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नियमित टीकाकरण की अनदेखी के कारण बांग्लादेश में खसरे से 1,147 मौत

नई दिल्ली, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। बांग्लादेश में खसरे ने पिछले आठ महीनों में कई मासूमों की जान ले ली है। इसका अहम कारण नियमित टीकाकरण में आई कमी को बताया जा रहा है। मार्च के मध्य में प्रकोप शुरू होने के बाद से अब तक खसरे के 2,02,000 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आए और इस दौरान 1,147 लोगों की मौत हुई।

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दिल्ली उच्च न्यायालय का बड़ा फैसला: कॉजपा नेताओं की हिरासत मामले में दखल से इनकार, मजिस्ट्रेट की सुनवाई का करें इंतजार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। विशेष सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने नेताओं को निर्देश दिया कि वे विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने होने वाली सुनवाई के फैसले की प्रतीक्षा करें। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि इसके बाद भी उनकी शिकायत बनी रहती है, तो वे उचित अपीलीय अदालत में जा सकते हैं। उच्च न्यायालय ने कहा कि अगर उनकी शिकायत बरकरार रहती है, तो वे अपीलीय अदालत का रुख कर सकते हैं। विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष आज ही सुनवाई होनी है। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने कॉजपा के सह-संयोजकों को उनकी याचिका वापस लेने की अनुमति दी।

 उन्होंने कहा कि शांति बनाए रखने के लिए भरे गए बांड का बार-बार उल्लंघन करने के मामले में संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दायर करना उचित नहीं है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा ने कहा कि नए जमानतदार पेश करने का मामला विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने सूचीबद्ध है। कॉजपा नेताओं ने उच्च न्यायालय में तत्काल सुनवाई की मांग की थी, जिसके बाद अदालत ने मामले पर सुनवाई की। 

दशहरे की छुट्टियों के कारण उच्च न्यायालय बंद था। दास और रांका ने कॉजपा के अन्य कार्यकर्ताओं के साथ जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज प्रदर्शित किया था। जंतर-मंतर को पहले विरोध प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया गया था। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे भी लगाए थे। इसके बाद 13 अक्टूबर को उन्हें हिरासत में लेकर एहतियातन गिरफ्तार कर लिया गया था। एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने 14 अक्टूबर को उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। 

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील अभिक चिमनी ने दलील दी कि विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के पास उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ाने का अधिकार नहीं है, इसलिए उन्हें निजी मुचलके पर रिहा किया जाना चाहिए। उन्होंने यह दलील भी दी कि विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ओर से जमानतदार की शर्त पर जोर देने का कानून में कोई आधार नहीं है। हालांकि, न्यायमूर्ति प्रसाद ने कहा कि याचिकाकर्ताओं पर शांति बनाए रखने के लिए भरे गए बांड का उल्लंघन करने का आरोप है। न्यायाधीश ने कहा कि उन्होंने एक ऐसे विरोध स्थल में प्रवेश किया था, जिसे प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया गया था। 

उन्होंने सवाल किया कि क्या बार-बार ऐसा मामला सामने आने पर अधिकारियों को अधिक सख्त जमानत की शर्त रखने का अधिकार नहीं है। न्यायाधीश ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की भूमिका और उनके उद्देश्य से जुड़े सवाल भी महत्वपूर्ण हैं और उचित प्राधिकरण को इन पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शुरुआत में वे छात्र आंदोलन में शामिल थे, लेकिन अब मुद्दा अलग है और इसमें ‘सत्ता परिवर्तन’ की बात भी सामने आई है। न्यायाधीश ने कहा, “अब एक और मुद्दा है। लोग वही रहते हैं, लेकिन मुद्दे बदल जाते हैं।

 इसलिए ये सभी सवाल महत्वपूर्ण हो जाते हैं कि आप कौन हैं, आपका मकसद क्या है और आप क्या करने की कोशिश कर रहे हैं? अचानक सत्ता परिवर्तन जैसी बातें सुनाई देने लगती हैं। अचानक ऐसी बातें सुनने को मिलती हैं, जिनका फैसला हम आमतौर पर मतदान के जरिए करते हैं। हमारे लिए इन सवालों पर विचार करना जरूरी नहीं है। इस बहस को उचित कार्यवाही के लिए छोड़ दीजिए।” 

जब अदालत को बताया गया कि दास और रांका की उम्र क्रमशः 27 और 31 साल है, तो न्यायाधीश ने टिप्पणी की, “इसका मतलब है कि आप जेन-जी नहीं हैं।” इस पर वकील ने जवाब दिया, “वे प्रेरणास्रोत हैं।” अदालत ने यह भी कहा कि विरोध प्रदर्शन के लिए पुलिस से अनुमति लेने का उद्देश्य किसी को रोकना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि ‘अवांछित लोग’ प्रदर्शनकारियों के समूह में शामिल न हों और शांतिपूर्ण प्रदर्शन हिंसा में न बदले। 

अदालत ने कहा, “यहां दोनों याचिकाकर्ता सबसे आगे हैं। जब आप अवरोधक फांदते हैं, तो इस बात की काफी संभावना होती है कि 10 या 20 अन्य लोग भी धारा 163 के तहत लगाए गए निषेधाज्ञा आदेश का उल्लंघन करें। ऐसे लोग भी हो सकते हैं जो आपके नियंत्रण में न हों और कुछ कर बैठें। हमने अपने देश के बाहर भी ऐसा होते देखा है। छात्र आंदोलन अब आगजनी, लूटपाट की घटनाओं में बदल गया है।” 

दास और रांका को याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि उन्होंने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है। दास और रांका ने उच्च न्यायालय में विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के 19 अक्टूबर के एक आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उन्हें दो दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। उन्हें 13 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया था। आरोप है कि वे जंतर-मंतर में प्रवेश करने के लिए बंद गेट को फांदकर अंदर गए थे। जंतर-मंतर को पहले निर्धारित विरोध प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया गया था। 

इसके बाद उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। मंदिर मार्ग थाने में हाल ही में नियुक्त विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने सोमवार को दोनों को उनके सामने पेश किए जाने के बाद उन्हें 21 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था। अपनी याचिका में कॉजपा नेताओं ने दलील दी कि विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट का आदेश गैरकानूनी और मनमाना है तथा इसे रद्द किया जाना चाहिए। याचिका में कहा गया है कि जरूरी जमानतदार कई बार पेश करने के बावजूद दास और रांका छह दिन से हिरासत में हैं।

 याचिका में कहा गया है, “जमानतदार को अस्वीकार करने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 140 के तहत अनिवार्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इससे संबंधित आदेश में कानून के पूरी तरह गलत इस्तेमाल का पता चलता है। जमानतदारों को स्वीकार करने और उनका सत्यापन करने में देरी तथा बाधा डालने से रिहाई का उद्देश्य ही विफल हो जाता है।” याचिका में कहा गया है, “ विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने बीएनएसएस की धारा 135(3) के तहत याचिकाकर्ताओं की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की अपनी शक्तियों का मनमाने ढंग से इस्तेमाल किया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि न्यायिक हिरासत का आधार ‘बांड भरने में विफलता’ बताया गया है। लेकिन यह आधार गलत है, क्योंकि 19 अक्टूबर, 2026 को कानून के अनुसार याचिकाकर्ताओं के जमानतदार पेश किए गए थे।”

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  Sports

Australia के खिलाफ दूसरे Test में तेज गेंदबाज Anrich Nortje चोटिल होकर बाहर

दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मुकाबले में मेजबान टीम को बड़ा झटका लगा है। तेज गेंदबाज एनरिक नॉर्टजे दाहिनी जांघ और कमर के जोड़ के पास चोट लगने की आशंका के चलते मैदान से बाहर चले गए हैं। बुधवार को मैच के चौथे दिन लगी इस चोट ने उनकी आगे की उपलब्धता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, दक्षिण अफ्रीका की टीम ने पहली पारी में ऑस्ट्रेलिया को सस्ते में समेटकर मुकाबले पर मजबूत पकड़ बना ली है।

ईएसपीएनक्रिकइंफो की रिपोर्ट के मुताबिक, सेंट जॉर्ज पार्क में खेले जा रहे टेस्ट के चौथे दिन सुबह के सत्र में नॉर्टजे अपने चौथे ओवर की केवल 3 गेंदें फेंकने के बाद लंगड़ाते हुए मैदान से बाहर चले गए। क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका ने दूसरे सत्र की शुरुआत में बताया कि नॉर्टजे ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी के बाकी हिस्से में कम से कम गेंदबाजी करने के लिए मैदान पर नहीं उतरेंगे। उनकी चोट कितनी गंभीर है, इसे लेकर आगे की जानकारी का इंतजार है।

गौरतलब है कि नॉर्टजे ने डरबन में खेले गए पहले टेस्ट के दौरान लंबे समय बाद टेस्ट क्रिकेट में वापसी की थी। उन्होंने साढ़े 3 साल से अधिक समय के अंतराल के बाद अपना पहला टेस्ट और प्रथम श्रेणी मुकाबला खेलते हुए 40 ओवर गेंदबाजी की थी। दोनों टेस्ट के बीच कम समय होने के कारण उनकी फिटनेस को लेकर पहले भी सवाल उठे थे। हालांकि, दूसरे टेस्ट से 2 दिन पहले अभ्यास के दौरान उन्होंने तेज रफ्तार से गेंदबाजी कर अपनी तैयारी का संकेत दिया था।

मैदान छोड़ने से पहले नॉर्टजे ने दक्षिण अफ्रीका की गेंदबाजी में अहम योगदान दिया। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज मार्नस लाबुशेन को आउट करने में भूमिका निभाई। तीसरी स्लिप में साइमन हार्मर ने शानदार कैच पकड़कर लाबुशेन की पारी समाप्त की। उस समय ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 45 रन पर 4 विकेट हो गया था और टीम मुश्किल में नजर आ रही थी।

दक्षिण अफ्रीका के गेंदबाजों ने इसके बाद भी ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को संभलने का मौका नहीं दिया। मेहमान टीम अपनी पहली पारी में महज 99 रन पर सिमट गई। दक्षिण अफ्रीका की ओर से बाएं हाथ के तेज गेंदबाज मार्को यानसन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 5 विकेट झटके। वहीं, वियान मुल्डर ने 2 विकेट लेकर ऑस्ट्रेलिया की मुश्किलें बढ़ा दीं।

ऑस्ट्रेलिया की ओर से अनुभवी बल्लेबाज स्टीव स्मिथ ने सबसे ज्यादा 28 रन बनाए। उन्होंने 88 गेंदों का सामना करते हुए 2 चौके लगाए, लेकिन मुल्डर की गेंद पर बोल्ड हो गए। बाकी बल्लेबाज दक्षिण अफ्रीका की तेज गेंदबाजी के सामने टिक नहीं सके।

इससे पहले दक्षिण अफ्रीका ने अपनी पहली पारी में कप्तान टेम्बा बावुमा के शानदार 179 रन और मार्को यानसन के 85 रनों की मदद से मजबूत स्कोर खड़ा किया था। शुरुआती विकेट जल्दी गिरने के बावजूद दोनों बल्लेबाजों ने पारी को संभाला और टीम को मुकाबले में बढ़त दिलाई।

ऑस्ट्रेलिया को 99 रन पर आउट करने के बाद दक्षिण अफ्रीका ने उसे फॉलोऑन खेलने के लिए मजबूर कर दिया। इसका मतलब है कि ऑस्ट्रेलिया को पहली पारी में पिछड़ने के बाद दोबारा बल्लेबाजी करनी पड़ी है। अब मेजबान टीम की नजर इस बढ़त को जीत में बदलने पर है। 3 टेस्ट मैचों की इस सीरीज में दक्षिण अफ्रीका मुकाबला जीतकर सीरीज को 1-1 से बराबर करने की कोशिश कर रहा है। वहीं, नॉर्टजे की चोट टीम के लिए चिंता का विषय बनी हुई है, क्योंकि बाकी मैच में तेज गेंदबाजी का दबाव बनाए रखना बेहद जरूरी है।

Wed, 21 Oct 2026 19:57:00 +0530

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