जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय की कुलपति शांतिश्री धुलिपुडी पंडित की एक कथित जातिवादी टिप्पणी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। विश्वविद्यालय परिसर में छात्र संगठनों ने उनके इस्तीफे की मांग करते हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। विवाद की जड़ एक पॉडकास्ट में दिया गया उनका बयान है, जिसमें उन्होंने कहा कि दलित और अश्वेत समुदाय स्थायी पीड़ित बनकर या पीड़ित कार्ड खेलकर आगे नहीं बढ़ सकते। इस बयान के सामने होते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं और कैंपस की राजनीति एक बार फिर उबाल पर आ गई।
हम आपको बता दें कि यह पॉडकास्ट 16 फरवरी को प्रसारित हुआ था। इसमें कुलपति ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के 2026 इक्विटी एंटी डिस्क्रिमिनेशन रेगुलेशन पर टिप्पणी की थी। ये प्रस्तावित नियम उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव से निपटने के उद्देश्य से लाए गए थे। हालांकि कुछ सवर्ण समूहों के विरोध के बाद उच्चतम न्यायालय ने इन नियमों पर रोक लगा दी है।
पॉडकास्ट में कुलपति ने कहा कि ऐसे नियम अनावश्यक और अव्यवहारिक हैं। उनका कहना था कि किसी को स्थायी खलनायक बनाकर प्रगति संभव नहीं है और यह एक तरह का अस्थायी नशा है। उन्होंने अमेरिका में ब्लैक समुदाय और भारत में दलितों के संदर्भ का जिक्र करते हुए कहा कि स्थायी पीड़ित बने रहने से आगे बढ़ना मुश्किल है। इस टिप्पणी को कई छात्र संगठनों ने सीधा जातिवादी करार दिया।
हालांकि कुलपति ने सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया। उन्होंने कहा कि वह तथाकथित वोक विचारधारा की आलोचना कर रही थीं और स्थायी पीड़ित मानसिकता के बारे में विरोधियों के तर्क का उल्लेख कर रही थीं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि इस पूरे विवाद में पर्याप्त सावधानी नहीं बरती गई और बेवजह संदेह पैदा किया गया। साथ ही उन्होंने खुद को बहुजन बताते हुए कहा कि उनकी मंशा किसी समुदाय को आहत करने की नहीं थी।
उधर, जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय छात्र संघ ने एक बयान जारी कर इन टिप्पणियों को खुला जातिवादी बयान बताया और कहा कि यह विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक स्थलों में व्याप्त संरचनात्मक बहिष्कार की मानसिकता को दर्शाता है। छात्र संघ ने अन्य परिसरों के संगठनों से भी अपील की है कि वे इस बयान की निंदा करें और विरोध प्रदर्शन में शामिल हों। छात्र संघ ने कुलपति द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से अपने जुड़ाव पर गर्व जताने को भी आपत्तिजनक बताया। कुलपति ने कहा था कि उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव पर गर्व है और वहीं से उन्हें विविधता की सराहना का दृष्टिकोण मिला।
देखा जाये तो यह सच है कि किसी भी समाज को केवल पीड़ा की पहचान में कैद नहीं रहना चाहिए। प्रगति के लिए आत्मविश्वास, शिक्षा और अवसर जरूरी हैं। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि सदियों के जातिगत उत्पीड़न को केवल मानसिकता कहकर खारिज नहीं किया जा सकता। भारत में दलित समुदाय का अनुभव कोई काल्पनिक आख्यान नहीं, बल्कि कठोर सामाजिक यथार्थ है। इसलिए कुलपति को समझना होगा कि खुद को बहुजन बताने भर से काम नहीं चलेगा। कुलपति को समझना होगा कि विश्वविद्यालय केवल ज्ञान के केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना के निर्माण के स्थल भी होते हैं। यहां दिया गया हर बयान दूर तक असर डालता है। बहरहाल, अब जरूरत है कि विश्वविद्यालय प्रशासन, छात्र संगठन और नीति निर्माता अपनी अपनी जिम्मेदारियों को समझें और उसी के अनुरूप व्यवहार करें।
Continue reading on the app
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी शनिवार को 2014 के आरएसएस मानहानि मामले के सिलसिले में भिवंडी अतिरिक्त सत्र न्यायालय में पेश हुए। पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल के निधन के बाद, जिन्होंने पहले उनके जमानती के रूप में काम किया था, गांधी ने अपनी जमानत के लिए नए जमानती पेश किए। राहुल गांधी के वकील नारायण अय्यर ने बताया कि यह भिवंडी के एक आरएसएस कार्यकर्ता द्वारा उनके खिलाफ दायर मानहानि का मामला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मूल जमानती, पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल का निधन हो गया है, जिसके कारण नए जमानती की आवश्यकता पड़ी।
अय्यर ने बताया कि राहुल गांधी और महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल कार्यवाही के दौरान उपस्थित थे। अय्यर ने कहा कि उन्हें न्यायिक प्रणाली पर पूरा भरोसा है और उन्हें विश्वास है कि सत्य की जीत होगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राहुल गांधी इस मामले को आगे बढ़ाने और जनता के सामने सत्य प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वकील ने बताया कि उचित समय पर साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएंगे और न्यायालय ने सुनवाई मार्च में निर्धारित की है।
नारायण अय्यर ने पत्रकारों से कहा कि यह मानहानि का मामला है। भिवंडी के एक आरएसएस कार्यकर्ता ने राहुल जी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। इस मामले में जमानतदार, पूर्व गृह मंत्री शिवराज पाटिल का निधन हो गया, जिसके कारण हमें नए जमानतदार की आवश्यकता पड़ी। इसके लिए आज राहुल जी के साथ हमारे महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल जी भी उपस्थित थे... हमें विश्वास है कि इस मामले की सच्चाई सामने आएगी और हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। राहुल जी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस मामले को आगे बढ़ाएंगे और सच्चाई जो भी हो, उसे पूरी दुनिया के सामने पेश करना जरूरी है... हम उचित समय पर अपने सबूत पेश करेंगे। अदालत के निर्देशानुसार मामले की सुनवाई मार्च में होगी।
राहुल गांधी के मुंबई पहुंचने के बाद महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि कांग्रेस सांसद उनके नेता हैं और कानूनी प्रक्रिया का पालन करने के लिए अदालत में पेश हो रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस नेता को इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि उन्होंने भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वह चेहरा उजागर किया है जिसे वे असली चेहरा मानते हैं।
Continue reading on the app