Surya Puja और स्नान दान से दूर होगा दोष, Tula Sankranti पर करें ये उपाय
आज यानी की 17 अक्तूबर 2026 को तुला संक्रांति का पर्व मनाया जा रहा है। आज ग्रहों के राजा सूर्य देव तुला राशि में प्रवेश करेंगे। इस दौरान 05 घंटे 43 मिनट का पुण्यकाल होगा। वहीं महापुण्यकाल 1 घंटा 54 मिनट है। संक्रांति के मौके पर स्नान-दान और सूर्य पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इससे जातक के पापों का नाश होता है और कुंडली में सूर्य की स्थिति बेहतर होती है। तो आइए जानते हैं तुला संक्रांति की तिथि, पुण्यकाल का समय और महत्व आदि के बारे में...
तिथि और पुण्यकाल
वैदिक पंचांग के मुताबिक 17 अक्टूबर शनिवार को शाम में 07:57 मिनट पर सूर्य का तुला राशि में प्रवेश होगा। उस दौरान तुला संक्रांति का क्षण होगा और इस बार तुला संक्रांति पर पुण्य काल दोपहर 12:06 मिनट से लेकर शाम 05:50 मिनट तक रहेगा।
स्नान-दान विधि
संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का विधान माना जाता है। इससे जातक के पाप मिटते हैं और पुण्य मिलता है। वहीं आप तुला संक्रांति के मौके पर पुण्यकाल में कभी भी पवित्र नदी में स्नान कर सकते हैं। लेकिन अगर नदी में स्नान करना संभव न हो, तो नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए।
क्या दान करें
इस दिन स्नान आदि करने के बाद यथासंभव दान करना चाहिए। तुला संक्रांति के मौके पर अन्न, वस्त्र, बर्तन, फल, बिस्तर और कंबल आदि का दान किया जाता है। यह दिन सूर्य से जुड़ा होता है, इसलिए इस दिन सूर्य से जुड़ी वस्तुएं दान करना चाहिए।
तुला संक्रांति के मौके पर गेहूं, लाल या नारंगी कपड़े, केसर, तांबा या तांबे के बर्तन, घी, गुड़ और सोना आदि का दान किया जा सकता है। इससे लाभ मिलता है और कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है।
इन उपायों को करने से सूर्य का प्रभाव बढ़ता है और करियर में नए मौके मिलते हैं। साथ ही पिता के साथ संबंध मजबूत होता है और उनका सहयोग प्राप्त होता है।
करें ये उपाय
इस दिन सूर्य देव को अर्घ्य जरूर दें।
सूर्य मंत्रों का जाप करना चाहि।
आदित्य हृदय स्त्रोत का जाप करना चाहिए।
वहीं सूर्य चालीसा का पाठ करें।
इन उपायों को करने से सूर्य दोष दूर होता है।
Saraswati Vandana: शारदीय नवरात्र में Saraswati Puja आज, छात्र और कलाकार ऐसे करें मां शारदा की उपासना
देवी सरस्वती को विद्या, ज्ञान, कला और संगीत की देवी माना जाता है। देवी सरस्वती की आराधना का यह पर्व लेखकों, शिक्षकों, छात्रों और कला से जुड़े लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक देवी सरस्वती की पूजा-अर्चना करने से ज्ञान और विवेक की प्राप्ति होती है। इस बार आज यानी की 17 अक्तूबर 2026 को सरस्वती पूजा का पर्व मनाया जा रहा है। तो आइए जानते हैं सरस्वती पूजा की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व आदि के बारे में...
तिथि और मुहूर्त
वैदिक पंचांग के मुताबिक शारदीय नवरात्र के दौरान सरस्वती पूजा 17 अक्टूबर 2026 को मनाया जा रहा है। इस दिन पूजा का प्रमुख समय सुबह 06:22 मिनट से लेकर दोपहर 12:06 मिनट तक है। वहीं दोपहर में पूजा का मुहूर्त 03:54 मिनट से लेकर शाम 06:14 मिनट तक है।
पूजन विधि
इस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें। फिर सूर्य देव को अर्घ्य दें और पूजा स्थल की सफाई करें। अब चौकी पर मां सरस्वती की प्रतिमा को स्थापित करें। फिर देवी सरस्वती को अक्षत, फूल, चंदन और फल आदि अर्पित करें। पूजा के दौरान घी का दीपक जलाएं और मां सरस्वती की वंदना करें। वहीं छात्र अपनी किताबें, कॉपी और कलम आदि को पूजान स्थल पर रखकर देवी सरस्वती का आशीर्वाद लें। वहीं संगीत और कला से जुड़े लोग अपने वाद्य यंत्रों की पूजा-अर्चना कर सकते हैं। फिर मां सरस्वती को फल, मिठाई और खीर आदि का भोग लगाएं।
धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक देवी सरस्वती को वाणी, विवेक और रचनात्मकता की देवी माना गया है। देवी सरस्वती की पूजा लेखकों, शिक्षकों, संगीतकारों, कलाकारों और छात्रों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि मां सरस्वती की आराधना से सीखने की क्षमता, एकाग्रता और बुद्धि के विकास का आशीर्वाद मिलता है।
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