जाने माने अभिनेता अनु कपूर ने राष्ट्रवाद और हिंदू राष्ट्र की बहस को केंद्र में ला खड़ा किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा राष्ट्रगान से पहले ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह श्लोक गाने के निर्देश का उन्होंने खुलकर स्वागत करते हुए इसे “अद्भुत और ऐतिहासिक निर्णय” बताया है। अनु कपूर ने कहा कि यह राष्ट्र की चेतना के लिए शुभ संकेत है। अनु कपूर ने साथ ही वेद, उपनिषद, रामायण और महाभारत को शांति, करुणा और विश्वकल्याण का संदेश देने वाला बताते हुए कहा कि भारतीय सभ्यता की आत्मा अहिंसा और सहअस्तित्व में विश्वास करती है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की कामना करने वाला समाज किसी के लिए खतरा कैसे हो सकता है? उन्होंने कहा कि अगर हिंदू प्रार्थना करता है तो वह केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समूचे विश्व के लिए मंगलकामना करता है। ऐसे में हिंदू पहचान से डर क्यों? उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू-मुस्लिम विभाजन की कथित खाई दरअसल राजनीतिक स्वार्थों की उपज है।
उन्होंने कहा कि जब दुनिया में ईसाई राष्ट्र हो सकते हैं, मुस्लिम राष्ट्र हो सकते हैं, यहूदी राष्ट्र हो सकते हैं, बौद्ध राष्ट्र हो सकते हैं तो एक हिंदू राष्ट्र क्यों नहीं हो सकता? अनु कपूर ने कहा कि समय आ गया है कि हिंदू एकता कायम हो और भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाये।
दूसरी ओर, अनु कपूर के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर यह सवाल फिर उठने लगा है कि क्या भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाना चाहिए? देखा जाये तो भारत की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और दार्शनिक जड़ें हिंदू सभ्यता में निहित हैं। यहां की परंपराएं, त्योहार, जीवन-दर्शन और सामाजिक संरचना उसी धरोहर से निर्मित हुए हैं। हिंदू राष्ट्र का अर्थ किसी अन्य धर्म के प्रति घृणा नहीं, बल्कि उस मूल सांस्कृतिक पहचान को संवैधानिक स्वीकृति देना है, जिसने इस भूमि को आकार दिया।
यह भी सत्य है कि “धर्मनिरपेक्षता” की आड़ में अक्सर तुष्टिकरण की राजनीति ने बहुसंख्यक समाज को अपराधबोध में जीने पर मजबूर किया है। यदि भारत स्वयं को हिंदू राष्ट्र घोषित करता है, तो इसका संदेश होगा कि यह राष्ट्र अपनी जड़ों पर गर्व करता है। यह वैसा ही होगा जैसे कई इस्लामी या ईसाई राष्ट्र अपनी धार्मिक पहचान के साथ भी लोकतांत्रिक ढांचा बनाए रखते हैं। इसके अलावा, हिंदू राष्ट्र की अवधारणा सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ कर सकती है। जब पहचान स्पष्ट होती है, तब भ्रम कम होता है। अनु कपूर का आह्वान इसी स्पष्टता की मांग करता है यानि धर्म, जाति और संप्रदाय से ऊपर उठकर राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया जाए, लेकिन अपनी मूल पहचान से समझौता किए बिना।
जहां तक हिंदू राष्ट्र के मुद्दे पर आरएसएस के विचार की बात है तो हम आपको बता दें कि संघ प्रमुख मोहन भागवत समय समय पर यह स्पष्ट करते रहे हैं कि भारत प्राचीन काल से ही हिंदू राष्ट्र है भले संविधान में इस प्रकार का कोई औपचारिक दर्जा ना हो लेकिन भारत हिंदू राष्ट्र ही है।
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केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि केंद्र सरकार आयात शुल्क पर अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय के हालिया फैसले की जांच करने के बाद ही कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह मामला वाणिज्य मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है। शनिवार को यहां पत्रकारों से बात करते हुए जोशी ने कहा कि मैंने मीडिया में पढ़ा है कि अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ फैसला सुनाया है और भारतीय सरकार उसका अध्ययन करेगी। इस पर जो भी प्रतिक्रिया देनी होगी, वह वाणिज्य मंत्रालय और विदेश मंत्रालय द्वारा दी जाएगी, न कि मेरे द्वारा।
उनकी यह टिप्पणी अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय के 6-3 के फैसले के बाद आई है, जिसमें कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन ने 1977 के अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) का इस्तेमाल करके व्यापक आयात शुल्क लगाने में अपनी शक्ति का दुरुपयोग किया है। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने जस्टिस नील गोरसच, एमी कोनी बैरेट और तीन उदारवादी न्यायाधीशों के साथ यह फैसला सुनाया कि आईईईपीए राष्ट्रपति को शुल्क लगाने का अधिकार नहीं देता, यह शक्ति संवैधानिक रूप से कांग्रेस के पास है। हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस फैसले को भयानक निर्णय करार दिया और 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 के तहत 10 प्रतिशत का नया वैश्विक शुल्क घोषित किया, जो 150 दिनों के लिए अस्थायी आयात अधिभार की अनुमति देता है।
इस बीच, जोशी ने भारत एआई शिखर सम्मेलन के दौरान कमीज उतारकर विरोध प्रदर्शन करने के लिए भारतीय युवा कांग्रेस की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि कांग्रेस पार्टी इस तरह का व्यवहार कर रही है, जबकि लगभग 150 देशों के 20 राष्ट्राध्यक्ष, 45 मंत्री और महत्वपूर्ण पदाधिकारी इसमें शामिल हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारत के प्रदर्शन का जश्न मनाने के बजाय, वे हंगामा करने की कोशिश कर रहे हैं। वे भारत के विकास में बाधा बनने की कोशिश कर रहे हैं।
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