घंटों बैठकर काम करने से होती है कमर में अकड़न? रोज 5 मिनट करें हस्तोत्तानासन
नई दिल्ली, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, घंटों बैठकर काम करना और गलत खानपान की वजह से शरीर में अकड़न, मोटापा और तनाव आम हो गया है। ऐसे में योग ऐसा उपाय है, जो शरीर को स्वस्थ और मन को शांत रखता है। योग के कई आसनों में से एक है हस्तोत्तानासन। इसे रीढ़ की हड्डी में लचीलापन लाने और शरीर को ऊर्जा देने के लिए किया जाता है।
हस्तोत्तानासन में हस्त का अर्थ है हाथ और उत्तान का अर्थ है ऊपर की ओर खिंचाव। यह महत्वपूर्ण योग मुद्रा है, जिसका अर्थ है हाथों को ऊपर की ओर तानना। यह सूर्य नमस्कार की श्रृंखला का दूसरा और ग्यारहवां चरण है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने भी हस्तोत्तानासन के महत्व पर प्रकाश डाला है। यह आसन शरीर में लचीलापन लाने, रक्त संचार बढ़ाने और थकान कम करने वाला एक उत्कृष्ट योगासन है। इस योगासन के करने से शरीर पीछे की ओर झुकता है जिससे रीढ़ की हड्डी लचीली बनती है और कमर दर्द जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। साथ ही, पेट की मांसपेशियों में खिंचाव आने से पाचन तंत्र सक्रिय होता है और पेट की चर्बी कम करने में मदद मिलती है।
इसे रोज सुबह करने से न सिर्फ शरीर लचीला बनता है बल्कि लंबाई बढ़ने, वजन घटने और थकान दूर करने में भी बहुत मदद मिलती है। जब हम घंटों एक ही जगह बैठे रहते हैं तो शरीर में खून का प्रवाह धीमा हो जाता है, जिससे सुस्ती और थकान महसूस होती है। हस्तोत्तानासन में जब हम हाथों को ऊपर की ओर खींचते हैं और गहरी सांस लेते हैं, तो फेफड़ों में ज्यादा ऑक्सीजन जाती है। इससे खून का संचार तेज होता है और पूरे शरीर में तुरंत ऊर्जा और स्फूर्ति आ जाती है। इसे करने से नींद और आलस भी दूर होता है।
यदि किसी भी व्यक्ति को पीठ या गर्दन में गंभीर दर्द या चोट हो, तो इस आसन को करने के दौरान अत्यधिक पीछे झुकने से बचें। चक्कर आने की समस्या या गंभीर हृदय रोग होने पर इस आसन को विशेषज्ञ की देखरेख में ही करना चाहिए।
--आईएएनएस
एनएस/पीएम
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Papankusha Ekadashi 2026: आज या कल, कब रखें पापांकुशा एकादशी व्रत? यहां पढ़ें भगवान विष्णु के मंत्र व आरती
Papankusha Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में पापांकुशा एकादशी व्रत का खास महत्व होता है. धार्मिक मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु इस व्रत को रखता है उसे हजारों अश्वमेघ यज्ञ और सौ यज्ञ के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है. महाभारत काल में भगवान कृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को इस एकादशी व्रत का महत्व बताया था. उन्होंने कहा था कि यह एकादशी पापों पर अंकुश लगाती है. इस दिन मौन रहकर भगवद् स्मरण और भजन-कीर्तन करते हैं. इस वर्ष एकादशी की तिथि को लेकर बहुत कंफ्यूजन बना हुआ है, तो ऐसे में जानते हैं पापांकुशा एकादशी की सही तिथि क्या है.
पापांकुशा एकादशी 2026 कब है?
द्रिक पंचांग के अनुसार, पापांकुशा एकादशी तिथि का प्रारंभ 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 पर होगा और इसका समापन 22 अक्टूबर को दोपहर 02:47 मिनट पर होगा. इसलिए, पापांकुशा एकादशी का व्रत 22 अक्टूबर को रखा जाएगा.
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पापांकुशा एकादशी पूजा का शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:32 से 05:22 मिनट तक
- प्रातः सन्ध्या- सुबह 04:57 से लेकर सुबह 06:12 मिनट तक
- अभिजित मुहूर्त- सुबह 11:35 से लेकर दोपहर 12:21 तक
- अमृत काल- दोपहर 01:18 से लेकर दोपहर 02:58 मिनट तक
- विजय मुहूर्त- दोपहर 01:53 से लेकर 02:40 मिनट तक
- गोधूलि मुहूर्त- शाम 05:44 से लेकर शाम 06:09 मिनट तक
पापांकुशा एकादशी का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पापांकुशा एकादशी के दिन भक्तिभाव से भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए और व्रत रखना चाहिए. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने और दान करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है. साथ ही पुण्य फल भी प्राप्त होते हैं. मान्यता है कि पापांकुशा एकादशी का व्रत रखने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है.
पापांकुशा एकादशी पूजन विधि
एकादशी का व्रत करने वाले साधकों को दशमी तिथि पर मांस, प्याज-लहसुन और मसूर की दाल नहीं खानी चाहिए. इसके बाद एकादशी तिथि के दिन आपको नीबू, जामुन या आम के पत्तों को चबाकर मुख शुद्ध करना चाहिए. इस दिन पेड़ से पत्ते नहीं तोड़े जाते हैं. इसलिए, पत्रों को पहले तोड़ लें या फिर गिरे हुए पत्तों का ही प्रयोग करें. इसके पश्चात बारह बार कुल्ला करें और जल से मुंह की सफाई कर लें. अब स्नान आदि करें और मंदिर जाएं. वहां, गीता का पाठ करें.
घर में पूजन करने के लिए नित्य कर्म निपटाने के बाद आपको घर के मंदिर की सफाई करनी है. गंगाजल छिड़क कर, शुद्ध करें. अब एक चौकी बिठाएं और उस पर भगवान विष्णु की प्रतिमा को स्थापित करें. भगवान के सामने दीया जलाएं और धूप जलाएं. अब उन्हें पुष्प अर्पित करें और तुलसी दल जरूर चढ़ाएं. ध्यान रहे कि आपको तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़ लेने चाहिए. एकादशी के दिन पत्र तोड़ना वर्जित होता है. इसके बाद भगवान विष्णु को केसर व हल्दी का तिलक करें. चंदन अर्पित करें और फिर फलों तथा दूध से बनी चीजों का भोग लगाएं. अब भगवान की आरती करें और मंत्रों का जाप करके पूजन समाप्त करें.
एकादशी के दिन जरूर करें ये काम
- एकादशी के दिन सुबह स्नान आदि करने के पश्चात व्रत का संकल्प लें और फिर व्रत पालन करें.
- इस दिन आपको सूर्यदेव को भी जल अर्पित करना चाहिए,
- एकादशी व्रत का पूरा फल प्राप्त करने के लिए व्रत कथा का श्रवण अवश्य करें.
- एकादशी पर जरूरतमंदों को दान जरूर करें.
- एकादशी के दिन घर में झाड़ू नहीं लगाना चाहिए.
- एकादशी पर बाल व नाखुन नहीं काटने चाहिए.
- इस दिन किसी को कटु शब्द नहीं कहने चाहिए.
एकादशी माता की आरती
इस दिन हमें घर में भगवान विष्णु की आरती के साथ-साथ एकादशी माता की आरती भी जरूर करनी चाहिए. यहां पढ़ें एकादशी माता की आरती के लिरिक्स
ऊं जय एकादशी, जय एकादशी,जय एकादशी माता।
विष्णु पूजा व्रत को धारण कर,शक्ति मुक्ति पाता॥
ऊं जय एकादशी...॥
तेरे नाम गिनाऊं देवी,भक्ति प्रदान करनी।
गण गौरव की देनी माता,शास्त्रों में वरनी॥
ऊं जय एकादशी...॥
मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना,विश्वतारनी जन्मी।
शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा,मुक्तिदाता बन आई॥
ऊं जय एकादशी...॥
पौष के कृष्णपक्ष की,सफला नामक है।
शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा,आनन्द अधिक रहै॥
ऊं जय एकादशी...॥
नाम षटतिला माघ मास में,कृष्णपक्ष आवै।
शुक्लपक्ष में जया, कहावै,विजय सदा पावै॥
ऊं जय एकादशी...॥
विजया फागुन कृष्णपक्ष मेंशुक्ला आमलकी।
पापमोचनी कृष्ण पक्ष में,चैत्र महाबलि की॥
ऊं जय एकादशी...॥
चैत्र शुक्ल में नाम कामदा,धन देने वाली।
नाम वरूथिनी कृष्णपक्ष में,वैसाख माह वाली॥
ऊं जय एकादशी...॥
शुक्ल पक्ष में होयमोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी।
नाम निर्जला सब सुख करनी,शुक्लपक्ष रखी॥
ऊं जय एकादशी...॥
योगिनी नाम आषाढ में जानों,कृष्णपक्ष करनी।
देवशयनी नाम कहायो,शुक्लपक्ष धरनी॥
ऊं जय एकादशी...॥
कामिका श्रावण मास में आवै,कृष्णपक्ष कहिए।
श्रावण शुक्ला होयपवित्रा आनन्द से रहिए॥
ऊं जय एकादशी...॥
अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की,परिवर्तिनी शुक्ला।
इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में,व्रत से भवसागर निकला॥
ऊं जय एकादशी...॥
पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में,आप हरनहारी।
रमा मास कार्तिक में आवै,सुखदायक भारी॥
ऊं जय एकादशी...॥
देवोत्थानी शुक्लपक्ष की,दुखनाशक मैया।
पावन मास में करूंविनती पार करो नैया॥
ऊं जय एकादशी...॥
परमा कृष्णपक्ष में होती,जन मंगल करनी।
शुक्ल मास में होयपद्मिनी दुख दारिद्र हरनी॥
ऊं जय एकादशी...॥
जो कोई आरती एकादशी की,भक्ति सहित गावै।
जन गुरदिता स्वर्ग का वासा,निश्चय वह पावै॥
ऊं जय एकादशी...॥
भगवान विष्णु की आरती (Lord Vishnu Aarti Lyrics in Hindi)
ऊं जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ऊं जय जगदीश हरे।
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
स्वामी दुःख विनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ऊं जय जगदीश हरे।
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।
स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥
ऊं जय जगदीश हरे।
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ऊं जय जगदीश हरे।
तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।
स्वामी तुम पालन-कर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ऊं जय जगदीश हरे।
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥
ऊं जय जगदीश हरे।
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
ऊं जय जगदीश हरे।
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
स्वमी पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥
ऊं जय जगदीश हरे।
श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।
स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
ऊं जय जगदीश हरे।
भगवान विष्णु के मंत्र
- 1.द्वादशाक्षर महामंत्र- ऊं नमो भगवते वासुदेवाय
- 2.नारायण मंत्र-ऊं नमो नारायणाय
- 3.विष्णु गायत्री मंत्र- ऊं श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
- 4.ध्यान मंत्र- शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्
विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम्
वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥ - 5.समर्पण मंत्र- त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देव देव॥
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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