Responsive Scrollable Menu

Prabhasakshi NewsRoom: France से लेकर India तक हुए प्रदर्शनों के पीछे काम कर रहा था 13 देशों के 101 संगठनों का Network, Fox News ने किया बड़ा खुलासा!

भारत में हालिया विरोध प्रदर्शनों के पीछे विदेशी साजिश की जो आशंकाएं जताई जा रही थीं, अमेरिकी मीडिया संस्थान फॉक्स न्यूज की एक सनसनीखेज जांच ने उन्हें सच साबित कर दिया है। हम आपको बता दें कि फ्रांस और इटली की सड़कों पर मचे राजनीतिक उथल-पुथल के बीच 13 देशों में फैले 101 संगठनों के नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिस पर अलग-अलग देशों के विरोध प्रदर्शनों को जोड़ने, उनके संदेशों को फैलाने और साझा राजनीतिक लामबंदी को बढ़ावा देने में भूमिका निभाने के आरोप लगे हैं। रिपोर्ट में फ्रांस से भारत तक संगठनों के संपर्कों और भारत में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों का भी उल्लेख है। इन खुलासों ने इस सवाल को और गंभीर बना दिया है कि क्या भारत में विरोध की राजनीति के पीछे भी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क सक्रिय थे? सवाल उठ रहा है कि फ्रांस की सड़कों पर भड़का आक्रोश, भारत में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर युवाओं का प्रदर्शन और यूरोप के विभिन्न देशों में सरकारों के खिलाफ उठती विरोध की आवाजें...क्या इन सबके बीच कोई ऐसी अंतरराष्ट्रीय कड़ी है, जो अलग-अलग आंदोलनों को एक साझा राजनीतिक अभियान में पिरोने की कोशिश कर रही है?

हम आपको बता दें कि फॉक्स न्यूज की पत्रकार आसरा क्यू. नोमानी की रिपोर्ट Global ‘Chaos Inc’ Grows to 101 Groups के अनुसार, इस अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र में वामपंथी और समाजवादी संगठन, कम्युनिस्ट समूह, ट्रेड यूनियन, छात्र संगठन, राजनीतिक अभियान चलाने वाले मंच और मीडिया संस्थान शामिल हैं। रिपोर्ट का दावा है कि ये समूह अलग-अलग देशों में आंदोलनों के संदेशों को प्रसारित करने और उनके बीच संपर्क बढ़ाने में भूमिका निभा रहे हैं। रिपोर्ट में इससे पहले 50 संगठनों की पहचान किए जाने, बाद में यह संख्या 54 होने और फिर 101 तक पहुंचने का उल्लेख है। यह बढ़ती सूची अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक नेटवर्कों की गतिविधियों पर सवाल जरूर खड़े करती है। रिपोर्ट इस नेटवर्क को ‘रेड-ग्रीन प्रोटेस्ट इकोसिस्टम’ कहती है। इसमें ‘रेड’ से वामपंथी और कम्युनिस्ट विचारधारा तथा ‘ग्रीन’ से इस्लामी संगठनों का संदर्भ लिया गया है।

इसे भी पढ़ें: France Protests India Advisory | फ्रांस में उग्र प्रदर्शन और तनाव के बीच भारत ने जारी की एडवाइजरी, राष्ट्रपति मैक्रों और डोनाल्ड ट्रंप के बीच तीखी जुबानी जंग

इस जांच में फ्रांस स्थित इंडियन अलायंस पेरिस (आईएपी) का विशेष उल्लेख किया गया है। फॉक्स न्यूज के अनुसार, यह संगठन फ्रांस और भारत में जारी विरोध प्रदर्शनों के संदेशों को जोड़ने वाले समूहों में शामिल है। रिपोर्ट में मैनहैटन स्थित पीपुल्स फोरम के साथ इसकी साझेदारी का भी जिक्र किया गया है। आईएपी के एक सोशल मीडिया संदेश में फ्रांस और भारत के युवाओं के आंदोलनों का समर्थन करते हुए लिखा गया था— “फ्रांस में। भारत में। जेन-जी को आज के लिए बधाई।” यह संदेश दोनों देशों के प्रदर्शनों को एक साझा राजनीतिक संदर्भ में प्रस्तुत करता है।

यहीं से जांच का सबसे महत्वपूर्ण सवाल सामने आता है कि क्या इन संपर्कों का उद्देश्य केवल अलग-अलग देशों के आंदोलनों के प्रति समर्थन जताना है, या इसके पीछे साझा अभियान और राजनीतिक लामबंदी की कोई बड़ी योजना भी है? भारत में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों और फ्रांस की घटनाओं के बीच संभावित संबंधों की पड़ताल इसी वजह से महत्वपूर्ण हो जाती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 16 अक्टूबर को प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल ने अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित एक ब्रीफिंग में फ्रांस, स्पेन, भारत और अल्बानिया के आंदोलनों का एक साथ उल्लेख किया। संगठन ने सवाल उठाया कि क्या ये नए विद्रोह उन परिस्थितियों को बदलने के लिए संगठित राजनीतिक शक्ति हासिल कर सकते हैं, जिन्होंने उन्हें जन्म दिया है। उसने यह भी कहा कि वह इन शक्तियों को समर्थन देने और आपस में जोड़ने का काम कर रहा है। यह बयान जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। संगठन ने स्वयं विभिन्न देशों के आंदोलनों को एक साझा राजनीतिक विमर्श में रखने और उनके बीच संपर्क बढ़ाने की अपनी भूमिका का उल्लेख किया है। इससे यह सवाल उठता है कि अलग-अलग देशों में स्थानीय मुद्दों पर शुरू हुए विरोध किस तरह व्यापक अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक अभियानों का हिस्सा बनते हैं।

इस पूरे मामले में प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल की गतिविधियां इसलिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि यहां चर्चा महज सोशल मीडिया पर एक-दूसरे का समर्थन करने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि आंदोलनों को राजनीतिक शक्ति में बदलने और उन्हें आपस में जोड़ने की घोषित रणनीति तक पहुंचती है।

साथ ही फॉक्स न्यूज की जांच में अमेरिकी मूल के प्रौद्योगिकी उद्यमी नेविल रॉय सिंघम से जुड़े राजनीतिक और मीडिया संगठनों का भी उल्लेख किया गया है। नेविल रॉय सिंघम शंघाई में रहते हैं। रिपोर्ट में ब्रेकथ्रू न्यूज, कोडपिंक और पार्टी फॉर सोशलिज्म एंड लिबरेशन जैसे संगठनों को उस व्यापक नेटवर्क के संदर्भ में रखा गया है, जिसके बारे में जांच में सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ये समूह समाचार कवरेज, सोशल मीडिया और राजनीतिक संदेशों के माध्यम से विभिन्न देशों में जारी आंदोलनों को व्यापक अंतरराष्ट्रीय विमर्श से जोड़ते हैं। ब्रेकथ्रू न्यूज ने फ्रांस और भारत के प्रदर्शनों को मितव्ययिता संबंधी नीतियों तथा सरकारी फैसलों के खिलाफ व्यापक आंदोलन के संदर्भ में प्रस्तुत किया है।

साथ ही 14 अक्टूबर को ब्रेकथ्रू न्यूज के एक साक्षात्कार में कोडपिंक की सह-संस्थापक और सिंघम की पत्नी जोडी इवांस ने फ्रांस, स्पेन और भारत का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि लोग सड़कों पर क्यों नहीं उतर रहे हैं? यह बयान अलग-अलग देशों में विरोध प्रदर्शनों को एक साझा राजनीतिक दृष्टिकोण से देखने की कोशिश को उजागर करता है। रिपोर्ट में ट्राइकॉन्टिनेंटल शोध संस्थान के प्रमुख विजय प्रसाद का भी उल्लेख है। 18 अक्टूबर को उन्होंने सोशल मीडिया पर पेरिस, नई दिल्ली और ब्यूनस आयर्स का एक साथ संदर्भ दिया और लिखा कि आक्रोश शक्ति बन सकता है। ऐसे संदेशों से यह समझने का अवसर मिलता है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श में विभिन्न देशों के आंदोलनों को किस तरह एक साथ प्रस्तुत किया जाता है।

इस मामले का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की वेज़ एंड मीन्स समिति से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि जुलाई 2026 में समिति ने ब्रेकथ्रू न्यूज, ट्राइकॉन्टिनेंटल और पीपुल्स फोरम को समन जारी किए थे। इस घटनाक्रम ने इन संगठनों से जुड़े मामलों पर सार्वजनिक और राजनीतिक ध्यान बढ़ाया है।

साथ ही फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांस में 24 अक्टूबर को ‘एक्त द्वितीय’ नाम से नए प्रदर्शनों की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा 20 नवंबर को यूरोप के कुछ हिस्सों में समन्वित युवा हड़ताल का आह्वान भी किया गया है। रिपोर्ट में जुलाई 2026 में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की वेज़ एंड मीन्स समिति द्वारा ब्रेकथ्रू न्यूज, ट्राइकॉन्टिनेंटल और पीपुल्स फोरम को समन भेजे जाने का भी उल्लेख है।

देखा जाये तो इस पूरे मामले का सवाल बेहद सीधा है कि क्या अलग-अलग देशों में स्थानीय मुद्दों पर उठने वाले विरोध को अंतरराष्ट्रीय संगठन साझा राजनीतिक अभियान में बदलने की कोशिश कर रहे हैं? फॉक्स न्यूज की जांच ने 101 संगठनों, भारत-फ्रांस संपर्कों, प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल और सिंघम से जुड़े समूहों का उल्लेख करके इस प्रश्न को सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया है। बहरहाल, इस रिपोर्ट को पढ़ने के बाद यह तो कहा ही जा सकता है कि मोदी सरकार की सतर्कता और तैयारी ने भारत में फ्रांस, इटली और अल्बानिया जैसे हालात पैदा होने से बचा लिया।

Continue reading on the app

मारुति की सबसे पॉपुलर 7-सीटर कार के लिए अब चुकाने होंगे ज्यादा पैसे, कीमत बढ़ने की वजह भी जानें

Maruti Suzuki Ertiga के ZXi+ स्मार्ट हाइब्रिड पेट्रोल MT और AT वेरिएंट्स ₹10,000 महंगे हो गए हैं. बाकी वेरिएंट्स की कीमत नहीं बदली. जानें इसकी कीमत, फीचर्स और पेट्रोल-CNG माइलेज.

Continue reading on the app

  Sports

Video: 128 प्रतिभाओं के साथ STCL सल्यूट तिरंगा क्रिकेट लीग सीजन–1 का भव्य शुभारंभ

राजस्थान के उदयपुर जिले के नाथद्वारा स्थित डॉ. मदन पालीवाल मिराज स्टेडियम में विधिवत उद्घाटन समारोह के साथ हुआ। दोपहर 2:30 बजे प्रारंभ हुए इस समारोह ने देशभर के उभरते एवं ग्रासरूट क्रिकेट खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया। STCL का उद्देश्य देश के उन प्रतिभाशाली युवा क्रिकेट खिलाड़ियों को एक ऐसा मंच उपलब्ध कराना है, जिन्हें अपनी प्रतिभा के बावजूद बड़े क्रिकेट मंचों पर पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाते हैं।11 शहरों में आयोजित हुए ओपन ट्रायल, 15,000 खिलाड़ियों ने लिया भाग लिया. STCL Sports द्वारा देश के 11 प्रमुख शहरों—पटना, कोलकाता, मुंबई, हैदराबाद बेंगलुरु, चेन्नई, जयपुर, चंडीगढ़, दिल्ली, अलीगढ़ एवं लखनऊ—में ओपन ट्रायल आयोजित किए गए. ओपनिंग सेरमनी में पूर्व क्रिकेटर और लीग कमिशनर चेतन शर्मा , सबा करीम और संग्राम सिंह जैसे सितारों ने भाग लिया. Fri, 23 Oct 2026 19:03:09 +0530

  Videos
See all

Halla Bol With Anjana Om Kashyap: BJP सांसद और Ashutosh में हुई तीखी बहस | NDA Vs INDIA | PM Modi #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-23T13:46:27+00:00

Rashtravad: कांग्रेस प्रवक्ता को एंकर ने दिखा दिया आईना! | #rashtravad #rahulgandhi #shorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-23T13:45:12+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers