'विदेशी स्कैम सेंटरों के खिलाफ आक्रामक साइबर क्षमताओं का इस्तेमाल', ट्रंप प्रशासन का दावा
वाशिंगटन, 22 अक्टूबर (आईएएनएस)। अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने पहली बार विदेशी ऑनलाइन ठगी नेटवर्क और स्कैम सेंटरों के खिलाफ आक्रामक साइबर कार्रवाई शुरू की है।
बुधवार को व्हाइट हाउस में साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी पर आयोजित एक बैठक में व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कहा, आपके हस्ताक्षर वाले कार्यकारी आदेश के बाद पहली बार हम विदेशी स्कैम सेंटरों को खत्म करने, बाधित करने और निष्क्रिय करने के लिए आक्रामक साइबर क्षमताओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसा पहले कभी नहीं किया गया था।
मिलर ने कहा कि ट्रंप ने प्रभावी रूप से साइबर अपराधियों के खिलाफ साइबर युद्ध छेड़ दिया है, जिससे अमेरिकी नागरिकों की पेंशन, जीवनभर की बचत, रिटायरमेंट फंड और कमाई को बचाने में मदद मिली है।
अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि इस अभियान में अमेरिकी साइबरकॉम, राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) और उनकी उन्नत तकनीकी क्षमताओं को भी शामिल किया गया है।
उन्होंने कहा, हम विदेशी साइबर नेटवर्कों से जुड़ी खुफिया जानकारी और ट्रैकिंग डेटा सीधे नेशनल कोऑर्डिनेशन सेंटर और होमलैंड सिक्योरिटी टास्क फोर्स को दे रहे हैं।
हेगसेथ ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधी गिरोहों और कुछ दुश्मन देशों की सैन्य ताकतों के बीच संबंध दिखाई देते हैं, हालांकि उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अगस्त में जारी उनके राष्ट्रीय सुरक्षा ज्ञापन ने निजी कंपनियों को भी हैकरों के खिलाफ आक्रामक और रक्षात्मक दोनों तरह की कार्रवाई में शामिल होने की अनुमति दी है।
हालांकि, अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि किन स्कैम सेंटरों को निशाना बनाया गया है या वे किस देश में स्थित हैं।
मिलर ने अभियान को ट्रंप की व्यापार नीति से जोड़ते हुए कहा कि कुछ विदेशी अर्थव्यवस्थाएं अमेरिकी बुजुर्गों से धोखाधड़ी करके मिलने वाले पैसों पर टिकी हुई हैं। अमेरिका कोई ऐसा खजाना नहीं है, जिसे दुनियाभर के ठग लूटते रहें।
होमलैंड सिक्योरिटी के सचिव मार्कवेन मुलिन ने कहा कि ऑनलाइन ठगी का सबसे ज्यादा असर 60 साल से अधिक उम्र के लोगों पर पड़ा है। उन्होंने बताया, सिर्फ 2025 में 60 वर्ष से अधिक उम्र के अमेरिकी नागरिक साइबर अपराधों में 7.7 अरब डॉलर गंवा चुके हैं। कई लोगों की पूरी रिटायरमेंट बचत खत्म हो गई है।
मिलर ने एक आम धोखाधड़ी का उदाहरण देते हुए ग्रैंडपेरेंट स्कैम का जिक्र किया। उन्होंने कहा, किसी दादा-दादी या माता-पिता को फोन आता है कि उनका कोई प्रियजन गिरफ्तार हो गया है और उसे जेल से छुड़ाने के लिए तुरंत 10,000 डॉलर भेजने होंगे, जबकि वास्तव में कोई गिरफ्तार नहीं हुआ होता और पैसा सीधे किसी विदेशी स्कैम सेंटर के पास पहुंच जाता है।
ट्रंप ने कहा कि बुजुर्गों की सुरक्षा बहुत जरूरी है, क्योंकि वे इस तरह की ठगी के सबसे बड़े शिकार बनते हैं। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि अगर उन्हें ऐसा कोई संदिग्ध कॉल मिले तो वे अपने भरोसेमंद परिवार के सदस्यों से मदद लें।
मुलिन ने ऑनलाइन बाल शोषण के खिलाफ चल रही कार्रवाई की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केवल सीक्रेट सर्विस ने ही 14,600 बाल शोषण से जुड़े वीडियो और 35,600 से अधिक तस्वीरें बरामद की हैं।
उन्होंने होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशन्स के नो टू प्रोटेक्ट अभियान का भी जिक्र किया, जिसका उद्देश्य परिवारों को डिजिटल ब्लैकमेल और ऑनलाइन शोषण से बचने के बारे में जागरूक करना है। मुलिन ने कहा, हर आंकड़े के पीछे एक इंसानी जिंदगी होती है।
ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार उन ऑनलाइन गिरोहों के खिलाफ भी आक्रामक कार्रवाई कर रही है, जो युवाओं को सेक्सटॉर्शन का शिकार बनाते हैं। ऐसे कई मामलों में पीड़ितों की जिंदगी बर्बाद हो गई और कुछ लोगों ने आत्महत्या तक कर ली।
ट्रंप ने इस मुद्दे पर फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप के प्रयासों की सराहना की और कहा कि उन्होंने ‘टेक इट डाउन एक्ट’ को पारित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अमेरिकी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने भी कहा कि सरकार सेक्सटॉर्शन के खतरे का सीधे मुकाबला कर रही है।
रक्षा मंत्री हेगसेथ ने कहा, साइबर अपराधियों के खिलाफ आक्रामक और रक्षात्मक दोनों मोर्चों पर कार्रवाई करके हम अपने सैनिकों, अमेरिकी नागरिकों और देश की सुरक्षा की रक्षा कर रहे हैं।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
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France Protests India Advisory | फ्रांस में उग्र प्रदर्शन और तनाव के बीच भारत ने जारी की एडवाइजरी, राष्ट्रपति मैक्रों और डोनाल्ड ट्रंप के बीच तीखी जुबानी जंग
यूरोपीय देश फ्रांस इस समय अपनी सबसे गंभीर आंतरिक चुनौतियों और भीषण विरोध-प्रदर्शनों के दौर से गुजर रहा है। देश भर में लगातार भड़की हिंसा और तनावपूर्ण हालातों को देखते हुए भारत सरकार ने वहां रह रहे अपने नागरिकों के लिए आधिकारिक एडवाइजरी (Travel Advisory) जारी की है। इस बीच, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच छिड़ी जुबानी जंग ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई हलचल पैदा कर दी है। 10 अक्टूबर को फ्रांस में भारतीय दूतावास द्वारा जारी इस एडवाइजरी में लोगों से कहा गया है कि वे बड़ी भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
किसी भी आपात स्थिति में, भारतीय नागरिक पेरिस स्थित भारतीय दूतावास से +33 6 48 34 00 63 नंबर पर या cons.paris@mea.gov.in ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा, वे मार्सिले (Marseille) स्थित कॉन्सुलेट जनरल से +33 7 43 16 25 59 नंबर पर या cgo.marseille@mea.gov.in ईमेल के जरिए भी संपर्क कर सकते हैं।
एडवाइजरी में कहा गया है, "फ्रांस में हाल के घटनाक्रमों और कुछ इलाकों में लगाए गए कर्फ्यू को देखते हुए, कृपया सतर्क रहें और पूरी सावधानी बरतें।" इसमें आगे कहा गया है, "कृपया उन जगहों पर जाने से बचें जहां विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं और जहां भारी भीड़ जमा हो रही है। साथ ही, स्थानीय फ्रांसीसी प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों और सलाह का पालन करें।"
फ्रांस में विरोध-प्रदर्शन
फ्रांस इन दिनों पिछले कई सालों के सबसे भीषण विरोध-प्रदर्शनों का सामना कर रहा है। प्रशासन उन प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए संघर्ष कर रहा है, जो बढ़ती महंगाई और स्कूलों की खराब स्थिति को लेकर विरोध कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, पिछले हफ्ते ही पूरे देश में 2,400 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया। इन लोगों ने पुलिस के साथ झड़प की थी और कई वाहनों व इमारतों में आग लगा दी थी।
पेरिस में बुधवार को रात का नया कर्फ्यू लागू किया गया है। पुलिस ने "बिना पूर्व सूचना के सार्वजनिक रूप से इकट्ठा होने" के खिलाफ चेतावनी दी है। इसके अलावा, गुरुवार को पेरिस के कुछ हिस्सों में सुबह 8:00 बजे से रात 8:00 बजे तक विरोध-प्रदर्शनों पर रोक लगा दी गई है। इस प्रतिबंध के दायरे में फ्रांसीसी राजधानी के कई प्रमुख इलाके आएंगे, जिनमें राष्ट्रपति भवन (एलिसी पैलेस), संसद के दोनों सदन, और लूव्र संग्रहालय (Louvre museum) व चैंप्स-एलिसीज़ (Champs-Elysees) जैसे पर्यटन स्थल शामिल हैं।
मैक्रों बनाम ट्रंप
फ्रांस में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं, और इसी बीच फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है। बुधवार को मैक्रों ने अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में राजनीतिक फायदा उठाने के लिए दंगों का इस्तेमाल करने पर ट्रम्प पर निशाना साधा और कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने "बेवकूफी भरी टिप्पणियां" की हैं।
दोहा में पत्रकारों से बात करते हुए फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने कहा, "कुछ लोग फ्रांस को नुकसान पहुंचाकर अपना प्रचार करते हैं - ऐसे नेता जो चुनाव प्रचार के मूड में हैं, चाहे वे इस क्षेत्र के हों या अटलांटिक के उस पार के।"
अमेरिका में मध्यावधि चुनावों के प्रचार के दौरान, ट्रम्प ने इन दंगों को "प्रवासियों, जिहादियों और कम्युनिस्टों" से जोड़ा था। उन्होंने फ्रांस की दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन की भी तारीफ की थी, जिन्होंने मैक्रों के बयानों को "साजिशपूर्ण" करार दिया है।
बुधवार को 'X' (ट्विटर) पर उन्होंने लिखा, "पिछले शनिवार को हमने जो तस्वीरें देखीं, वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से नहीं बनी थीं: वे उस दुखद सच्चाई को दिखाती हैं कि मैक्रों के 10 साल के शासन के बाद फ्रांस की हालत क्या हो गई है।"
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