Responsive Scrollable Menu

प्रशांत भूषण के बाद अब संजय राउत ने दिया विवादित बयान, बोले-हो जाएगा रिजीम चेंज

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बीच प्रशांत भूषण ने रिजीम चेंज का बयान देकर विवाद खड़ा कर दिया था. मगर अब इस तरह का बयान शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत की तरफ से भी आया है. संजय राउत ने कहा कि  राहुल गांधी को वियतनाम से आने दीजिए, फिर रिजीम चेंज हो जाएगा. संजय राउत ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'हो जाएगा रिजीम चेंज, आप देखते रहिए. राहुल गांधी वियतनाम गए हैं न, आने के बाद देखो.'

दफ्तरों और मंत्रियों के घरों पर हमला किया

इससे पहले संजय राउत ने एक पोस्ट किया था, जिस पर विवाद खड़ा हो गया था. उन्होंने अल्बानिया में हो रहे विरोध प्रदर्शनों की तुलना भारत से की थी.राउत ने एक्स पर वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा,'अल्बानिया के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट को जला दिया है. लोग इसलिए गुस्से में थे, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट भ्रष्ट पीएम की सहायता कर रहा था. प्रदर्शन कर रही जनता ने संसद, सरकारी  दफ्तरों और मंत्रियों के घरों पर हमला किया. सभी देशों को इन घटनाओं से सबक लेना चाहिए, खासकर भारत को.'

वियतनाम गए हैं राहुल गांधी

भाजपा ने राहुल गांधी पर वियतनाम जाने का दावा किया है. भाजपा ने एक वीडियो शेयर करते हुए दावा किया कि राहुल गांधी वियतनाम गए हैं. भाजपा ने फ्लाइट का एक वीडियो शेयर करते हुए यह दावा किया है कि 'झूठ फैलाते-फैलाते थक गया, कुछ दिन वियतनाम घूम आता हूं, किसी को क्या ही पता चलेगा!'

भाजपा ने सवाल खड़े किए 

राहुल गांधी की इस कथित विदेश यात्रा पर भाजपा ने सवाल खड़े किए हैं. भाजपा नेता प्रदीप भंडारी ने कहा, 'राहुल गांधी फिर से वहीं कर रहे हैं. इसमें वह माहिर हैं- ब्रेक लेना और छुट्टियों का आनंद लेना. ऐसी सूचना है कि राहुल गांधी छुट्टियों के लिए विदेश गए हैं. राहुल गांधी भारत में नहीं हैं.' इस पर भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने भी इस पर प्रश्न खड़े किए. उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अक्सर अपना समय विदेश में बिताते हैं. राहुल गांधी भारत आते हैं. किसी मामले को लेकर विवाद खड़ा करते हैं और फिर विदेश यात्रा पर निकल जाते हैं.

Continue reading on the app

UP Election 2027: बुंदेलखंड के जालौन की 3 विधानसभा सीटों का पूरा हिसाब-किताब...

UP Election 2027: उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित जालौन जिला अपनी ऐतिहासिक विरासत, यमुना और बेतवा जैसी नदियों, कृषि आधारित अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान के लिए जाना जाता है. उरई जिला मुख्यालय है, जबकि कालपी अपने प्राचीन इतिहास, धार्मिक महत्व और हस्तनिर्मित कागज के कारोबार के लिए मशहूर है. लेकिन जालौन की पहचान सिर्फ इतिहास और संस्कृति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बुंदेलखंड की राजनीति का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र है. 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर इस जिले की तीनों सीटों पर राजनीतिक दलों की रणनीति और संभावित समीकरणों पर नजर रहेगी.

जालौन में खेतीकिसानी, सिंचाई, ग्रामीण सड़कों, रोजगार और सरकारी योजनाओं का लाभ जैसे मुद्दे मतदाताओं के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं. जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की जरूरतें भी अलग-अलग हैं. ऐसे में चुनावी मुकाबले में राजनीतिक दलों के लिए स्थानीय समस्याओं को समझना, मजबूत उम्मीदवार उतारना और अलगअलग सामाजिक वर्गों का समर्थन हासिल करना अहम होगा.

‘कुर्सी का काउंटडाउन’ की इस सीरीज में आज बात जालौन जिले की...

जालौन की राजनीति का मिजाज पिछले तीन विधानसभा चुनावों में लगातार बदलता रहा है. 2012 में जिले की तीन सीटों पर समाजवादी पार्टी (SP), बहुजन समाज पार्टी (BSP) और कांग्रेस ने एकएक सीट जीती थी. इसके बाद 2017 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीनों सीटों पर जीत दर्ज कर क्लीन स्वीप किया. हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनाव में मुकाबले की तस्वीर फिर बदली और बीजेपी दो सीटें जीतने में कामयाब रही, जबकि कालपी सीट समाजवादी पार्टी के खाते में चली गई.

2022 के नतीजों के अनुसार, माधौगढ़ और उरई में बीजेपी ने अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखी, जबकि कालपी में समाजवादी पार्टी ने करीबी मुकाबले में जीत हासिल की. कालपी में तीन प्रमुख उम्मीदवारों के बीच वोटों का अंतर काफी कम रहा. इससे पता चलता है कि जालौन की तीनों सीटों पर चुनावी परिस्थितियां एक जैसी नहीं हैं. ऐसे में 2027 में उम्मीदवारों की स्थानीय पकड़, विपक्षी वोटों का बंटवारा और ग्रामीण मतदाताओं का रुख चुनावी नतीजों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

यहां चुनावी मैदान में मुख्य मुद्दे खेती-किसानी, सिंचाई की सुविधा, ग्रामीण विकास, स्थानीय रोजगार, बुनियादी सुविधाएं और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने से जुड़े हैं. इसके साथ ही अनुसूचित जाति के मतदाताओं की भूमिका और अलगअलग सामाजिक वर्गों का समर्थन भी कई सीटों पर चुनावी समीकरण प्रभावित कर सकता है. आखिर जालौन जिले की तीनों विधानसभा सीटों का राजनीतिक इतिहास क्या कहता है? 2022 में किस उम्मीदवार को कितने वोट मिले? और 2027 के चुनाव में किस पार्टी की रणनीति कामयाब हो सकती है? आइए, सिलसिलेवार ढंग से समझते हैं...

जालौन जिले की आबादी और सामाजिक संरचना

जालौन की राजनीति को समझने के लिए जिले की जनसंख्या, ग्रामीणशहरी वितरण और सामाजिक संरचना पर नजर डालना जरूरी है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जिले की आबादी करीब 16.90 लाख बताई गई है. इसमें से 96,000 पुरुष यानी कि करीब 54% और 7,84,000  यानी कि करीब 46%महिलाएं हैं. जिले की लगभग 75 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, जबकि 25 प्रतिशत आबादी शहरी इलाकों में निवास करती है. इस लिहाज से खेती, सिंचाई, ग्रामीण सड़कें और स्थानीय रोजगार जैसे मुद्दे चुनाव में अहम हो सकते हैं.

जालौन जिले की जनसंख्या और सामाजिक संरचना

विवरण

आंकड़े

कुल जनसंख्या

लगभग 16,90,000

ग्रामीण आबादी

लगभग 75%

शहरी आबादी

लगभग 25%

अनुसूचित जाति की आबादी

लगभग 27.7%

साक्षरता दर

लगभग 73%

हिंदू आबादी

लगभग 89.3%

मुस्लिम आबादी

लगभग 10.2%

जालौन जिले की तीन विधानसभा सीटें

जालौन जिले में तीन विधानसभा क्षेत्र हैं जिसमें माधौगढ़, कालपी और उरई आते हैं. इनमें उरई विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. तीनों सीटों की सामाजिक संरचना, ग्रामीणशहरी आबादी और पिछले चुनावों के नतीजों में अंतर रहा है. यही वजह है कि 2027 में प्रत्येक सीट पर अलग चुनावी रणनीति की जरूरत होगी.

2022 विधानसभा चुनाव परिणाम

विधानसभा सीट

उम्मीदवार

राजनीतिक दल

प्राप्त वोट

वोट शेयर

माधौगढ़

मूलचंद्र सिंह

BJP

1,05,231

41.29%

माधौगढ़

शीतल कुशवाहा

BSP

70,257

27.57%

माधौगढ़

राघवेंद्र प्रताप सिंह

SP

63,0xx*

24.74%

कालपी

विनोद चतुर्वेदी

SP

69,782

29.48%

कालपी

छोटे सिंह

निषाद पार्टी

66,966

28.29%

कालपी

श्यामपाल उर्फ चुन्ना पाल

BSP

64,683

27.32%

उरई (SC)

गौरी शंकर

BJP

1,28,644

47.45%

उरई (SC)

दयाशंकर वर्मा

SP

90,996

33.56%

उरई (SC)

सत्येंद्र प्रताप

BSP

38,638

14.25%

जानें जालौन की सभी विधानसभा सीटों के बारे में...

1. माधौगढ़ विधानसभा सीट: बीजेपी के सामने जीत दोहराने की चुनौती

जालौन जिले की माधौगढ़ विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास लगातार बदलते राजनीतिक समीकरणों की कहानी कहता है. 2012 के विधानसभा चुनाव में यह सीट बहुजन समाज पार्टी के संतराम ने जीती थी. इसके बाद 2017 में भारतीय जनता पार्टी के मूलचंद्र सिंह ने जीत दर्ज की और 2022 के चुनाव में भी अपनी सीट बचाने में सफल रहे.

2022 के चुनाव में मूलचंद्र सिंह को 1,05,231 वोट मिले थे. उनका वोट शेयर 41.29 प्रतिशत रहा. वहीं, बीएसपी की शीतल कुशवाहा को 70,257 वोट मिले और उनका वोट शेयर 27.57 प्रतिशत रहा. समाजवादी पार्टी के राघवेंद्र प्रताप सिंह को 24.74 प्रतिशत वोट मिले. बीजेपी ने यह मुकाबला 34,974 वोटों के अंतर से जीता था.

माधौगढ़ में ग्रामीण आबादी का बड़ा हिस्सा होने के कारण खेतीकिसानी, सिंचाई, सड़क, रोजगार और सरकारी योजनाओं से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण हो सकते हैं. 2027 में बीजेपी के सामने अपनी जीत का सिलसिला जारी रखने की चुनौती होगी, जबकि विपक्षी दलों की कोशिश अपने मतदाताओं को एकजुट करने और बीजेपी के वोट शेयर में सेंध लगाने की होगी.

2. कालपी विधानसभा सीट: तीन दलों के बीच कांटे की टक्कर

यमुना नदी के किनारे स्थित कालपी जालौन जिले का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाला नगर है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इसका संबंध महर्षि वेदव्यास के जन्मस्थल से भी जोड़ा जाता है. यहां व्यास मंदिर, लंका मीनार और 84 गुंबद जैसे ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं. मुगलकालीन इतिहास से जुड़ी पहचान के अलावा कालपी हस्तनिर्मित कागज के उत्पादन के लिए भी जाना जाता है.

राजनीतिक रूप से कालपी जिले की सबसे दिलचस्प सीटों में शामिल है. 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के विनोद चतुर्वेदी ने यहां जीत दर्ज की थी. उन्हें 69,782 वोट मिले और उनका वोट शेयर 29.48 प्रतिशत रहा. निषाद पार्टी के छोटे सिंह को 66,966 वोट मिले, जबकि बीएसपी के श्यामपाल उर्फ चुन्ना पाल को 64,683 वोट हासिल हुए.

विनोद चतुर्वेदी ने यह चुनाव महज 2,816 वोटों के अंतर से जीता था. तीन प्रमुख उम्मीदवारों के बीच वोटों का अंतर कम रहने से मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया था. किसी भी उम्मीदवार को 30 प्रतिशत वोट भी नहीं मिले थे. यह नतीजा दिखाता है कि कालपी में अलगअलग दलों के बीच मतों का बंटवारा चुनावी परिणाम पर बड़ा असर डाल सकता है.

2027 में कालपी पर सभी प्रमुख दलों की नजर रहेगी. समाजवादी पार्टी के सामने अपनी मौजूदा सीट बचाने की चुनौती होगी, जबकि बीजेपी और अन्य दल इस सीट पर जीत हासिल करने के लिए स्थानीय मुद्दों और उम्मीदवारों के आधार पर रणनीति तैयार कर सकते हैं. यहां विपक्षी वोटों का बंटवारा और स्थानीय उम्मीदवार की लोकप्रियता निर्णायक साबित हो सकती है.

3. उरई विधानसभा सीट: बीजेपी की मजबूत बढ़त पर रहेंगी नजरें

उरई, जालौन जिले का मुख्यालय है. यह कानपुर और झांसी के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग27 पर स्थित है. उरई की पहचान स्थानीय खानपान और ऐतिहासिक परंपराओं से भी जुड़ी है. जिले की दूसरी सीटों की तुलना में यहां ग्रामीण और शहरी आबादी का अनुपात लगभग बराबर है. उरई विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, इसलिए यहां उम्मीदवारों की सामाजिक स्वीकार्यता और स्थानीय मतदाताओं से जुड़ाव भी चुनावी समीकरण का हिस्सा बन सकते हैं.

2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के गौरी शंकर ने उरई सीट पर जीत दर्ज की थी. उन्हें 1,28,644 वोट मिले, जो कुल वोटों का 47.45 प्रतिशत था. समाजवादी पार्टी के दयाशंकर वर्मा को 90,996 वोट और 33.56 प्रतिशत वोट शेयर मिला. वहीं, बहुजन समाज पार्टी के सत्येंद्र प्रताप को 38,638 वोट मिले और उनका वोट शेयर 14.25 प्रतिशत रहा.

बीजेपी ने यह सीट 37,648 वोटों के अंतर से जीती थी. जिले की तीनों सीटों में उरई पर बीजेपी की बढ़त सबसे मजबूत दिखाई दी. हालांकि, 2027 में इस बढ़त को बनाए रखना पार्टी के लिए अहम चुनौती होगी. दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी और बीएसपी की रणनीति इस बात पर निर्भर कर सकती है कि वे अपने समर्थकों को किस तरह एकजुट करती हैं और स्थानीय मुद्दों को कितना प्रभावी ढंग से उठाती हैं.

उरई में ग्रामीण और शहरी मतदाताओं की प्राथमिकताएं भी अलग हो सकती हैं. ग्रामीण इलाकों में कृषि और सिंचाई जैसे मुद्दे अहम रहेंगे, जबकि शहरी क्षेत्रों में सड़क, जल निकासी, रोजगार और अन्य नागरिक सुविधाओं को लेकर मतदाताओं का रुख महत्वपूर्ण हो सकता है.

2027 में जालौन की सियासत में किन मुद्दों पर रहेगी नजर?

जालौन जिले की तीनों विधानसभा सीटों के पिछले चुनावी नतीजों को देखें तो यहां किसी एक पार्टी का प्रदर्शन हर सीट पर एक जैसा नहीं रहा है. 2017 में बीजेपी ने क्लीन स्वीप किया था, लेकिन 2022 में कालपी की सीट समाजवादी पार्टी के खाते में चली गई. ऐसे में 2027 का चुनाव कई सवालों के जवाब देगा.

  • ग्रामीण मतदाताओं का रुख: जिले की बड़ी आबादी गांवों में रहती है. ऐसे में खेती, सिंचाई, ग्रामीण सड़कें और सरकारी योजनाओं का लाभ चुनावी चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं.
  • विपक्षी वोटों का एकीकरण: कालपी के 2022 के नतीजे बताते हैं कि करीबी मुकाबले में मतों का बंटवारा काफी अहम हो सकता है.
  • स्थानीय उम्मीदवारों की भूमिका: माधौगढ़ और उरई में बीजेपी की जीत का अंतर अलगअलग रहा. उम्मीदवार की छवि, स्थानीय पकड़ और जनता से जुड़ाव परिणाम प्रभावित कर सकते हैं.
  • विकास और रोजगार: स्थानीय स्तर पर रोजगार, बुनियादी सुविधाएं और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दे मतदाताओं की प्राथमिकताओं को प्रभावित कर सकते हैं.

कुल मिलाकर, जालौन जिले की तीनों विधानसभा सीटों की राजनीतिक तस्वीर अलगअलग है. माधौगढ़ में बीजेपी को अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखने की चुनौती होगी, कालपी में करीबी मुकाबले की संभावना पर नजर रहेगी और उरई में बीजेपी की बड़ी बढ़त को विपक्ष चुनौती देने की कोशिश करेगा. हालांकि, 2022 के नतीजों को 2027 के चुनाव का निश्चित संकेत नहीं माना जा सकता. उम्मीदवारों, गठबंधन, स्थानीय मुद्दों और मतदाताओं के रुख में बदलाव चुनावी तस्वीर बदल सकता है.

यह भी पढ़ें: UP Election 2027: गठबंधन हुआ तो 150 सीटों की मांग की तैयारी में कांग्रेस, इतनी सीटें देने को तैयार सपा

Continue reading on the app

  Sports

Rajinikanth के बड़े फैन Sanju Samson ने परिवार और टीम संग देखी Jailer 2

क्रिकेट के मैदान पर अपने खेल से लोगों का मनोरंजन करने वाले संजू सैमसन फिल्मों के भी बड़े शौकीन हैं। खासकर दक्षिण भारतीय फिल्मों के सुपरस्टार रजनीकांत के लिए उनकी दीवानगी किसी से छिपी नहीं है। इस बार भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज ने अपने पसंदीदा अभिनेता की नई फिल्म देखने के लिए कुछ ऐसा किया, जिसने उनके फैंस का ध्यान खींच लिया। संजू ने रजनीकांत की फिल्म ‘जेलर 2’ देखने के लिए पूरा सिनेमाघर ही बुक कर लिया और अपने परिवार, दोस्तों तथा टीम के साथियों के साथ फिल्म देखने पहुंचे।

केरल में जन्मे संजू सैमसन लंबे समय से रजनीकांत के फैन रहे हैं। रजनीकांत को उनके चाहने वाले प्यार से ‘थलाइवा’ भी कहते हैं। संजू ने कई बार उनके प्रति अपना लगाव जाहिर किया है। अब उन्होंने अपने पसंदीदा अभिनेता की फिल्म बड़े पर्दे पर देखने के लिए खास इंतजाम किया। उनके लिए यह सिर्फ फिल्म देखना नहीं, बल्कि अपने पसंदीदा सितारे को पर्दे पर देखने का एक खास मौका था।

संजू ने बताया कि वह फिल्म देखने के लिए काफी उत्साहित थे, लेकिन दिल्ली में एक कार्यक्रम होने के कारण उनकी योजना एक दिन आगे बढ़ गई। वह एक दिन पहले ही फिल्म देखना चाहते थे, मगर कार्यक्रम की वजह से ऐसा नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने अगले दिन पूरा सिनेमाघर बुक करने का इंतजाम किया, ताकि अपने करीबी लोगों के साथ आराम से फिल्म का आनंद ले सकें।

संजू ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें रजनीकांत की फिल्में देखना बहुत पसंद है और वह हमेशा उनकी अगली फिल्म का इंतजार करते हैं। उन्होंने बताया कि वह उनकी ज्यादा से ज्यादा फिल्में देखने की कोशिश करते हैं। दिल्ली में कार्यक्रम के कारण इस बार उन्हें फिल्म देखने में एक दिन की देरी हुई, लेकिन आखिरकार वह अपने पसंदीदा अभिनेता को बड़े पर्दे पर देखने के लिए तैयार थे।

उन्होंने आगे बताया कि इस बार पूरा सिनेमाघर बुक करने का मौका मिल गया, इसलिए उन्होंने अपने दोस्तों को भी बुलाया। उनकी पत्नी भी इस खास मौके पर मौजूद थीं। संजू ने कहा कि वह रजनीकांत को बड़े पर्दे पर देखने के लिए काफी उत्साहित हैं।

बता दें कि संजू सैमसन भारतीय क्रिकेट में अपनी बल्लेबाजी और विकेटकीपिंग के लिए जाने जाते हैं। हालांकि, राष्ट्रीय टीम में उनकी जगह को लेकर अक्सर चर्चा होती रही है। शानदार प्रतिभा के बावजूद उन्हें टीम में लगातार मौके मिलने को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इसके बावजूद मैदान के बाहर उनकी पसंद और निजी जिंदगी से जुड़ी बातें भी फैंस के बीच चर्चा का विषय बनती हैं।

गौरतलब है कि रजनीकांत भारतीय सिनेमा के सबसे लोकप्रिय सितारों में शामिल हैं। उनकी फिल्मों का इंतजार भारत ही नहीं, विदेशों में रहने वाले फैंस भी करते हैं। संजू सैमसन का पूरा सिनेमाघर बुक करके फिल्म देखना दिखाता है कि बड़े खिलाड़ी भी अपने पसंदीदा कलाकारों के लिए आम प्रशंसकों जैसी ही दीवानगी रखते हैं।

Tue, 20 Oct 2026 20:31:00 +0530

  Videos
See all

Sanjay Raut Albania Post: राउत की देश विरोधी सोच एक्सपोज ! #shorts #congress #sanjayraut #cjp #viral #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-20T15:17:10+00:00

PM Modi Ravan Dahan: मोदी की हुंकार शत्रु परास्त ! #shorts #pmmodi #rawandahan #delhi #congress #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-20T15:14:01+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers