Sawan Amavasya 2026: कब है हरियाली अमावस्या? जानें तिथि, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व
Sawan Amavasya 2026 Date: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को स्नान, दान, पितृ तर्पण और भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। सावन मास में पड़ने वाली अमावस्या का महत्व और भी बढ़ जाता है। इसे हरियाली अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन शिव-पार्वती की पूजा के साथ-साथ पितरों के निमित्त तर्पण और दान-पुण्य करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों से पितरों की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
सावन अमावस्या 2026 कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि का आरंभ 12 अगस्त 2026 को रात 1:52 बजे होगा और इसका समापन उसी दिन रात 11:06 बजे होगा। उदया तिथि के आधार पर सावन अमावस्या (हरियाली अमावस्या) 12 अगस्त 2026, बुधवार को मनाई जाएगी।
सावन अमावस्या 2026 स्नान-दान का शुभ समय
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:23 बजे से 5:06 बजे तक
- चर (सामान्य) मुहूर्त: सुबह 5:38 बजे से 7:20 बजे तक
- लाभ-उन्नति मुहूर्त: सुबह 7:20 बजे से 9:03 बजे तक
- अमृत (सर्वोत्तम) मुहूर्त: सुबह 9:03 बजे से 10:45 बजे तक
- शुभ (उत्तम) मुहूर्त: दोपहर 12:27 बजे से 2:10 बजे तक
सावन अमावस्या पर क्या करें?
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन कुछ विशेष कार्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी, सरोवर या तीर्थ में स्नान करें। यदि ऐसा संभव न हो तो स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
- स्नान के बाद अपनी श्रद्धा अनुसार तिल, अन्न, वस्त्र, धन या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करें।
- भगवान शिव का गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और अक्षत से अभिषेक कर पूजा करें।
- दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल में काले तिल मिलाकर पितरों का तर्पण करें। इसके बाद ब्राह्मणों को भोजन कराने या जरूरतमंदों को अन्न दान करने का भी विशेष महत्व माना गया है।
- हरियाली अमावस्या के अवसर पर पीपल, नीम, बरगद, शमी या आंवला जैसे पौधे लगाना भी शुभ माना जाता है। यह धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देता है।
सावन अमावस्या का धार्मिक महत्व
सावन अमावस्या भगवान शिव की उपासना, पितृ तर्पण और दान-पुण्य के लिए विशेष फलदायी मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक किए गए स्नान, दान और तर्पण से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है तथा परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है। वहीं शिव आराधना से जीवन की बाधाएं दूर होने, मनोकामनाओं की पूर्ति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति का विश्वास भी किया जाता है। हरियाली अमावस्या होने के कारण इस दिन वृक्षारोपण का भी विशेष महत्व है, जिसे धर्म और प्रकृति दोनों की सेवा का प्रतीक माना जाता है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हरिभूमि.कॉम इसकी पुष्टि नहीं करता है।
Hariyali Teej 2026: कब मनाई जाएगी हरियाली तीज? शिव, सिद्ध और रवि योग का बनेगा शुभ संयोग
Hariyali Teej 2026: सावन के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में शामिल हरियाली तीज इस वर्ष 15 अगस्त 2026, शनिवार को मनाई जाएगी। यह पर्व विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए समर्पित माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। वहीं, अविवाहित कन्याएं भी योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए यह व्रत करती हैं।
हरियाली तीज 2026 कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का आरंभ 14 अगस्त 2026 को शाम 6:46 बजे होगा और इसका समापन 15 अगस्त 2026 को शाम 5:28 बजे होगा। उदया तिथि के आधार पर हरियाली तीज 15 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी।
हरियाली तीज 2026 पर बन रहे हैं तीन शुभ योग
- इस बार हरियाली तीज का पर्व बेहद शुभ माना जा रहा है, क्योंकि इस दिन एक साथ शिव योग, सिद्ध योग और रवि योग का संयोग बन रहा है।
- शिव योग: सुबह 7:09 बजे तक।
- सिद्ध योग: पूरे दिन और पूरी रात के बाद 16 अगस्त सुबह 5:21 बजे तक।
- रवि योग: 15 अगस्त सुबह 6:19 बजे से 16 अगस्त तड़के 3:25 बजे तक।
हरियाली तीज 2026 शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:50 बजे से 5:35 बजे तक
- प्रातः संध्या: सुबह 5:12 बजे से 6:19 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:17 बजे से 1:08 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:51 बजे से 3:42 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 7:06 बजे से 7:29 बजे तक
हरियाली तीज का धार्मिक महत्व
हरियाली तीज का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन से माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। तभी से यह व्रत दांपत्य सुख और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं सोलह श्रृंगार कर शिव-पार्वती की पूजा करती हैं, व्रत कथा सुनती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। कई स्थानों पर झूला झूलने, लोकगीत गाने और पारंपरिक उत्सव मनाने की भी परंपरा है।
अविवाहित कन्याओं के लिए भी है विशेष
धार्मिक मान्यता है कि हरियाली तीज का व्रत श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से अविवाहित कन्याओं को मनचाहा जीवनसाथी मिलने का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होने और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आने की भी मान्यता है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हरिभूमि.कॉम इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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