मीनाक्षी शेषाद्री बोलीं- शास्त्रीय नृत्य गांव तक ले जाऊंगी:30 साल बाद खरगोन में दूसरी पारी का ऐलान; कहा- भविष्य को लेकर बहुत उत्सुक
फिल्म अभिनेत्री मीनाक्षी शेषाद्री शनिवार शाम 5:30 बजे खरगोन पहुंची। वे नवग्रह मेले के समापन पर शास्त्रीय शास्त्री नृत्य प्रस्तुति में शामिल हो रही हैं। खरगोन पहुंचने पर 90 के दशक की मशहूर अभिनेत्री मीनाक्षी ने कहा कि वह बॉलीवुड में 30 साल के ब्रेक के बाद अपनी दूसरी पारी के लिए तैयार हैं। भरतनाट्यम थोड़ा मुश्किल जरूर है लेकिन इस विशेष तरीके से किया जाए तो गांव तक के लोग आसानी से समझ सकते हैं। वे लेवल 1 व लेवल 2 सिटी से लेकर हिंदुस्तान के गांव तक शास्त्रीय संगीत को पहुंचाना चाहती है। खरगोन से इसकी शुरुआत कह सकते हैं। उन्होंने कहा कि मैं एक ऐसे परिवार में जन्मी जहां संगीत, नृत्य, अभिनय, शास्त्रीय ज्ञान व संस्कृत प्रचलित रहा। उसे वजह से मैं चलने से पहले नृत्य करना सीख लिया। मेरी मां ही मेरी गुरु थी भरतनाट्यम शैली में। शादी कर USA चली गईं थी पूर्व मिस इंडिया मीनाक्षी ने बताया दिल्ली में जब स्कूल की 12वीं कक्षा में थी तब मजाक में ब्यूटी कॉन्टेस्ट में भाग ले लिया था आश्चर्य की बात थी कि मिस इंडिया भी चुन ली गई। उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। फौरन कई फिल्म भी ऑफर हो गई। मेरे पापा अंग्रेजी में समझाते थे सक्सेस इस एपीसी। ए मतलब एबिलिटी यानी योग्यता। बी यानी ब्रेक। यानी अपॉर्चुनिटी का सही दरवाजे से दस्तक देना। सी मतलब करेज यानी आत्म शक्ति, आत्मविश्वास व बड़ी शक्ति में विश्वास। मेरे सफर में यह तीन बातें सम्मिलित थी। 80-90 के दशक में 80 से 90 फिल्में की थी जिसमें हिंदी भाषा के अलावा तमिल तेलुगू की फिल्में भी शामिल हैं। उसके बाद शादी कर USA चली गई। 30 साल के गैप के बाद मैं भविष्य को लेकर उत्सुक हूं। दामिनी एक फिल्म है और मैंने उसमें दामिनी का पात्र किया। फिल्म में जो बताया गया आज भी हिंदुस्तान में वह हावी है। इसका दमन जरूरी है। महिलाओं को साहस दिखाने की आवश्यकता है और यह भारत है जहां शक्ति रूप से संसार रचा गया। शक्ति रूप से ही ठीक किया जा सकता है। मुझे अश्लीलता पसंद नहीं है। मैं वैसे ही पत्र निभाउं जो परिवार के साथ देख सकूं। शॉर्टकट से सक्सेस पर उन्होंने कहा, आज घोर कलयुग है। लक्ष्मी को शॉर्टकट से पा सकते हैं लेकिन सत्य की राह ही सही लक्ष्मी है। परिवर्तन का दौर है। सोशल मीडिया की वजह से बड़े भी फिल्में भी नहीं चल रही है।
जावेद अख्तर ने तालिबान के नए कानून की निंदा की:धर्म के नाम पर महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा को बताया अमानवीय कदम
बॉलीवुड के जाने-माने गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने तालिबान के उस नए कानून की कड़ी निंदा की है, जिसमें घरेलू हिंसा को जायज बताया गया है। उन्होंने इसे धर्म के नाम पर इंसानियत का अपमान कहा और भारतीय मौलवियों-मुफ्तियों से बिना शर्त इसे खारिज करने की अपील की। तालिबान की नई 90 पेज की दंड संहिता के तहत घरेलू हिंसा को बड़े स्तर पर अनुमति दी गई है। इस कानून के मुताबिक यदि पति अपनी पत्नी को बिना हड्डी टूटे या खुले घाव के मारता है, तो वह अपराध नहीं माना जाएगा। इसके अलावा, यदि कोई महिला बिना पति की अनुमति अपने मायके जाती है, तो उसे तीन महीने तक जेल की सजा का सामना भी करना पड़ सकता है। जावेद अख्तर ने सोशल मीडिया x पर पोस्ट शेयर कर कहा कि तालिबान ने पत्नी की पिटाई को तभी अपराध माना है जब हड्डी टुटे या गंभीर चोट हो, और इसके लिए भी सबूत का जिम्मा महिला पर डाला है, जो कि एक भयावह सामाजिक चुनौति है। उन्होंने इसके लिए पूरे धार्मिक समुदाय की प्रतिक्रिया की आवश्यकता पर जोर दिया है ताकि इस तरह के नियमों को धर्म के नाम पर लागू होने से रोका जा सके। विश्लेषकों का कहना है कि तालिबान द्वारा जारी यह कोड महिलाओं के कानूनी अधिकारों को कमजोर करने वाला है और इससे घरेलू हिंसा जैसी कुप्रथाएं सरकारी मान्यता पाती दिखाई देती हैं। पहले के अधिकार, जैसे कि 2009 का EVAW (Elimination of Violence Against Women) कानून, अब पूरी तरह प्रभावहीन होते जा रहे हैं, जिससे महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों में अब न्याय पाना और भी कठिन हो गया है। तालिबान के इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारी आलोचना बटोरी है। कई मानवाधिकार समूहों और संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय निकायों ने इसे महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ एक गंभीर और विघातक कदम बताया है। आलोचकों का कहना है कि यह कानून सिर्फ महिलाओं के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देगा बल्कि उन्हें सामाजिक और कानूनी रूप से भी असमर्थ बनाएगा।
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