यूपी की वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों पर कांग्रेस का सवाल, बाकी सीटों का भी मांगा हिसाब
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है. कांग्रेस ने इस प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं. पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची में गड़बड़ियों के कारण योग्य मतदाताओं के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है.
कांग्रेस ने साफ किया है कि वह इस मुद्दे पर आवाज उठाएगी और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी लड़ाई भी लड़ेगी. बुधवार को लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा, सांसद इमरान मसूद और पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इस मुद्दे को उठाया. नेताओं ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों पर चिंता जताते हुए चुनाव आयोग से पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की.
राजेंद्र पाल गौतम ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की मदद से किसी को जिताने और किसी को हराने की स्थिति पैदा हो सकती है. उनके मुताबिक, SIR के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी होने पर लोगों को संतुष्ट होना चाहिए था, लेकिन प्रदेश की जनता के साथ बड़ा धोखा होने की आशंका है. गौतम ने पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया. उन्होंने दावा किया कि जुलाई से सितंबर के बीच के आंकड़ों में 13,150 मतदाताओं के मामले सामने आए, जिनमें EPIC नंबर और सीरियल नंबर समान होने के बावजूद नाम बदलने की बात कही गई है.
उन्होंने आशंका जताई कि ऐसी स्थिति में मतदान के दिन संबंधित मतदाता को अपना नाम सूची में नहीं मिलने की परेशानी हो सकती है. इसके अलावा, उन्होंने पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र से 804 नाम काटे जाने और 26 ऐसे मतदाताओं के नाम जोड़े जाने का मामला भी उठाया, जिन पर सवाल हैं. गौतम ने कुल 16,054 वोट काटे जाने का दावा भी किया।ये आंकड़े कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों का हिस्सा हैं. इनकी स्वतंत्र पुष्टि और चुनाव आयोग का पक्ष सामने आना जरूरी है.
कांग्रेस ने पूछा- दूसरी विधानसभाओं में क्या है स्थिति?
राजेंद्र पाल गौतम ने सवाल किया कि अगर पीलीभीत सदर में मतदाता सूची को लेकर इतनी विसंगतियां सामने आ रही हैं, तो प्रदेश की बाकी विधानसभा सीटों पर क्या स्थिति होगी? उन्होंने चुनाव आयोग से पूरे मामले की जांच करने और उठाए गए सवालों का जवाब देने की मांग की. कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया निष्पक्ष होनी चाहिए, ताकि किसी भी योग्य नागरिक का नाम गलती से न कटे और कोई मतदाता अपने अधिकार से वंचित न रहे.
आराधना मिश्रा बोलीं- हर योग्य नागरिक के वोट की रक्षा जरूरी
यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा ने कहा कि मतदाता पहचान पत्र होने के बावजूद मतदान के दिन किसी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट में नहीं मिलना गंभीर चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि इस मामले में कानूनी राय ली जाएगी और पार्टी संगठन, कार्यकर्ता तथा अन्य पदाधिकारी अपनी लड़ाई जारी रखेंगे. आराधना मिश्रा ने मतदाता सूची में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर योग्य नागरिक के मताधिकार की रक्षा होना जरूरी है। कांग्रेस इस मुद्दे पर आगे भी अपनी आवाज उठाती रहेगी.
इमरान मसूद ने लोगों से वोटर लिस्ट जांचने की अपील की
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर आम लोगों से सतर्क रहने की अपील की. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा करना केवल किसी राजनीतिक दल की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि देश के हर नागरिक को इसमें अपनी भूमिका निभानी चाहिए. मसूद ने पीलीभीत के कांग्रेस कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने मतदाता सूची की जांच कर कथित विसंगतियों को सामने लाने की कोशिश की है. उन्होंने बताया कि कांग्रेस इस मामले को लेकर अदालत का रुख भी करेगी. मसूद ने कहा कि हर व्यक्ति को अपने वोट की सुरक्षा के लिए जागरूक रहना चाहिए. उन्होंने इस मुद्दे पर संसद से लेकर सड़क तक लड़ाई जारी रखने की बात कही.
सुप्रिया श्रीनेत ने पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भी SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि कुछ अधिकारियों का कहना है कि उनके पास संबंधित सॉफ्टवेयर का एक्सेस नहीं है. उन्होंने चुनाव आयोग से यह स्पष्ट करने की मांग की कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया किस तरह संचालित की जा रही है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है. सुप्रिया श्रीनेत ने मतदाताओं से चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपना EPIC नंबर डालकर वोटर लिस्ट में नाम और अन्य जानकारियां जांचने की अपील की. उन्होंने कहा कि केवल पीलीभीत ही नहीं, बल्कि दूसरे विधानसभा क्षेत्रों में भी ऐसी कथित विसंगतियों की जांच होनी चाहिए. उन्होंने 'वन पर्सन, वन वोट' के सिद्धांत की रक्षा पर जोर देते हुए कहा कि मतदाता सूची की निष्पक्षता से जुड़े सवालों का जवाब मिलना जरूरी है.
वोटर लिस्ट को लेकर आगे बढ़ सकती है राजनीतिक और कानूनी लड़ाई
SIR प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस के आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश में यह मुद्दा और गर्म हो सकता है. पार्टी ने साफ किया है कि वह मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करेगी और राजनीतिक स्तर पर भी विरोध जारी रखेगी. अब इस मामले में चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और कथित अनियमितताओं की जांच से जुड़े तथ्यों पर नजर रहेगी. मतदाता सूची में नाम, EPIC नंबर और अन्य विवरणों की सटीकता लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण है. इसलिए इन आरोपों पर स्पष्ट जवाब और तथ्यों के आधार पर जांच जरूरी होगी.
एग्रीवोल्टेक्स नीतियां लघु एवं सीमांत किसानों की जरूरतों के अनुरूप होनी चाहिए: शिवराज सिंह चौहान
नई दिल्ली, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को कहा कि एग्रीवोल्टेक्स नीतियां भारत के लघु एवं सीमांत किसानों की जरूरतों के अनुरूप बनाई जानी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कृषि में सौर ऊर्जा को अपनाने से किसान खाद्य और ऊर्जा उत्पादक दोनों बन सकते हैं।
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी के साथ संयुक्त रूप से उद्घाटन करते हुए चौहान ने यहां तीन दिवसीय एग्रीवोल्टेक्स विश्व सम्मेलन 2026 के उद्घाटन सत्र में कहा कि कृषि और सौर ऊर्जा के एकीकरण से किसानों की आय में वृद्धि होने के साथ-साथ व्यापक आर्थिक और पर्यावरणीय लक्ष्यों में भी योगदान मिल सकता है।
केंद्रीय मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि एग्रीवोल्टेक्स (खेती जारी रखते हुए फसल भूमि के ऊपर सौर पैनल लगाना) किसानों को अन्नदाता और ऊर्जादाता दोनों बनने में मदद कर सकता है और आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा दे सकता है।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि चौहान ने ऐसे डिजाइनों का आह्वान किया जो जुताई, फसल परिवर्तन और उचित वर्षा जल निकासी की अनुमति देते हों।
उन्होंने गांवों में रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की सक्रिय भागीदारी और ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को उपकरण संचालन, मरम्मत और रखरखाव में प्रशिक्षण देने का आह्वान किया।
कृषि मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि किसान खेती के साथ-साथ सौर ऊर्जा को अपनाकर अन्नदाता और ऊर्जादाता दोनों बन सकते हैं। चौहान ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कृषि और सौर ऊर्जा का एकीकरण वैश्विक कल्याण को बढ़ावा दे सकता है और किसानों की आर्थिक समृद्धि को बढ़ा सकता है।
उन्होंने कहा कि बिजली आधुनिक जीवन और कृषि के लिए अपरिहार्य हो गई है, इसलिए ऊर्जा उत्पादन को खेती के साथ एकीकृत करना किसानों के कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मंत्री ने कहा कि भारत का खाद्यान्न भंडार पर्याप्त है और कृषि क्षेत्र ने 4.5 प्रतिशत की निरंतर वृद्धि दर बनाए रखी है, जिसमें कृषि निर्यात रिकॉर्ड 52.55 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कृषि क्षेत्र के सामने मौजूद संरचनात्मक चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया और बताया कि देश में औसत भूमि जोत केवल 0.96 हेक्टेयर है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कृषि-वोल्टेइक मॉडल ऐसे होने चाहिए जो किसानों को सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए खेती को प्रतिस्थापित करने के बजाय खेती जारी रखने की अनुमति दें।
प्रल्हाद जोशी ने कहा कि भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 308.03 गीगावाट तक पहुंच गई है, जो देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता लगभग 560 गीगावाट का 55 प्रतिशत से अधिक है।
महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश मिलकर भारत की अनुमानित एग्रीवोल्टेक्स क्षमता का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं।
--आईएएनएस
एमएस/
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