है। अनुमान है कि 35 से 45 प्रतिशत अरब मतदाता मतदान नहीं करेंगे, जबकि यहूदी मतदाताओं में यह अनुपात 25 से 30 प्रतिशत रह सकता है। अरब दलों के नेता 70 प्रतिशत मतदान का लक्ष्य रख रहे हैं। अधिक मतदान से अरब प्रतिनिधित्व बढ़ सकता है और दक्षिणपंथी खेमे के कुछ छोटे दल चुनावी न्यूनतम सीमा से नीचे जा सकते हैं, जिससे नेतन्याहू के लिए सरकार बनाना कठिन हो सकता है। अरब दलों को उम्मीद है कि पर्याप्त सीटें मिलने पर विपक्षी दल उन्हें समर्थन देने के लिए मजबूर होंगे।

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