चीन ने डब्ल्यूटीओ सुधारों पर पहला व्यापक नीति दस्तावेज पेश किया
बीजिंग, 19 फरवरी (आईएएनएस)। चीन ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में सुधारों पर अपना व्यापक रुख स्पष्ट करते हुए एक महत्वपूर्ण नीति दस्तावेज पेश किया है। यह डब्ल्यूटीओ सुधार प्रक्रिया शुरू होने के बाद से चीन द्वारा प्रस्तुत पहली विस्तृत नीति पेशकश है।
चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि यह दस्तावेज, जिसका शीर्षक मौजूदा परिस्थितियों में डब्ल्यूटीओ सुधारों पर चीन का रुख है, हाल ही में डब्ल्यूटीओ को सौंपा गया।
बता दें कि डब्ल्यूटीओ ने वर्ष 2022 के जून में आवश्यक सुधार प्रक्रिया शुरू की थी। एक तरफ जहां कुछ देशों द्वारा एकतरफा टैरिफ (सीमा शुल्क) वैश्विक व्यापार व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं, वहीं कुछ सदस्य निर्णय लेने की प्रक्रिया का दुरुपयोग कर बहुपक्षीय वार्ताओं में बाधा डाल रहे हैं। इन चुनौतियों के बीच, डब्ल्यूटीओ सदस्यों ने वर्ष 2025 के उत्तरार्ध में गहन सुधारों पर विचार-विमर्श शुरू किया। चीन ने सबसे पहले 2018 और 2019 में भी इस मुद्दे पर अपने विचार रखे थे, और अब नवीनतम दस्तावेज के साथ आगे आया है।
जानकारी के मुताबिक, चीन की यह नीति दस्तावेज तीन मुख्य सिद्धांतों पर आधारित है। पहला, चीन ने समावेशी वैश्वीकरण और बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को बनाए रखने के प्रति अपना समर्थन दोहराया है। दस्तावेज में मौजूदा हालात में डब्ल्यूटीओ सुधारों को और आगे बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया गया है।
दूसरा, चीन ने प्रस्ताव दिया है कि विकास को डब्ल्यूटीओ सुधारों के एजेंडे में सबसे केंद्रीय स्थान दिया जाना चाहिए। उन्होंने विकासशील देशों को डिजिटल अर्थव्यवस्था, हरित परिवर्तन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसे नए अवसरों का लाभ उठाने में मदद करने पर बल दिया।
तीसरा, दस्तावेज में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को विकृत करने वाली सरकारी नीतियों पर चर्चा करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है। साथ ही, सदस्य देशों की अलग-अलग आर्थिक प्रणालियों और विकास के चरणों का सम्मान करते हुए निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के लिए साझा सहमति बनाने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य ऐसा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार माहौल बनाना है जो उद्योगों की वास्तविक ज़रूरतों के अनुरूप हो।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
संयुक्त राष्ट्र में जापान को चीन की चेतावनी, थाईवान मामले में हस्तक्षेप पर मिलेगा करारा जवाब
बीजिंग, 19 फरवरी (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू त्सोंग ने बुधवार को जापान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उसने थाईवान मामले में हस्तक्षेप किया तो चीन उसे करारा जवाब देगा।
संयुक्त राष्ट्र महासभा की एक बैठक में बोलते हुए, फू त्सोंग ने कहा कि जापान के नेता हाल ही में ऐतिहासिक प्रवृत्तियों के खिलाफ जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जापान ने सार्वजनिक रूप से चीन के थाईवान को अपने तथाकथित राष्ट्रीय उत्तरजीविता संकट से जोड़ा है और इस बारे में चर्चा की है कि कैसे वह अमेरिका-जापान गठबंधन के आधार पर प्रतिक्रिया कर सकता है। फू त्सोंग ने कहा कि ऐसा करके जापान कथित सामूहिक आत्मरक्षा के अधिकार के तहत थाईवान मामले में सैन्य हस्तक्षेप करने की योजना बना रहा है।
फू त्सोंग ने स्पष्ट किया कि जापान के ये तर्क कानूनी रूप से अमान्य हैं और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद एक पराजित राष्ट्र के रूप में जापान के अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि ये विचार संयुक्त राष्ट्र चार्टर के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं और सभी शांतिप्रिय देशों को इसके प्रति सतर्क रहना चाहिए।
फू त्सोंग ने जोर देकर कहा कि जापान किसी भी बहाने से थाईवान मामले में हस्तक्षेप करने के लिए तथाकथित सामूहिक आत्मरक्षा के अधिकार का प्रयोग करता है, यह चीन के खिलाफ आक्रमण होगा। उन्होंने कहा कि चीन ऐसी किसी भी कार्रवाई का करारा जवाब देगा।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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