मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विपक्ष के नेता उमंग सिंघर के लिए असंसदीय शब्द का प्रयोग करके विवाद खड़ा कर दिया, जिसके बाद अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने खेद व्यक्त किया। गुरुवार को विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान संसदीय कार्य मंत्री आपा खो बैठे, जिससे हंगामा मच गया। चर्चा में भाग लेते हुए, सिंघर ने सिंगरौली में सरकार और अदानी समूह के बीच हुए एक समझौते का हवाला दिया और दावा किया कि सरकार बिजली खरीद के नाम पर कंपनी को 25 वर्षों में 1.25 लाख करोड़ रुपये का भुगतान करने की तैयारी कर रही है।
मंत्री विश्वास सारंग ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सदन में उपस्थित न होने वाले व्यक्ति का नाम नहीं लिया जाना चाहिए, वहीं विजयवर्गीय ने सिंघर पर झूठी सूचना देने का आरोप लगाया। सिंगर ने पलटवार करते हुए कहा कि जरूरत पड़ने पर वे सबूत देने को तैयार हैं। इससे दोनों के बीच तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया, जिसके दौरान विजयवर्गीय ने एक असंसदीय शब्द का प्रयोग किया। इसके बाद, विपक्षी कांग्रेस के सदस्य हंगामा करते हुए विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग करने लगे। इस दौरान दोनों पक्षों की ओर से हंगामा और नारेबाजी की गई।
हंगामा बढ़ता देख तोमर ने सदन की कार्यवाही कुछ देर के लिए स्थगित कर दी। बाद में जब सदन की कार्यवाही आरंभ हुई तो विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा की एक गौरवशाली परंपरा रही है लेकिन आज असहज स्थिति बन गई, जिसका कि उन्हें अफसोस है। तोमर ने कहा कि गुस्सा आना नहीं चाहिए लेकिन आज आ गया, दोनों पक्षों की तरफ से। उसके कारण असहज स्थिति बनी। मुझे इसका रंज है इसके लिए पक्ष और प्रतिपक्ष जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री बहुत अनुभवी हैं फिर भी आज सीमा कैसे टूट गई यह हम सभी के लिए चिंता का विषय है।
इसके बाद, विधानसभा अध्यक्ष ने दोनों पक्षों से विवाद का पटाक्षेप करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि जाने-अनजाने में कुछ शब्द निकले हैं, इसके लिए वह सदन से माफी मांगते हैं। सिंघार ने कहा मुख्यमंत्री ने जो भाव दिखाया, वह उसका सम्मान करते हैं और संसदीय मर्यादा का ध्यान रखते हैं। उन्होंने कहा कि अगर मेरी ओर से कुछ हुआ है तो मैं भी खेद व्यक्त करता हूं। इस बीच, विजयवर्गीय ने कहा कि करीब 37 साल का उनका राजनीतिक अनुभव रहा है लेकिन आज के अपने व्यवहार से वह खुश नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग अगर संसदीय मर्यादाओं का पालन नहीं करेंगे तो बाकी सदस्य कैसे करेंगे। उन्होंने कहा कि आज पता नहीं कैसे यह सब हो गया। विजयवर्गीय ने कहा, ‘‘उमंग के हाव-भाव थोड़े अलग थे... मैं उमंग को प्यार करता हूं... मैं अपने व्यवहार से दुखी हूं।’’
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लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर स्थित सांसद-विधायक अदालत में पेश हुए और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ उनकी टिप्पणियों से संबंधित 2018 के मानहानि मामले में अपना बयान दर्ज कराया। कांग्रेस नेता के वकील काशी प्रसाद शुक्ला ने बताया कि अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 9 मार्च तय की है, जिस दिन रायबरेली से लोकसभा सांसद को अपने बचाव में सबूत पेश करने के लिए कहा गया है।
अपना बयान दर्ज कराने के बाद जब गांधी अदालत से बाहर निकले, तो कांग्रेस समर्थकों ने उनके समर्थन में नारे लगाए। गांधी जी ने मुस्कुराते हुए भीड़ का अभिवादन किया और फिर चले गए। गांधी सुबह करीब 10:40 बजे सुल्तानपुर अदालत में दाखिल हुए और बयान दर्ज कराने के बाद करीब 11:15 बजे वहां से चले गए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने बताया कि अदालत में सुनवाई के बाद राहुल गांधी लखनऊ के लिए रवाना हो गए और वहां से वे वापस दिल्ली के लिए उड़ान भरेंगे।
अदालत में सुनवाई से पहले, सुल्तानपुर में कुछ स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने 'सत्यमेव जयते' लिखे पोस्टर लगाए थे। यह मामला 2018 का है, जब स्थानीय भाजपा नेता विजय मिश्रा ने गांधी के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि 2018 के कर्नाटक चुनावों के दौरान कांग्रेस नेता ने तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष और वर्तमान केंद्रीय गृह मंत्री शाह के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी।
पिछले पांच वर्षों से इस मामले की सुनवाई चल रही है। दिसंबर 2023 में, अदालत में पेश न होने पर गांधी के खिलाफ वारंट जारी किया गया था। उन्होंने फरवरी 2024 में आत्मसमर्पण कर दिया, जिसके बाद एक विशेष मजिस्ट्रेट ने उन्हें 25,000 रुपये के दो जमानती पर जमानत दे दी। 26 जुलाई 2024 को गांधी ने अदालत के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया, जिसमें उन्होंने निर्दोषता का दावा किया और मामले को राजनीतिक साजिश बताया। इसके बाद, अदालत ने शिकायतकर्ता को मामले में सबूत पेश करने का निर्देश दिया।
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