India AI Summit: यूथ कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन, यूएस ट्रेड डील का कर रहे थे विरोध, पुलिस ने हिरासत में लिया
India AI Summit: दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे इंडिया एआई एक्सपो समिट के दौरान उस समय हलचल मच गई, जब भारतीय युवा कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने अचानक प्रदर्शन शुरू कर दिया. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रदर्शनकारी नारे लगाते हुए एक पवेलियन में पहुंचे और विरोध जताने के लिए टी-शर्ट उतारकर हंगामा करने लगे. कार्यक्रम में देश-विदेश के प्रतिनिधि मौजूद थे, ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां तुरंत सक्रिय हो गईं. हालांकि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया.
करीब 10 कार्यकर्ता शामिल, कई हिरासत में
दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, लगभग 10 युवा कांग्रेस कार्यकर्ता क्यूआर कोड के जरिए एंट्री लेकर परिसर में पहुंचे थे. अंदर प्रवेश करने के बाद उन्होंने नारेबाजी शुरू की. पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए पांच कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया, जबकि अन्य से भी पूछताछ की जा रही है. सभी को तिलक मार्ग थाने ले जाया गया है. अधिकारियों का कहना है कि मामले में कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
AAP का दावा, वर्तमान दिल्ली सरकार की तुलना में केजरीवाल के शासन को लोग कर रहे याद
आम आदमी पार्टी का दावा है कि वर्तमान दिल्ली सरकार के एक वर्ष पूर होने पर अब जनता को केजरीवाल के शासन की याद हा रही है. सोशल मीडिया पर #SufferingDelhiMissesKejriwal ट्रेंड कर रहा है और यह ट्रेंड सिर्फ ऑनलाइन शोर नहीं, बल्कि उस भावना का प्रतीक बन गया है जो कई इलाकों में सुनाई दे रही है. लोग बीते दौर और मौजूदा हालात की तुलना कर रहे हैं. फरवरी 2025 से पहले जब अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी की सरकार थी, तब दिल्ली की जनता का कहना था कि दिल्ली में शासन की दिशा बदली थी.
मोहल्ला क्लीनिकों को आम लोगों के लिए राहत का केंद्र बताया जाता था, जहां बिना जेब पर बोझ डाले इलाज मिल जाता था. सरकारी स्कूलों को नया रूप दिया गया था, कक्षाओं का ढांचा सुधरा था और रिजल्ट पर चर्चा होती थी. बिजली और पानी पर राहत को मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के लिए सीधी मदद के रूप में पेश किया गया. उस समय “दिल्ली मॉडल” की चर्चा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होती थी, और सरकार खुद को आम आदमी की आवाज बताती थी.
सफाई व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं
अब कई जगहों से यह शिकायत सुनाई दे रही है कि मोहल्ला क्लीनिकों की रफ्तार धीमी पड़ी है. ट्रैफिक जाम की समस्या फिर चर्चा में है. प्रदूषण को लेकर सख्त और प्रभावी कार्रवाई की कमी की बात कही जा रही है. कुछ इलाकों में पानी की सप्लाई को लेकर असंतोष है और सफाई व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं.
विपक्ष इस ट्रेंड को जनता की आवाज बता रहा
दिल्ली की राजनीति हमेशा राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित करती रही है. एक साल किसी भी सरकार के लिए शुरुआती आकलन का समय होता है, लेकिन राजधानी की जनता की अपेक्षाएं काफी ज्यादा हैं. विपक्ष इस ट्रेंड को जनता की आवाज बता रहा है, जबकि सरकार इसे राजनीतिक नैरेटिव कहकर खारिज करती है.
वादों की नहीं, बल्कि काम की सरकार: रेखा गुप्ता
वहीं दूसरी ओर दिल्ली की भाजपा सरकार ने एक साल का कार्यकाल पूरा होने पर अपना रिपोर्ट कार्ड पेश किया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह सरकार 'वादों की नहीं, बल्कि काम की सरकार' है और बीते वर्ष में ठोस नीतिगत फैसलों पर जोर दिया गया. सीएम ने बताया कि सरकार ने अपने पहले ही कैबिनेट निर्णय में स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता दी. आयुष्मान योजना के विस्तार के तहत जरूरतमंद परिवारों को 10 लाख रुपये तक हेल्थ कवर दिया गया. उनका कहना था कि इसका लक्ष्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को गंभीर बीमारियों के इलाज में राहत प्रदान करना है. सरकार का यह दावा है कि इस पहल से हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिला है. इस पहल से हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिला है.
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