जम्मू से श्रीनगर के लिए जल्द दौड़ेगी 20 कोच वाली वंदे भारत, जानें कब तक हो सकती है शुरुआत
Vande Bharat News: जम्मू से श्रीनगर तक वंदे भारत एक्सप्रेस में सफर करने का इंतजार अब जल्द खत्म होने वाला है. रेलवे ने Indian Railways की इस आधुनिक ट्रेन को जम्मू तवी स्टेशन से चलाने की तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं. अब केवल रेलवे बोर्ड की अंतिम मंजूरी का इंतजार है, जिसके बाद आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी.
लगभग समाप्त हो चुका है पुनर्विकास कार्य
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, जम्मू रेलवे स्टेशन पर चल रहा पुनर्विकास कार्य लगभग समाप्त हो चुका है. स्टेशन पर जरूरी बुनियादी ढांचे और सुविधाओं को अपग्रेड किया गया है, जिससे यहां से वंदे भारत चलाने का रास्ता साफ हो गया है. पिछले वर्ष Udhampur-Srinagar-Baramulla Rail Link परियोजना के शुरू होने के बाद ही जम्मू से श्रीनगर तक ट्रेन चलाने की योजना बनाई गई थी, लेकिन निर्माण कार्य के कारण फिलहाल वंदे भारत को कटरा से संचालित किया जा रहा था.
क्या कहते हैं अधिकारी
अधिकारियों का कहना है कि जम्मू डिवीजन पूरी तरह तैयार है और मार्च महीने में ट्रेन शुरू होने की संभावना है. हालांकि, अभी तारीख तय नहीं हुई है. पिछले साल जून में अंजी और चेनाब पुल के उद्घाटन के बाद कटरा से श्रीनगर के बीच दो जोड़ी वंदे भारत ट्रेनें शुरू की गई थीं. इससे पहली बार कश्मीर घाटी का सीधा रेल संपर्क देश के बाकी हिस्सों से जुड़ा, जिससे पर्यटन और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिला.
20 कोच वाली चलेगी वंदे भारत
फिलहाल Vande Bharat Express आठ कोच के साथ कटरा से श्रीनगर के बीच चल रही है, जिसकी मांग काफी ज्यादा है. रेलवे के अनुसार, ट्रेन की ऑक्युपेंसी 100 प्रतिशत से भी अधिक है. इसी को देखते हुए अब 20 कोच वाली नई वंदे भारत ट्रेन चलाने की तैयारी की जा रही है. इसके रेक चेन्नई स्थित आईसीएफ में तैयार किए जा रहे हैं. दोनों रेक तैयार होते ही जम्मू से श्रीनगर के बीच 20 कोच वाली वंदे भारत एक्सप्रेस पटरी पर दौड़ती नजर आएगी.
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यूपीआई के अग्रदूत से पब्लिक मार्केट तक: फोनपे का 10 साल में 65 करोड़ यूजर्स वाला फिनटेक साम्राज्य
नई दिल्ली, 19 फरवरी (आईएएनएस)। डिजिटल भुगतान की दुनिया में एक साहसिक शुरुआत करने वाली फोनपे ने पिछले एक दशक में खुद को एक पूर्ण विकसित और विविधीकृत फिनटेक प्लेटफॉर्म के रूप में स्थापित कर लिया है। यूपीआई (यूपीआई) के शुरुआती अग्रदूतों में शामिल रही यह कंपनी अब उपभोक्ताओं और कारोबारियों के लिए एक व्यापक वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) तैयार कर चुकी है।
स्थापना के बाद से अब तक फोनपे ने 65 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ताओं का विशाल आधार खड़ा किया है। इसके साथ ही 4.7 करोड़ से अधिक व्यापारियों का स्वीकृति नेटवर्क देश के महानगरों से लेकर दूर-दराज के गांवों तक फैला हुआ है। यह विस्तार किसी एक बड़े ‘यूरेका’ क्षण का परिणाम नहीं था, बल्कि भारतीयों की रोजमर्रा की छोटी-छोटी वित्तीय जरूरतों को सरल बनाने की रणनीति पर आधारित था।
जब कई वैश्विक फिनटेक कंपनियां उच्च मूल्य के लेनदेन पर ध्यान केंद्रित कर रही थीं, तब फोनपे ने ‘यूज़ केस ड्रिवन’ दृष्टिकोण अपनाया। कंपनी ने मोबाइल रिचार्ज और बिजली बिल भुगतान जैसी रोजमर्रा की, छोटे मूल्य की लेकिन उच्च आवृत्ति वाली सेवाओं से शुरुआत की। इन सेवाओं को तेज, सरल और भरोसेमंद बनाकर फोनपे ने उपयोगकर्ताओं में नियमित उपयोग की आदत विकसित की।
इस ‘यूटिलिटी-फर्स्ट’ रणनीति ने कंपनी को एक वफादार ग्राहक आधार दिया, जिसने बाद में उसी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध अन्य वित्तीय सेवाओं को अपनाने में भी भरोसा दिखाया। इस तरह फोनपे ने धीरे-धीरे भुगतान ऐप से आगे बढ़कर एक व्यापक वित्तीय मंच का रूप ले लिया।
साल 2026 तक फोनपे ने उपभोक्ताओं के लिए कई तरह की वित्तीय सेवाओं को अपने प्लेटफॉर्म पर एकीकृत कर दिया है। यूपीआई आधारित पीयर-टू-पीयर और मर्चेंट भुगतान के अलावा ऐप पर मोबाइल रिचार्ज, बिजली-पानी के बिल भुगतान, लोन रीपेमेंट, फास्टैग रिचार्ज जैसी दैनिक जरूरतों की सुविधाएं उपलब्ध हैं।
वेल्थ मैनेजमेंट के क्षेत्र में भी कंपनी ने उल्लेखनीय विस्तार किया है। उपयोगकर्ता अब डिजिटल गोल्ड में निवेश कर सकते हैं, जिसमें गोल्ड एसआईपी और डेली सेविंग्स जैसे विकल्प शामिल हैं। इसके अलावा, टैक्स सेविंग, लिक्विड और इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में निवेश की सुविधा भी उपलब्ध है।
बीमा क्षेत्र में फोनपे मोटर, स्वास्थ्य, जीवन और विशेष यात्रा बीमा जैसी योजनाएं उपलब्ध करा रहा है, जिससे आम उपभोक्ताओं को सुलभ सुरक्षा कवरेज मिल सके। इसके साथ ही कंपनी ने लेंडिंग सेवाओं को भी मजबूत किया है, जिसमें मर्चेंट और कंज्यूमर लोन, यूपीआई पर क्रेडिट लाइन और म्यूचुअल फंड के बदले लोन जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
यात्रा और ट्रांजिट सेवाओं में भी फोनपे सक्रिय है। मेट्रो टिकट बुकिंग से लेकर यूएई, सिंगापुर और श्रीलंका जैसे देशों में अंतरराष्ट्रीय यूपीआई भुगतान की सुविधा देकर कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्म को वैश्विक स्तर पर भी विस्तारित किया है।
भारत जैसे विविध डिजिटल साक्षरता वाले देश में फोनपे की सबसे बड़ी उपलब्धि उसका सहज और सरल यूजर इंटरफेस (यूआई) माना जाता है। 11 से अधिक भारतीय भाषाओं में समर्थन और ‘रिलेंटलेस सिंप्लिफिकेशन’ की डिजाइन फिलॉसफी ने लाखों नए उपयोगकर्ताओं के लिए डिजिटल भुगतान को आसान बनाया है।
कंपनी की ‘बिल्डिंग फॉर भारत’ रणनीति का असर इसके भौगोलिक विस्तार में भी दिखता है। ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) के अनुसार, फोनपे के 65 प्रतिशत से अधिक उपभोक्ता पारंपरिक शहरी केंद्रों से बाहर के टियर-2, टियर-3 और टियर-4 शहरों से आते हैं। यह आंकड़ा बताता है कि कंपनी ने डिजिटल वित्तीय सेवाओं को देश के सुदूर हिस्सों तक पहुंचाया है।
सिर्फ उपभोक्ताओं तक सीमित न रहकर फोनपे ने 4.7 करोड़ से अधिक व्यापारियों के लिए भी एक व्यापक कारोबारी ढांचा तैयार किया है। फोनपे बिजनेस ऐप स्थानीय व्यापार के लिए एक संपूर्ण डिजिटल केंद्र के रूप में विकसित हुआ है।
उत्पाद नवाचार इसकी वृद्धि का प्रमुख आधार रहा है। स्मार्ट स्पीकर और ऑडियो कन्फर्मेशन डिवाइस के बाद हाल ही में लॉन्च किया गया ‘स्मार्टपॉड’ एक ‘मेड-इन-इंडिया’ हाइब्रिड डिवाइस है, जो स्मार्ट स्पीकर और पॉइंट-ऑफ-सेल सिस्टम को एक साथ जोड़ता है। इससे छोटे से छोटे दुकानदार भी एक ही किफायती डिवाइस के जरिए यूपीआई और कार्ड भुगतान स्वीकार कर सकते हैं।
इसके अलावा, व्यापारी पेपरलेस लेंडिंग मार्केटप्लेस के माध्यम से वर्किंग कैपिटल और बिजनेस लोन तक 100 प्रतिशत डिजिटल प्रक्रिया के जरिए पहुंच सकते हैं। इंस्टेंट डिजिटल सेटलमेंट और रिकंसिलिएशन जैसी सुविधाओं ने छोटे व्यापारियों को भी वह तकनीकी ढांचा उपलब्ध कराया है, जो पहले केवल बड़ी रिटेल चेन तक सीमित था।
अपने दसवें वर्ष में प्रवेश करते हुए फोनपे का फोकस अब केवल विस्तार पर नहीं, बल्कि परिपक्वता और स्थायित्व पर है। देश के सुदूर हिस्सों तक पहुंच बनाने के बाद, कंपनी अब लेनदेन की सुविधा देने से आगे बढ़कर धन के पूरे जीवनचक्र के प्रबंधन की दिशा में काम कर रही है।
जैसे-जैसे फोनपे सार्वजनिक कंपनी बनने की तैयारी कर रहा है, उसका लक्ष्य हर भारतीय की वित्तीय आकांक्षाओं के पीछे एक अदृश्य लेकिन मजबूत इंजन बनने का है। कंपनी ने यह साबित किया है कि जब आप सबसे छोटे व्यापारी और सबसे दूरस्थ उपभोक्ता की जरूरतों को प्राथमिकता देते हैं, तो विस्तार केवल लक्ष्य नहीं, बल्कि एक स्वाभाविक परिणाम बन जाता है।
--आईएएनएस
डीएससी
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