Responsive Scrollable Menu

टैरिफ पर अमेरिकी कोर्ट के फैसले और ट्रंप की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर केंद्र ने जारी किया बयान, कहा- प्रभावों का अध्ययन जारी

नई दिल्ली, 21 फरवरी (आईएएनएस)। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा टैरिफ को गैर-कानूनी बताकर रद्द करने और फिर ट्रंप द्वारा 10 प्रतिशत का शुल्क लगाने पर वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय ने शनिवार को बयान कर कहा है कि वह इन सभी घटनाक्रमों के प्रभावों का अध्ययन कर रहा है।

वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया,हमने कल अमेरिकी उच्‍चतम न्यायालय आयात शुल्‍क पर दिए गए फैसले पर ध्यान दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने भी इस संबंध में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा कुछ कदम उठाए जाने की घोषणा की गई है। हम इन सभी घटनाक्रमों के प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं।

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम, 1977 के तहत बिना कांग्रेस की अनुमति दिए व्यापक टैरिफ लगाए हैं, जो कि संविधान के खिलाफ है। टैरिफ लगाने का अधिकार केवल अमेरिकी कांग्रेस के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं। इस कारण टैरिफ को रद्द किया जा रहा है।

इस फैसले के बाद हुई प्रेंस कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि उन्होंने धारा 122 का उपयोग करते हुए 150 दिनों की अवधि के लिए अमेरिका में आयातित वस्तुओं पर 10 प्रतिशत का टैरिफ लगा दिया है। यह अस्थायी आयात शुल्क 24 फरवरी से लागू होगा।

व्हाइट हाउस की ओर से जारी एक फैक्टशीट में कहा गया कि ट्रंप ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 के तहत दी गई शक्ति का प्रयोग किया है। इसके तहत राष्ट्रपति सरचार्ज और अन्य विशेष आयात प्रतिबंधों के माध्यम से कुछ आधारभूत अंतरराष्ट्रीय भुगतान समस्याओं को संबोधित कर सकते हैं।

फैक्टशीट के मुताबिक, अमेरिका के सामने आने वाली आधारभूत अंतरराष्ट्रीय भुगतान समस्याओं का अधिक प्रभावी ढंग से समाधान करने के लिए कुछ वस्तुओं पर अस्थायी आयात शुल्क लागू नहीं होगा।

इनमें कुछ महत्वपूर्ण खनिज, मुद्रा और बुलियन में उपयोग होने वाली धातुएं, ऊर्जा और ऊर्जा उत्पाद, प्राकृतिक संसाधन और उर्वरक, कुछ कृषि उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स और फार्मास्यूटिकल सामग्री, कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स, यात्री वाहन और अन्य उत्पाद शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, राष्ट्रपति ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय को धारा 301 के तहत अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए कुछ अनुचित और भेदभाव करने वाले कानूनों, नीतियों और प्रथाओं की जांच करने का निर्देश दिया है जो अमेरिकी व्यापार पर बोझ डालते हैं या उसे प्रतिबंधित करते हैं।

--आईएएनएस

एबीएस/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

Continue reading on the app

हाई शुगर से ज्यादा खतरनाक है लो शुगर, एक छोटी सी गलती बिगाड़ सकती है सेहत

नई दिल्ली, 21 फरवरी (आईएएनएस)। आज की जीवनशैली ऐसी है कि पूरा दिन एक ही कुर्सी पर बैठकर निकल जाता है और शारीरिक गतिविधि भी कम हो जाती है।

ऐसे में शरीर में धीरे-धीरे कई बीमारियां पनपने लगती हैं और सबसे पहले रक्त में शुगर की मात्रा प्रभावित होती है, जिससे डायबिटीज की परेशानी कम उम्र में ही हो जाती है। डायबिटीज होने के पीछे कई कारण होते हैं, लेकिन खराब जीवनशैली मुख्य कारण है।

डायबिटीज को लेकर भी लोगों के बीच भ्रम की स्थिति रहती है। धारणा है कि हाई शुगर सबसे खतरनाक होता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि लो शुगर उससे ज्यादा खतरनाक होता है। विज्ञान की भाषा में लो शुगर को हाइपोग्लाइसीमिया कहा जाता है, जिसमें मस्तिष्क को घातक क्षति पहुंचती है। यह तब होता है जब रक्त में ग्लूकोज का स्तर बहुत कम हो जाता है और मस्तिष्क तक सभी तरीके से पोषण नहीं पहुंच पाता। ऐसी स्थिति अचानक बेहोशी, दौरे, और यहां तक कि आपातकालीन अवस्था तक ले जा सकती है।

रक्त में ग्लूकोज की मात्रा संतुलित रहना बहुत जरूरी है। अगर ग्लूकोज की मात्रा 70 एमजी/डीएल होती है तो ये चिंता का विषय है। इसके साथ ही अगर स्तर 40-50 के बीच है तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए। यह स्थिति आपातकालीन स्थिति होती है। इस स्थिति में तुरंत इलाज की जरूरत होती है। आयुर्वेद में कई ऐसे आसान और प्रभावी तरीके बताए गए हैं, जिनसे रक्त में कम होते ग्लूकोज के स्तर को संतुलित रखा जा सकता है।

इसके लिए दिनचर्या में मुलेठी का हल्का काढ़ा, खजूर या किशमिश शामिल करें और इसके साथ ही छोटे-छोटे अंतराल पर भोजन लेना शुरू करें। इससे शरीर में ग्लूकोज बनता रहेगा और हल्का मीठा ग्लूकोज और ऊर्जा में वृद्धि करेगा। आयुर्वेद के अनुसार, अत्यधिक उपवास, अनियमित भोजन और मानसिक तनाव वात वृद्धि कर ऊर्जा असंतुलन पैदा कर सकते हैं, इसलिए लंबे समय तक खुद को भूखा न रखें और कुछ न कुछ खाते रहें। ग्लूकोज को संतुलित करने के लिए आहार में कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन का संयोजन शामिल करें। कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन का संयोजन शरीर को ऊर्जा और मस्तिष्क को मजबूती देता है।

--आईएएनएस

पीएस/डीकेपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

Continue reading on the app

  Sports

सुपर-8 में इंग्लैंड से हिसाब बराबर करेगी श्रीलंकाई टीम, मैच से पहले दहाड़े फील्डिंग कोच आर श्रीधर

Sri Lankan coach R Sridhar statement on super-8 Match Against England: आईसीसी टी20 विश्व कप 2026 में श्रीलंका क्रिकेट टीम सुपर-8 में अपना पहला मैच इंग्लैंड के साथ खेलेगी. विश्व कप से पहले इंग्लैंड ने श्रीलंका को उसके घर में तीन टी20 मैचों की सीरीज में बुरी तरह हराया था, लेकिन फील्डिंग कोच ने आर श्रीधर ने कहा है कि सुपर-8 के लिए श्रीलंकाई टीम पूरी तरह से तैयार है. Sat, 21 Feb 2026 23:55:02 +0530

  Videos
See all

Trump Tariff Big Breaking: टैरिफ पर ट्रंप को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से झटका! | Tariff Deal | PM Modi #tmktech #vivo #v29pro
2026-02-21T23:00:46+00:00

Chandra Grahan 2026: होली से पहले चंद्र ग्रहण बनेगा काल! | Lunar Eclipse | Astrology | Numerology #tmktech #vivo #v29pro
2026-02-21T22:30:08+00:00

'लखनवी वो नहीं जो लखनऊ में रहता है..' #shortsviral #sahityaaajtaklucknow #shayari #heartbroken #tmktech #vivo #v29pro
2026-02-21T22:30:09+00:00

PM Kisan Samman Nidhi Yojana: 22वीं किस्त का इंतज़ार खत्म, ऐसे चेक करें अपना स्टेटस! Top News |N18V #tmktech #vivo #v29pro
2026-02-21T22:00:23+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers