भारत-ब्राजील रिश्तों को मिली नई मजबूती, पीएम मोदी और राष्ट्रपति लूला की द्विपक्षीय बैठक में व्यापार, तकनीक और रक्षा सहयोग पर हुई चर्चा
नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में शनिवार (21 फरवरी) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा के बीच अहम द्विपक्षीय बैठक हुई. इस बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक, रक्षा और वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई. बता दें कि राष्ट्रपति लूला 18 से 22 फरवरी तक भारत के राजकीय दौरे पर हैं.
रमजान में अल-अक्सा को लेकर बढ़ा तनाव, इजरायल ने कड़ी की सुरक्षा लगाई ये पाबंदी
Al Aqsa Mosque: इजरायल और फिलीस्तीन के बीच तनाव की सबसे बड़ी वजह यरूशलम की वो मस्जिद भी है जिसे मुस्लिम समुदाय के लोग हरम अल-शरीफ करते हैं. इस मस्जिद का नाम है अल-अक्सा. जिसमें हर दिन सैकड़ों लोग नमाज अदा करने पहुंचे हैं. लेकिन इस बार इस मस्जिद को लेकर इजरायल ने सख्ती बरतना शुरू कर दी है. जिससे इलाके में भारी तनाव पैदा हो गया है.
यरुशलेम में स्थित इस मस्जिद को सबसे संवेदनशील धार्मकि स्थल माना जाता है. जहां रमजान की शुरुआत से ही पुलिस कार्रवाई, वक्फ कर्मचारियों की गिरफ्तारी और यहूदी समूहों की बढ़ती मौजूदगी से तनाव पैदा हो गया है. जिससे दशकों पुराना समझौता भी टूटने के कगार पर पहुंच गया है. विशेषज्ञों की मानें तो 1967 के बाद से चला आ रहा अल-अक्सा मस्जिद को लेकर संतुलन अब टूटने के कगार पर है. जो रमजान के महीने में ज्यादा खतरनाक हो सकता है.
जानें क्या है पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल ही में इजरायल ने अल-अक्सा मस्जिद के वरिष्ठ इमाम और यरूशलेम के पूर्व ग्रैंड मुफ्ती, शेख इकरीमा साबरी को इजराइली अधिकारियों ने मस्जिद में प्रवेश करने से रोक दिया. इजरायल ने ये कदम रमजान से ठीक पहले उठाया. प्रशासन ने आरोप लगाया है कि उनके भाषणों और बयानों से इलाके में हिंसा की स्थिति पैदा हो सकती है.
बता दें कि ये पहली बार नहीं है जब इजरायली अधिकारियों ने उनपर ऐसा प्रतिबंध लगाया हो. इससे पहले भी उन्हें कई बार मस्जिद में प्रवेश से रोका गया है. इजरायल की ओर से की गई इस पाबंदी के चलते तनाव चरम पर है. जिससे पूरे मध्य पूर्व में एक बार फिर से भारी तनाव पैदा होने का खतरा बढ़ गया है. बता दें कि अल-अक्सा मस्जिद इस्लाम में तीसरा सबसे पवित्र स्थल माना जाता है.
60 साल पहले हुआ था ये समझौता
बता दें कि साल 1967 के युद्ध के बाद एक समझौता हुआ था. जिसके तहत अल-अक्सा मस्जिद परिसर में नमाज का अधिकार सिर्फ मुसलमानों को है. इस स्थान को यहूदी समुदाय टेम्पल माउंट मानता है और दावा करता है कि यहां प्राचीन मंदिर हुआ करते थे. लेकिन इस समझौते के तहत अल-अक्सा मस्जिद की प्रशासनिक जिम्मेदारी जॉर्डन समर्थित वक्फ के पास है, जबकि सुरक्षा नियंत्रण इजराइल के पास है. इसी समझौते से यहां सालों से शांति बनी हुई है. लेकिन इस बार इजरायल ने इस शांति को खराब करने वाला कदम उठाया है.
रमजान के महीने में बढ़ाई गई सख्ती
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बार रमजान के महीने में अल-अक्सा के इमाम शेख मोहम्मद अल-अब्बासी को मस्जिद परिसर से हिरासत में लेने की भी खबर आई. इसके साथ ही कई वक्फ कर्मचारियों को प्रशासनिक हिरासत में रखा गया. या उन्हें मस्जिद परिसर में प्रवेश नहीं दिया गया. फिलिस्तीनी सूत्रों की मानें तो दर्जनों कर्मचारियों पर पाबंदी लगी है और वक्फ के दफ्तरों में तोड़फोड़ की गई है. हालांकि इजराइली पुलिस और आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
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