PM Kisan 24th Installment: दिवाली से पहले आएगी योजना की 24वीं किस्त! किसान जल्द पूरे कर लें ये काम, वरना अटक सकते हैं पैसे
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के 9 करोड़ से अधिक लाभार्थी किसानों का अगली किस्त को लेकर इंतजार जल्द खत्म हो सकता है। खबर है कि मोदी सरकार दिवाली से पहले पात्र किसानों के खाते में 24वीं किस्त के दो-दो हजार रुपए जारी कर सकती हैं।
चर्चा तो ये भी है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 25 अक्टूबर को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी दौरे पर रहेंगे, जहाँ वे नमो घाट पर भारतीय वायुसेना के ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो में हिस्सा लेंगे।हालांकि अभी तक केंद्र सरकार या कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय की तरफ से आधिकारिक तारीख का कोई ऐलान नहीं किया गया है।
PM KISAN योजना में हर 4 महीने में मिलते हैं 2000-2000 रुपए
दरअसल, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, किसानों के लिए केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही एक महत्वपूर्ण और बड़ी योजना है। इस योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6,000 रुपए की आर्थिक मदद दी जाती है। यह राशि 2,000 रुपए की 3 समान किस्तों में हर 4 महीने के अंतराल पर सीधे किसानों के बैंक खाते में (DBT के माध्यम से) भेजी जाती है। इससे किसानों को बीज, उर्वरक, उपकरण एवं अन्य कृषि आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता मिलती है।
योजना के नियम के अनुसार, हर वर्ष योजना की पहली किस्त अप्रैल से जुलाई के बीच जारी की जाती है। वहीं दूसरी किस्त अगस्त से नवंबर और तीसरी किस्त दिसंबर से मार्च के बीच आती है। इस तय पैटर्न और चार महीने के चक्र के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि अक्टूबर अंत या नंवबर नवंबर के पहले हफ्ते में 24वीं किस्त की राशि जारी जा सकती है।
अगली किस्त का लाभ लेना है तो पात्र किसान ई केवाईसी, भूमि रिकॉर्ड सत्यापन और फार्मर रजिस्ट्री (जिन राज्यों में अनिवार्य है) का काम पूरा कर लें। साथ ही मोबाईल नंबर आधार से लिंक और बैंक खाते में डीबीटी ऑप्शन ऑन होना भी जरूरी है। इसके अलावा आवेदन फॉर्म में कोई गलती हो गई हो तो वो भी जांच लें, जैसे, नाम , पता, मोबाईल नंबर, आधार संख्या । पीएम किसान योजना संबंधी किसी भी तरह की समस्या पर किसान ईमेल आईडी pmkisan-ict@gov.in ,हेल्पलाइन नंबर- 155261 या 1800115526 (Toll Free) या फिर 011-23381092 पर संपर्क कर सकते है।
इन किसानों को नहीं मिलता है पीएम किसान योजना का लाभ
- पीएम किसान योजना के नियम व शर्तों के अनुसार निम्न किसानों को स्कीम का फायदा नहीं मिलेगासभी संस्थागत भूमिधारक किसान इस योजना के पात्र नहीं हैं।
- वे किसान परिवार, जिसमें एक या अधिक सदस्य संवैधानिक पदों पर हैं या पहले रहे हों।
- केंद्र/राज्य सरकार के मंत्रालयों/कार्यालयों/विभागों और इसकी क्षेत्रीय इकाइयों के सभी सेवारत या सेवानिवृत्त अधिकारी और कर्मचारी, केंद्रीय या राज्य सार्वजनिक उपक्रमों और सरकार के अधीन संबद्ध कार्यालयों/स्वायत्त संस्थानों के साथ-साथ
स्थानीय निकायों के नियमित कर्मचारी (मल्टी टास्किंग स्टाफ/lV क्लास/ग्रुप डी कर्मचारी को छोड़कर) - पूर्व और वर्तमान मंत्री / राज्य मंत्री, लोकसभा / राज्य सभा / राज्य विधानसभाओं / राज्य विधान
- परिषदों के पूर्व या वर्तमान सदस्य, नगर निगमों के पूर्व और वर्तमान महापौर और जिला पंचायतों के पूर्व और वर्तमान अध्यक्ष।
- पेशेवर निकायों के साथ पंजीकृत डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, चार्टर्ड एकाउंटेंट और आर्किटेक्ट।
- 10,000 रुपये या इससे अधिक की पेंशन पाने वाले सभी सेवानिवृत्त पेंशनभोगी (मल्टी टास्किंग कर्मचारियों को छोड़कर), वे सभी व्यक्ति जिन्होंने पिछले असेसमेंट ईयर में आयकर का भुगतान किया था।
PM Kisan : लिस्ट में कैसे चेक करें अपना नाम
- प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की आधिकारिक वेबसाइट https://pmkisan.gov.in/ पर जाएं।
- फॉर्मर कॉर्नर पर क्लिक करने के बाद एक नया पेज खुल जाएगा।
- यहां beneficiary list के विकल्प का चयन करें। इसके बाद एक फॉर्म खुलेगा।
- इसमें पहले राज्य, फिर जिला, ब्लॉक और गांव का नाम चुनें।
- सभी जानकारी को भरने के बाद get report पर क्लिक करें।
- इस प्रक्रिया को पूरी करते ही आपके सामने आपके गांव के पीएम किसान योजना के लाभार्थियों की लिस्ट खुल जाएगी।
- लिस्ट में अगर आपका नाम है, तो आपके खाते में भी पैसे आएंगे।
सीएम डॉ. मोहन यादव ने भोपाल निवास में किया शस्त्र पूजन, विजयादशमी पर प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विजयादशमी के अवसर पर भोपाल स्थित अपने निवास पर विधिविधान से शस्त्र पूजन किया। उन्होंने विजयादशमी को मर्यादा, साहस, सत्य और शौर्य का प्रतीक बताते हुए प्रदेश और देशवासियों को पर्व की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि “यतो धर्मस्ततो जयः” अर्थात जहां धर्म है, वहीं विजय है।
मुख्यमंत्री ने प्रभु श्रीराम से मध्यप्रदेश में सुशासन, विकास और समृद्धि की निरंतरता तथा जनकल्याण के संकल्पों की सिद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम जी की कृपा से अपना मध्यप्रदेश सुशासन, विकास और समृद्धि के पथ पर निरंतर अग्रसर रहे और जनकल्याण के सभी संकल्प सिद्ध हों।
भगवान श्रीराम की रावण पर विजय
भारतीय परंपरा में विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का पर्व माना जाता है। शस्त्र पूजन की परंपरा के पीछे भगवान श्रीराम, मां दुर्गा और प्राचीन भारतीय युद्ध परंपराओं से जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं हैं। रामायण की मान्यता के अनुसार, विजयादशमी के दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर माता सीता को उसकी कैद से मुक्त कराया था। इस घटना को अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय के रूप में देखा जाता है। शस्त्र पूजन को इसी विजय की परंपरा से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि शस्त्र शक्ति का प्रतीक हैं और उनका उपयोग धर्म, न्याय तथा दूसरों की रक्षा के लिए किया जाना चाहिए।
मां दुर्गा और महिषासुर की कथा
शस्त्र पूजन की एक अन्य प्रमुख धार्मिक मान्यता मां दुर्गा और महिषासुर के युद्ध से जुड़ी है। देवी महात्म्य की कथा के अनुसार, महिषासुर के अत्याचारों से देवताओं को मुक्ति दिलाने के लिए देवी दुर्गा ने उससे युद्ध किया और उसका वध किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवताओं ने देवी को विभिन्न अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए थे। देवी दुर्गा के हाथों में मौजूद त्रिशूल, तलवार, धनुष और अन्य आयुध बुराई का सामना करने वाली शक्ति के प्रतीक माने जाते हैं। विजयादशमी पर शस्त्र पूजन को शक्ति और धर्म की इसी विजय से जोड़कर देखा जाता है।
महाभारत में पांडवों और शमी वृक्ष की कथा
शस्त्र पूजन से जुड़ी मान्यता महाभारत के विराट पर्व की कथा है। इसके अनुसार, अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने अपने अस्त्र-शस्त्र शमी वृक्ष में छिपा दिए थे। अज्ञातवास की अवधि पूरी होने पर अर्जुन ने शमी वृक्ष से अपने शस्त्र वापस निकाले और राजा विराट की गायों की रक्षा के लिए कौरवों की सेना का सामना किया। परंपरा में इस प्रसंग को विजयादशमी पर शस्त्र पूजन और शमी वृक्ष की पूजा से जोड़ा जाता है। शस्त्रों को वापस प्राप्त कर अर्जुन की विजय की कथा इस विश्वास को बल देती है कि यह दिन साहस, पराक्रम और विजय के संकल्प का प्रतीक है।
राजा और योद्धा करते थे शस्त्र पूजन
प्राचीन भारतीय परंपरा में युद्ध पर जाने से पहले राजा और योद्धा अपने अस्त्र-शस्त्रों की पूजा करते थे। शस्त्र उनकी शक्ति के साथ-साथ राज्य की रक्षा और प्रजा के प्रति उनके कर्तव्य का भी प्रतीक थे। विजयादशमी को विजय का पर्व माने जाने के कारण इस दिन शस्त्र पूजन की परंपरा विशेष रूप से प्रचलित हुई। समय के साथ यह परंपरा सैन्य और राजपरिवारों से आगे बढ़कर विभिन्न समुदायों तक पहुंची। आज भी कई स्थानों पर सैनिक, पुलिसकर्मी और पारंपरिक शस्त्रविद्या से जुड़े लोग विजयादशमी पर शस्त्र पूजन करते हैं।
यतो धर्मस्ततो जयः
मर्यादा, साहस, सत्य एवं शौर्य के प्रतीक 'विजयादशमी' के पावन पर्व पर आज भोपाल निवास में विधि-विधान से शस्त्र पूजन किया।
प्रभु श्रीराम जी की कृपा से अपना मध्यप्रदेश सुशासन, विकास और समृद्धि के पथ पर निरंतर अग्रसर रहे और जनकल्याण के सभी संकल्प सिद्ध हों।… pic.twitter.com/c5qvU4pceC
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) October 20, 2026
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