T20 World Cup 2026: सुपर-8 से बाहर हुई 12 टीमों पर होगी करोड़ों की बरसात, जानिए किसे मिलेगा कितना पैसा?
T20 World Cup 2026: आईसीसी मेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत 7 फरवरी से हुई थी. भारत और श्रीलंका की मेजबानी में खेले जाने वाला ये टूर्नामेंट अपना आधे से ज्यादा सफर तय कर चुका है. इस टूर्नामेंट में कुल 20 टीमों ने हिस्सा लिया था, जिसमें से ग्रुप स्टेज के समापन के बाद कुल 12 टीमें बाहर हो गई हैं, जबकि 8 टीमों को सुपर-8 में एंट्री मिली है. टी20 वर्ल्ड कप 2026 में सुपर-8 के मुकाबले 21 फरवरी यानी आज से शुरू होने वाले है.
टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर-8 में भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, न्यूजीलैंड, इंग्लैंड, साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज ने जगह बनाई है. इसके साथ ही टी20 वर्ल्ड कप 2026 से ऑस्ट्रेलिया समेत कुल 12 टीमें बाहर हो चुकी है. इन सभी टीमों पर भी पैसों की बरसात होने वाली है. जी हां, आपने सही सुना है. आज हम आपको सुपर-8 से बाहर हो चुकी उन 12 टीमों के बारे में बताने वाले हैं, जिस पर भी पैसों की जमकर बारिश हो सकती है.
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ग्रुप स्टेज से बाहर हुई 12 टीमों को मिलेगा कितना पैसा
टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लीग स्टेज से अमेरिका, नामीबिया, नीदरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड, ओमान, इटली, नेपाल, स्कॉटलैंड, अफगानिस्तान, कनाडा, यूएई की टीमें बाहर हो चुकी हैं. टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम को 27.48 करोड़ रुपये की इनामी राशि दी जाएगी. उसके साथ ही इन 12 टीमों पर भी जमकर पैसों की बरसात होगी. अब इनमें से किस टीम को कितना पैसा मिलेगा आइए जानते हैं.
मैच जीतने वाली टीमों को मिलेगा 26 लाख
टी20 वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप स्टेज से बाहर होने वाले अफगानिस्तान, कनाडा, आयरलैंड, इटली, नामीबिया, नेपाल, नीदरलैंड, ओमान, स्कॉटलैंड, यूएई और अमेरिका को न्यूनतम 2.29 करोड़ रुपये की इनामी राशि दी जाएगी. इसके साथ ही हर एक मैच जीतने पर टीम को 26 लाख रुपये का बोनस भी मिलेगा.
Stunning cricketing action across the board on Day 3️⃣ of #T20WorldCup 2026 ???? ????
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सुपर-8 वाली टीमों पर होगी पैसों की बारिश
अब सुपर-8 में शामिल भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, न्यूजीलैंड, इंग्लैंड, साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज में से जो 4 टीमें बाहर होंगी और सेमीफाइनल में जगह नहीं बना पाएंगी. उन पर भी जमकर धन वर्षा होगी. सुपर 8 से बाहर होने वाली हर टीम को 3.48 करोड़ रुपये दिए जाएंगे.
इसके साथ ही सेमीफाइनल में हारने वाली हर टीम को 7.24 करोड़ रुपये दिए जाएंगे. टी20 वर्ल्ड कप 2026 रन-अप यानी उपविजेता को 14.65 करोड़ मिलेगा. तो वहीं इस बार की चैंपियन टीम पर 27.48 करोड़ की बारिश होने वाली है.
जानिए किस टीम को मिलेगा कितना पैसा
- विजेता - ₹27.48 करोड़
- उपविजेता - ₹14.65 करोड़
- सेमीफाइनल हारने वाली टीमें - ₹7.24 करोड़
- सुपर 8 से बाहर होने वाली टीमें - ₹3.48 करोड़
- ग्रुप स्टेज से बाहर होने वाली टीमें - ₹2.29 करोड़
- ग्रुप स्टेज में हर जीत का बोनस - ₹26 लाख
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अमेरिकी व्यापारिक समूहों और लॉमेकर्स ने ट्रंप टैरिफ के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत
न्यूयॉर्क, 21 फरवरी (आईएएनएस)। अमेरिका के व्यापारिक समूहों, वकालती संगठनों और वकीलों ने टैरिफ को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। कोर्ट ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ लगाने के लिए इमरजेंसी शक्तियों के इस्तेमाल को अमान्य घोषित कर दिया। वकालती और व्यापारी समूहों ने इस फैसले को कांग्रेसनल अथॉरिटी की फिर से पुष्टि और बिजनेस के लिए राहत बताया।
6-3 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने तय किया कि एग्जीक्यूटिव ब्रांच ने ज्यादातर ट्रेडिंग साझेदारों पर इंपोर्ट टैक्स लगाने के लिए इमरजेंसी पावर का इस्तेमाल करके अपने अधिकार का गलत इस्तेमाल किया और पिछले साल के कई टैरिफ को गैर-कानूनी बताया।
अमेरिकी वाणिज्य मंडल के कार्यकारी उपाध्यक्ष और मुख्य नीति अधिकारी नील ब्रैडली ने शुक्रवार को कहा कि यह फैसला बिजनेस और उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर है। उन्होंने कहा कि टैरिफ की वजह से कंपनियों को लागत में काफी बढ़ोतरी और सप्लाई-चेन में रुकावटों का सामना करना पड़ा है।
उन्होंने सरकार से गैर-कानूनी तरीके से वसूली गई ड्यूटी को रिफंड करने और आर्थिक ग्रोथ को बढ़ावा देने और परिवारों के लिए लागत कम करने के लिए पूरी टैरिफ पॉलिसी को रीसेट करने के लिए तेजी से कदम उठाने का आग्रह किया।
छोटे बिजनेस के लिए आवाज उठाने वाले संघ वी पे द टैरिफ्स ने भी पूरे, तेज और ऑटोमैटिक रिफंड की मांग की और कहा कि इसके कई सदस्यों ने अरबों डॉलर की ड्यूटी का भुगतान किया था जो कभी नहीं लगाई जानी चाहिए थी।
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार केंटकी से रिपब्लिकन अमेरिकी सीनेटर मिच मैककोनेल ने भी इस फैसले का स्वागत किया। मैककॉनेल ने एक बयान में कहा, अमेरिका के दोस्तों के साथ बड़े ट्रेड वॉर के खोखले फायदे आज के फैसले से बहुत पहले ही साफ हो गए थे। अमेरिका के लोग पहले से जानते हैं कि जब वॉशिंगटन बनावटी रुकावटें डालता है, तो घर पर बनाना और खरीदना ज्यादा महंगा हो जाता है।
एडवर्ड फिशमैन पहले राज्य विभाग और वित्त के अधिकारी थे और अब काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस में हैं। उन्होंने कहा कि इस फैसले से टैरिफ का इस्तेमाल तेजी से जवाब देने वाले जियोइकोनॉमिक टूल के तौर पर कम हो सकता है, हालांकि उन्हें दूसरे कानूनी तरीकों से ट्रेड बातचीत में अभी भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
कुछ व्यापारिक समूहों ने चेतावनी दी कि अनिश्चितता बनी हुई है और चिंता जताई कि दूसरे कानूनी तरीकों से टैरिफ फिर से लगाए जा सकते हैं।
--आईएएनएस
केके/एएस
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