विजयादशमी पर बाबा महाकाल ने किया नए शहर का भ्रमण, मंदिर से दशहरा मैदान तक गूंजे जयकारे, पुलिस ने दी सलामी
उज्जैन में विजयादशमी पर बाबा महाकाल की सालाना दशहरा सवारी निकली। दरअसल मंगलवार शाम 4 बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर से शुरू हुई सवारी नए शहर के कई इलाकों से होते हुए दशहरा मैदान पहुंची। रास्ते में पुलिस ने राजाधिराज को सलामी दी, वहीं भजन मंडलियों, पुलिस बैंड और जनजातीय कलाकारों की प्रस्तुतियों ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। सवारी के स्वागत के लिए जगह-जगह मंच बनाए गए और पालकी पर ड्रोन से 500 किलो फूल बरसाने की व्यवस्था की गई। वहीं दशहरा मैदान में भगवान मनमहेश और शमी वृक्ष का पूजन हुआ।
दरअसल दशहरा सवारी में कई धार्मिक और सामाजिक दल शामिल हुए। भजन मंडलियों ने भजनों की प्रस्तुति दी जबकि वैदिक बटुकों ने मंत्रोच्चार किया। पुलिस बैंड और महाकालेश्वर मंदिर के बैंड ने भी अपनी प्रस्तुतियां दीं। भारत स्काउट-गाइड, कांग्रेस सेवा दल और दूसरे दलों के सदस्य भी सवारी के साथ चले।
पारंपरिक लोकनृत्य भी आकर्षण का केंद्र रहे
इस बार सवारी में झांकियों के साथ जनजातीय कलाकारों के पारंपरिक लोकनृत्य भी आकर्षण का केंद्र रहे। अलग-अलग जनजातीय दलों के कलाकारों ने अपने लोकनृत्य पेश करते हुए सवारी की अगवानी की। धार्मिक परंपरा के साथ इन प्रस्तुतियों ने आयोजन में लोक संस्कृति की झलक भी दिखाई। शहर के विभिन्न मार्गों पर स्वागत मंच बनाए गए थे। व्यापारियों और स्थानीय रहवासियों ने पालकी के स्वागत के लिए रंगोली सजाई और रास्ते में फूलों से स्वागत किया।
ड्रोन से 500 किलो फूलों की वर्षा
वहीं बाबा महाकाल की सवारी के स्वागत के लिए शहर में विशेष इंतजाम किए गए थे। आयोजन के दौरान ड्रोन से भगवान की पालकी पर 500 किलो फूल बरसाने की व्यवस्था की गई। सवारी मार्ग पर रंगोली बनाई गई और जगह-जगह स्वागत मंच लगाए गए। पांच एलईडी रथों के जरिए सवारी का प्रसारण भी किया गया, ताकि रास्ते में मौजूद लोग आयोजन को देख सकें। सवारी गुदरी चौराहा, पटनी बाजार, गोपाल मंदिर, सराफा, सती गेट, नई सड़क, दौलतगंज, मालीपुरा और देवास गेट सहित कई इलाकों से गुजरी। इसके बाद चामुंडा चौराहा, टावर मार्ग और शहीद पार्क होते हुए दशहरा मैदान पहुंची। पूरे रास्ते में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने पालकी का स्वागत किया। दशहरा सवारी का यह भ्रमण उज्जैन की सालाना धार्मिक परंपरा का हिस्सा है, जिसमें बाबा महाकाल नए शहर के इलाकों में पहुंचते हैं।
दशहरा मैदान में शमी वृक्ष का पूजन
दरअसल दशहरा मैदान पहुंचने पर बाबा महाकाल की पालकी का स्वागत किया गया। यहां विधि-विधान से पूजन के बाद भगवान मनमहेश और शमी वृक्ष की पूजा की गई। दशहरा मैदान में पूजन की परंपरा पूरी होने के बाद सवारी वापसी के लिए रवाना हुई। वहीं वापसी में सवारी गंगा होटल मार्ग, देवास रोड, तीन बत्ती चौराहा, माधव क्लब रोड और धन्नालाल की चाल से होकर गुजरी। इसके बाद लोक निर्माण विभाग कार्यालय और फ्रीगंज ओवरब्रिज होते हुए सवारी आगे बढ़ी। फिर संख्याराजे धर्मशाला, देवास गेट, मालीपुरा, दौलतगंज, इंदौर गेट, गदापुलिया और हरिफाटक ब्रिज के रास्ते बेगमबाग और कोट मोहल्ला चौराहे से होते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंची।
उत्तराखंड CM ने किया कन्या पूजन, कहा- बालिकाओं के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करती है यह परंपरा
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शारदीय नवरात्रि की महानवमी के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री आवास में विधि-विधान के साथ हवन और पूजा-अर्चना की. इस दौरान उन्होंने मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के प्रतीक के रूप में नौ कन्याओं का पूजन किया और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया. मुख्यमंत्री ने मां भगवती से उत्तराखंड की निरंतर उन्नति तथा प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की.
मुख्यमंत्री धामी ने महानवमी के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए नवरात्रि के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि नवरात्रि का पर्व मातृशक्ति की आराधना और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक है. कन्या पूजन के माध्यम से महिलाओं और बालिकाओं के प्रति श्रद्धा, सम्मान और आदर की भावना व्यक्त की जाती है.
नारी शक्ति के सम्मान का संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति को विशेष स्थान प्राप्त है. नवरात्रि जैसे पर्व समाज को महिलाओं के सम्मान, सद्भाव और सकारात्मक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देते हैं. कन्या पूजन की परंपरा बालिकाओं के प्रति आदर और सम्मान की भावना को मजबूत करने का संदेश देती है.
सांस्कृतिक परंपराओं और जनकल्याण पर जोर
उत्तराखंड सरकार की ओर से धार्मिक और सांस्कृतिक अवसरों पर प्रदेश की परंपराओं को महत्व दिया जाना राज्य की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है. मुख्यमंत्री ने महानवमी के अवसर पर प्रदेश की समृद्धि और नागरिकों के कल्याण की कामना करते हुए सामाजिक सद्भाव तथा सकारात्मकता का संदेश दिया. मुख्यमंत्री ने विजयादशमी के अवसर पर भी प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि यह पर्व सत्य की असत्य पर, धर्म की अधर्म पर और न्याय की अन्याय पर विजय का प्रतीक है.
उन्होंने लोगों से अहंकार, क्रोध और बुराइयों को त्यागकर प्रेम, सद्भाव और एकता को बढ़ावा देने का आह्वान किया. साथ ही, आचरण में शुद्धता, कार्यों में समर्पण और राष्ट्रसेवा की भावना बनाए रखने की अपील की. मुख्यमंत्री धामी का संदेश धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक समरसता, नारी सम्मान और उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास के संकल्प को भी रेखांकित करता है.
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