Maharastra Politics | 'गुंगी गुड़िया' पर महाराष्ट्र में सियासत, बुरी तरह फंस गई कांग्रेस | Eknath
Maharastra Politics | महाराष्ट्र की राजनीति में उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार (Sunetra Pawar) को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस (Congress) की ओर से सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए राज्य की उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के लिए 'गूंगी गुड़िया' (Gungi Gudia) शब्द का प्रयोग किया गया, जिसके बाद राज्य में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। #sunetrapawar #eknathshinde #congress #maharashtrapolitics #gungigudia #deputycm #mahayuti #ncpnews You can Search us on YouTube by- NBT, NBT TV Live, Navbharat Times, Times Now, TNN, TNNB, Navbharat TV, Hindi News, Latest news and @timesnownavbharat About Channel: Times Now Navbharat देश का No.1 Hindi news है। यह चैनल भारत और दुनिया से जुड़ी हर Latest News और Breaking News , राजनीति, मनोरंजन और खेल से जुड़े समाचार आपके लिए लेकर आता है। इसलिए सब्सक्राइब करें और बने रहें टाइम्स नाउ नवभारत के साथ Times Now Navbharat is India's fastest growing Hindi News Channel with 24 hour coverage. Get Breaking news, Latest news, Politics news, Entertainment news and Sports news from India & World on Times Now Navbharat. ------------------------------------------------------------------------------------------------------------- Watch Live TV : https://www.timesnowhindi.com/live-tv Subscribe to our other network channels: Times Now: https://www.youtube.com/TimesNow Zoom: https://www.youtube.com/zoomtv ------------------------------------------------------------------------------------------------------------- You can also visit our website at: https://www.timesnowhindi.com Download our App for Breaking News: https://tinyurl.com/bde8rv84 Like us on Facebook: https://www.facebook.com/Timesnownavbharat Follow us on Twitter: https://twitter.com/TNNavbharat Follow us on Instagram: https://www.instagram.com/timesnownavbharat
Explainer: क्यों सुलग रहा है ई20 पेट्रोल का मुद्दा? जानिए इस पूरे विवाद की शुरुआत से लेकर अब तक का घटनाक्रम
E20 पेट्रोल को लेकर बीते कई दिनों से लगातार हंगामा जारी है। पहले सोशल मीडिया पर इसे लेकर कई तरह के दावे किए गए, फिर इस पर राजनीति शुरू हो गई और जैसे-जैसे सियासत बढ़ी, सरकार की ओर से भी सफाई सामने आई। सरकार के स्पष्टीकरण के बाद भी यह विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है।
स्थिति यह है कि कोई प्रधानमंत्री को पीड़ितों की चिट्ठी देने की कोशिश कर रहा है तो कोई सड़क परिवहन मंत्री के घर तक मार्च कर रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ई20 को लेकर विवाद कब शुरू हुआ, इसमें अब तक क्या-क्या हो चुका है, विपक्ष के दावे क्या हैं और सरकार का इस पर क्या कहना है?
ताजा घटनाक्रम: आम आदमी पार्टी और युवा कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास तक मार्च निकालने का ऐलान किया था। उनकी पार्टी ने दावा किया कि उसने देश भर से 2.33 लाख लोगों के हस्ताक्षर जुटाए हैं और प्रधानमंत्री को याचिका सौंपना चाहती है। दोपहर 12 बजे केजरीवाल करीब 100 लोगों के साथ पार्टी मुख्यालय से निकले, लेकिन दिल्ली पुलिस ने मार्च की अनुमति नहीं दी। फिरोजशाह रोड पर बैरिकेड लगाकर जुलूस रोक दिया गया, जिसके बाद आप नेताओं और कार्यकर्ताओं ने वहीं धरना शुरू कर दिया।
करीब सवा घंटे तक चले इस विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने आश्वासन दिया कि शिकायतें प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचा दी जाएंगी, जिसके बाद धरना समाप्त हुआ। हालांकि केजरीवाल ने स्पष्ट किया कि E20 के खिलाफ उनका आंदोलन जारी रहेगा। इससे एक दिन पहले नागपुर में युवा कांग्रेस ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के आवास तक मार्च निकालने की कोशिश की। पुलिस ने रास्ते में बैरिकेड लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।
आखिर E20 पेट्रोल क्या है और इसके उद्देश्य क्या हैं?
E20 ऐसा ईंधन है जिसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। एथेनॉल एक प्रकार का जैव ईंधन है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से बनाया जाता है। सरकार ने इसे तीन बड़े उद्देश्यों के साथ बढ़ावा दिया है जिसमें कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता कम करना, प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन घटाना, तथा किसानों और बायोफ्यूल उद्योग की आय बढ़ाना शामिल है।
विपक्ष की आपत्ति क्या है?
आम आदमी पार्टी का कहना है कि सरकार लोगों पर एक ही प्रकार का ईंधन थोप रही है। पार्टी की मुख्य मांगें हैं कि लोगों को E20 के साथ सामान्य पेट्रोल और ई10 का भी विकल्प मिले, पेट्रोल की कीमत घटाकर 82 रुपये प्रति लीटर की जाए, और सरकार E20 नीति की समीक्षा करे। वहीं कांग्रेस पार्टी का कहना है कि सरकार वैज्ञानिक परीक्षणों का हवाला दे रही है, लेकिन देश भर के वाहन मालिक और मैकेनिक लगातार शिकायतें कर रहे हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि लोगों को कम माइलेज, इंजन खराब होने, पुराने वाहनों में ईंधन इनजेक्टर जाम होने, फ़्यूल पाइप खराब होने और रबर पार्ट्स में दरार जैसी समस्याएं आ रही हैं, और पार्टी ने सरकार से इन शिकायतों का जवाब मांगा है।
इसके अलावा शिवसेना-मनसे के नेता उद्धव ठाकरे ने मुंबई में आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए युवाओं से अपील की कि वे विरोध की इस चिंगारी को जिंदा रखें।
सोशल मीडिया पर E20 जनता पार्टी (EJP) का अभियान
E20 विवाद अब केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं रह गया है। सोशल मीडिया पर E20 जनता पार्टी (EJP) नाम से एक डिजिटल अभियान भी शुरू हुआ है। इसके तहत यह मांग की जा रही है कि लोगों को E20 के साथ 100 प्रतिशत शुद्ध पेट्रोल खरीदने का विकल्प मिले। इसमें एथेनॉल नीति खत्म करने की मांग नहीं की जा रही है, बल्कि विकल्प देने की मांग रखी गई है और पुराने वाहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। यह अभियान बहुत कम समय में सोशल मीडिया पर लाखों लोगों तक पहुंच चुका है।
सरकार का पक्ष और आंकड़े क्या कहते हैं?
केंद्र सरकार लगातार कह रही है कि E20 भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। सरकार का दावा है कि अगर पेट्रोल में एथेनॉल नहीं मिलाया जाता तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के दौरान दिल्ली में पेट्रोल लगभग 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकता था। लेकिन चूंकि पेट्रोल का 20 प्रतिशत हिस्सा घरेलू एथेनॉल था, जिसकी कीमत पहले से तय थी, इसलिए वैश्विक महंगाई का पूरा असर उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ा और उस समय दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर रहा।
सरकार के अनुसार इसके जरिए 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बची है। इसके अलावा 316 लाख मैट्रिक टन से ज्यादा कच्चे तेल के आयात की जरूरत कम हुई है और 950 लाख मैट्रिक टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम हुआ है, जबकि किसानों और डिस्टिलरी उद्योग को 1.66 लाख करोड़ रुपये का लाभ हुआ है।
नितिन गडकरी के बयान विवाद की वजह क्यों बने?
E20 विवाद में सबसे ज्यादा चर्चा केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के अलग-अलग समय पर दिए गए बयानों की हुई है। अपने पहले बयान में उन्होंने कहा था कि अगर E20 से एक भी गाड़ी खराब हुई है तो उसका नाम बताइए और वाहन निर्माता कंपनियों के विशेषज्ञों ने E20 को सुरक्षित बताया है। बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट में अपनी याचिका में गडकरी ने स्पष्ट किया कि E20 फ़्यूल पॉलिसी को तैयार करने और लागू करने की पूरी जिम्मेदारी पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) की है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय का इस नीति के निर्माण, संचालन, वित्तीय प्रबंधन या नियमन से कोई संबंध नहीं है क्योंकि वे कभी पेट्रोलियम मंत्रालय के प्रभारी नहीं रहे, इसलिए E20 कार्यक्रम के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। हालांकि यह कानूनी रूप से सही था, लेकिन लोगों ने सवाल उठाया क्योंकि E20 के प्रचार में वे सबसे आगे रहे थे।
गडकरी ने कोर्ट का दरवाजा क्यों खटखटाया?
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख करते हुए आरोप लगाया है कि सोशल मीडिया पर उनके और उनके परिवार को लेकर फर्जी व मानहानिकारक पोस्ट व डीपफेक सामग्री प्रसारित की जा रही है। इन पोस्टों में यह दावा किया गया कि उन्हें ई20 इथेनॉल कार्यक्रम से निजी आर्थिक लाभ हो रहा है। गडकरी ने इन आरोपों को पूरी तरह झूठा और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताया।
उन्होंने मेटा, अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और अज्ञात व्यक्तियों या संस्थाओं के खिलाफ दीवानी मानहानि का मुकदमा दायर करने की अनुमति मांगी, जिसे बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्वीकार करते हुए मुकदमा दायर करने की इजाजत दे दी।
क्या सचमुच पुराने वाहनों को नुकसान हो सकता है और माइलेज का सच क्या है?
सरकार और विशेषज्ञों का कहना है कि हर वाहन में समस्या नहीं आएगी, लेकिन पुराने वाहनों में लगे कुछ रबर और प्लास्टिक के हिस्से लंबे समय तक हाई इथेनॉल वाले ईंधन के साथ पूरी तरह अनुकूल नहीं होते हैं। इसी वजह से इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) पुराने वाहनों की सुरक्षा को लेकर चिंता जता चुका है।
जहां तक माइलेज की बात है, सरकार ने पहली बार संसद में स्वीकार किया कि E20 इस्तेमाल करने पर कुछ वाहनों में 2 से 6 प्रतिशत तक माइलेज कम हो सकता है। इसका कारण यह है कि एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल से कम होती है, इसलिए समान मात्रा का ईंधन जलाने पर वाहन थोड़ी कम दूरी तय कर सकता है, हालांकि यह असर हर वाहन में समान नहीं होगा।
सरकार अब क्या कर रही है?
E20 को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही कथित भ्रमित जानकारियों के बीच नागपुर साइबर पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की है। नागपुर पुलिस ने कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है क्योंकि उन पर E20 को लेकर गलत जानकारी फैलाकर लोगों को गुमराह करने का आरोप है।
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