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महंगी क्रीम या सीरम में नहीं, थाली में छिपा है सुंदरता का असली खजाना

नई दिल्ली, 20 फरवरी (आईएएनएस)। बाजारों में चेहरे की चमक महंगी क्रीम, सीरम और फेशियल पर निर्भर हो गई है। हर किसी को ऊपरी सुंदरता चाहिए, लेकिन बहुत लोग जानते हैं कि अगर अंदर से त्वचा को पोषण दिया जाए तो महंगे उत्पादों की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। यह बात विज्ञान और आयुर्वेद दोनों मानता है।

बाजार में मिलने वाले प्रोडक्ट अस्थाई परिणाम देते हैं, लेकिन घर की थाली में छिपे पोषक तत्व त्वचा को सोने सा निखार सकते हैं।

आयुर्वेद में माना गया है कि पोषण की कमी और थकावट सबसे पहले चेहरे पर दिखती है। पोषण की कमी रूखापन, झुर्रियां, दाग-धब्बे, पिगमेंटेशन और समय से पहले एजिंग का कारण बनती है। त्वचा से जुड़ी किसी भी समस्या से निपटने के लिए आमतौर पर महिलाएं हों या पुरुष, डॉक्टर का सहारा लेते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि डॉक्टर हमारे किचन में ही मौजूद है।

किचन में मौजूद आहार और हमारी त्वचा का सीधा संबंध है। त्वचा की कोशिकाएं लगातार टूटती और बनती रहती हैं। कोशिकाओं को मरम्मत के लिए विटामिन, मिनरल, हेल्दी फैट और प्रोटीन की जरूरत होती है, जो किसी प्रोडक्ट से नहीं, बल्कि घर की थाली से मिलता है।

पहले बात करते हैं विटामिन सी की, जो कोशिकाओं में जान डालता है और बुढ़ापे के लक्षणों को कम करता है। विटामिन सी की पर्याप्त मात्रा के लिए आंवला, नींबू पानी, संतरा, मौसंबी, पपीता, शिमला मिर्च, और ब्रोकली का सेवन किया जा सकता है। विटामिन सी से भरपूर आहार डार्क स्पॉट कम करने में मदद करते हैं और त्वचा में कोलेजन का उत्पादन बढ़ाते हैं।

दूसरे नंबर पर त्वचा के लिए जरूरी है ओमेगा-3 फैटी एसिड, जो चेहरे पर होने वाली सूजन को कम करता है और चेहरे को हाइड्रेटेड रखता है। इसके लिए आहार में अलसी के बीज, अखरोट, चिया सीड्स और फैटी फिश को जरूर शामिल करें।

तीसरे नंबर पर आते हैं एंटीऑक्सीडेंट। एंटीऑक्सीडेंट फ्री रेडिकल्स से त्वचा की सुरक्षा करते हैं, त्वचा को रिपेयर करने में मदद करते हैं और झुर्रियों की गति को भी धीमा करते हैं। इसके लिए आहार में हरी चाय, टमाटर, चुकंदर, अनार और हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल करना चाहिए।

चौथे नंबर पर आता है प्रोटीन, जो कोशिकाओं के निर्माण के लिए बहुत जरूरी है। प्रोटीन नाखून और बालों के लिए भी जरूरी है। इसके लिए आहार में दाल, सोयाबीन, चने, पनीर, दही, अंडा और टोफू को शामिल करना चाहिए।

--आईएएनएस

पीएस/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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अब 200 नॉटिकल मील तक मछली पकड़ सकेंगे गुजरात के मछुआरे, एक्सेस पास फ्रेमवर्क का होगा शुभारंभ

केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन और डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह गुजरात के वेरावल में 20 फरवरी को भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र में मछली पकड़ने के लिए एक्सेस पास फ्रेमवर्क का शुभारंभ करेंगे. पीएम मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की सक्रियता से ऐसा संभव हो पा रहा है. इस पहल की मदद से पारंपरिक और लघु मछुआरों, सहकारी समितियों, स्वयं सहायता समूहों और एफएफपीओ को सशक्त बनाने के कदम में ऐतिहासिक माना जा रहा है. 

उच्च मूल्य संसाधनों का दोहन संभव 

इस एक्सेस पास की मदद से मछुआरों को भारत के 200 नॉटिकल माइल तक फैले ईईजेड क्षेत्र में कानूनी, पारदर्शी और सतत तरीके से प्रवेश की अनुमति मिलेगी. इस वजह से टूना और अन्य गहरे समुद्री प्रजातियों जैसे उच्च मूल्य संसाधनों का दोहन संभव होगा. इसके अलावा, इंटरनेशनल ट्रेसबिलिटी और प्रमाणन मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा.

40 से 50 नॉटिकल माइल तक ही मछली पकड़ सकते हैं

भारत का ईईजेड करीब 24 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है. लेकिन अब तक अधिकांश मछली पकड़ने की गतिविधियां 40 से 50 नॉटिकल माइल तक ही सीमित है. साल 2025 में अधिसूचित नियमों से अब जिम्मेदार तरीके से गहरे समुद्र में मत्स्य दोहन किया जा रहा है. मत्स्य निर्यात (2024-25 में 62,408 करोड़ रुपये) को इससे और मजबूती मिलेगी.

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राजगोर में वृद्धि की संभावना

बता दें, वेरावल पहले से ही प्रमुख प्रोसेसिंग और निर्यात केंद्र है. अब इस पहल का केंद्र बनकर वेरावल ब्लू इकोनॉमी के विजन को आगे बढ़ाएगा. गुजरात सरकार की सकारात्म भूमिका की वजह से अब तटीय समुदायों का आय और रोजगार में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है. 

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