नेपाल: मार्च में होने हैं संसदीय चुनाव, दांव पर बहुत कुछ
नई दिल्ली, 21 फरवरी (आईएएनएस)। आगामी 5 मार्च को नेपाल अपनी सरकार चुनने के लिए वोट डालेगा। 16 फरवरी से चुनावी अभियान जारी है। चुनाव प्रचार से जुड़ी गतिविधियां चुनाव की तारीख से तीन दिन पहले खत्म हो जाएंगी। नई सरकार बनेगी और उसके साथ ही कई सवालों के जवाब भी तलाशे जाएंगे।
यह चुनाव 2008 में राजशाही की समाप्ति के बाद नेपाल के सबसे अहम चुनावों में गिना जा रहा है। 2008 में नेपाल आधिकारिक तौर पर राजशाही से गणराज्य बना था, जब नेपाल को संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया। उसके बाद से देश लगातार राजनीतिक अस्थिरता, गठबंधन सरकारों और भ्रष्टाचार के आरोपों से जूझता रहा है।
यह चुनाव पिछले साल हुए युवाओं के नेतृत्व वाले जेन जी एंटी-करप्शन प्रदर्शनों के बाद हो रहा है, जिसने तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार को गिरा दिया और संसद भंग करने की नौबत ला दी। सितंबर 2025 के ये प्रदर्शन नेपाल की राजनीति में एक बड़ा मोड़ माने जा रहे हैं। सोशल मीडिया के जरिए संगठित इस आंदोलन में युवाओं ने जवाबदेही, पारदर्शिता और आर्थिक सुधार की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने जवाबदेही, पारदर्शिता और आर्थिक सुधार की मांग की। इस आंदोलन में शामिल रहे कई लोग पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। उम्मीदवार नेपाल की युवा आबादी की उम्मीदों का प्रतिनिधित्व करने की सोच के साथ मैदान में हैं। उनका मानना है कि 2022 से अब तक लगभग दस लाख नए वोटर्स रजिस्टर हुए हैं, और युवा वोट नतीजे को अहम बना सकते हैं।
मुख्य दावेदारों में काठमांडू के पूर्व मेयर, 35 साल के बालेंद्र शाह हैं, जिन्हें “बालेन” के नाम से जाना जाता है। वे राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के प्रतिनिधि हैं, जिसे पूर्व टेलीविजन प्रस्तोता रबी लामिछाने ने 2022 में शुरू किया था।
35 साल के इंजीनियर बालेन रैपर से राजनीतिज्ञ बने हैं और माना जाता है कि इनकी युवाओं के बीच पकड़ अच्छी है। इन्हें भविष्य के प्रधानमंत्री के तौर पर भी प्रोजेक्ट किया जा रहा है और वे ओली के खिलाफ झापा-5 चुनाव क्षेत्र में उनके सामने हैं।
इस बीच, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड मार्क्सिस्ट लेनिनिस्ट) का नेतृत्व 73 साल के ओली कर रहे हैं, जो अभी भी एक ताकतवर हस्ती हैं।
एक और पूर्व प्रधानमंत्री, पुष्प कमल दहल प्रचंड (71), लेफ्ट पार्टियों के एक प्लेटफॉर्म, नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के को-ऑर्डिनेटर हैं।
देश की सबसे पुरानी पार्टी, नेपाली कांग्रेस की कमान अब गगन थापा (49) के हाथ में है, जिन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की जगह ली है।
राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) भी मौजूद है, जो राजशाही की समर्थक है, और पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह को अभी भी कुछ जगहों पर समर्थन मिल रहा है।
1990 के पीपुल्स मूवमेंट ने संवैधानिक राजशाही और मल्टीपार्टी डेमोक्रेसी शुरू होने से पहले, नेपाल पर 240 साल तक शाह वंश का शासन था।
माओवादी विद्रोहियों के साथ 2006 के शांति समझौते के बाद, नेपाल 2008 में एक फेडरल डेमोक्रेटिक रिपब्लिक बन गया। तब से, नेपाल राजनीतिक अस्थिरता, बार-बार सरकार बदलने और घोटालों से जूझ रहा है।
भारत के नेपाल से भरोसे का रिश्ता हमेशा से ही रहा है। शिक्षा, व्यापार, और पावर सेक्टर से लेकर सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में आपसी संबंध काफी मजबूत रहे हैं।
हालिया वर्षों में चीन की नेपाल में दखलअंदाजी बढ़ी। खासकर काठमांडू की उस समय की माओवादी सरकार के साथ ट्रेड को लेकर समझौते हुए। 2017 में बीजिंग के साथ बड़ा बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) हमेशा सुर्खियों में रहा।
दिसंबर 2024 में, प्रधानमंत्री के तौर पर अपनी बीजिंग यात्रा के दौरान, ओली ने बीआरआई सहयोग के लिए चीन के साथ एक फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए थे। इसका मकसद बीआरआई के तहत आने वाले प्रोजेक्ट्स और सहयोग को गाइड करना है—जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और इकोनॉमिक सहयोग शामिल है—जिसकी मियाद तीन साल तक तय की गई, हालांकि इसे बढ़ाए जाने की गुंजाइश भी छोड़ी गई।
वैसे इसे लागू करने में काफी देरी हुई है, और अभी तक कोई बड़ा प्रोजेक्ट फाइनल नहीं हुआ है, जिससे इस पहल के असर को लेकर चिंता बढ़ गई है।
इसके अलावा, श्रीलंका के साथ भी कुछ वित्तीय कारणों से डील सहज नहीं हो पाई है। ये सब कुछ नई सरकार के लिए किसी कसौटी से कम नहीं है।
मार्च 2026 का चुनाव इस बात की कसौटी माना जा रहा है कि क्या नेपाल की युवा पीढ़ी पारंपरिक राजनीतिक ढांचे को बदल सकती है या क्या ये नतीजे नेपाल की विदेश नीति को भी नई दिशा दे पाएंगे?
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
सिद्धारमैया ने स्वास्थ्यकर्मियों से की अपील, जाति और धर्म से ऊपर उठकर मानवता के साथ सेवा करें
बेंगलुरु, 21 फरवरी (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शनिवार को कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वालों को जाति और धर्म से ऊपर उठकर मानवता के साथ सेवा करनी चाहिए।
वे स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा आयोजित अभय हस्त कार्यक्रम के तहत नियुक्ति पत्र वितरित करने के बाद बोल रहे थे। इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन में विभिन्न पदों पर भर्ती शामिल थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक हजार लोगों को नियुक्ति पत्र प्राप्त होने और स्वास्थ्य विभाग में कार्यभार संभालने पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करना केवल एक पेशा नहीं बल्कि जीवन बचाने और बीमारियों की रोकथाम से जुड़ी एक सार्थक सेवा है।
सिद्धारमैया ने कहा कि उनकी सरकार के दूसरी बार सत्ता में आने के बाद, रिक्त पदों को चरणबद्ध तरीके से भरने के प्रयास किए जा रहे हैं और भर्ती प्रक्रिया में कई मुद्दों का समाधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और पुलिसिंग जैसे सीधे तौर पर जन कल्याण से जुड़े क्षेत्र सरकार की प्रमुख प्राथमिकताएं हैं और इन क्षेत्रों में रिक्त पदों को भरने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि विभिन्न सरकारी विभागों में वर्तमान में 25 लाख से अधिक पद रिक्त हैं और इन्हें धीरे-धीरे भरा जाएगा।
सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए भर्ती प्रक्रिया काउंसलिंग के माध्यम से संचालित की जा रही है। डॉक्टरों सहित लगभग 5,700 पदों का स्थानांतरण काउंसलिंग के माध्यम से किया गया है। भर्ती और तबादलों की प्रक्रियाओं में भ्रष्टाचार को रोकना सरकार का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने सरकारी कर्मचारियों को तबादलों से संबंधित मामलों में शामिल बिचौलियों के झांसे में न आने की चेतावनी दी।
सभी स्वास्थ्यकर्मियों के महत्व को दोहराते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि गैर-चिकित्सा कर्मचारी स्वास्थ्य विभाग के कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उन्हें जाति और धार्मिक मतभेदों से परे मानवता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए।
उन्होंने कहा, जब मरीजों के इलाज के लिए खून की जरूरत होती है, तो कोई जाति या धर्म पर ध्यान नहीं देता। हालांकि एक बार जब लोग ठीक हो जाते हैं, तो वे फिर से जाति और धार्मिक विभाजन के चक्र में फंस जाते हैं।
सीएम ने इस बात पर जोर दिया कि बीमारियों की रोकथाम पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए और कहा कि स्वास्थ्य विभाग को इस संबंध में सक्रिय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत और बेहतर बनाने के उद्देश्य से कई योजनाएं लागू कर रही है।
--आईएएनएस
एएसएच/वीसी
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