Delhi Air Pollution: पांच हजार या 50000, कौन सा एयर प्यूरीफायर है ज्यादा असरदार?
Delhi Air Pollution: दिल्ली में सर्दियों की शुरुआत होती ही प्रदूषण की समस्या शुरू हो जाती है. ऐसे में लोगों एयर प्यूरीफायर की कीमतों लेकर कंफ्यूज हो जाते हैं कि कोई सा एयर प्यूरीफायर अच्छा होता है. क्योंकि बाजार में 5,000 से 50,000 रुपये तक की कीमत वाले अलग-अलग एयर प्यूरीफायर मौजूद हैं इनमें कितना फर्क होता है- जैसे कि HEPA फिल्टर और कार्बन फिल्टर वाले - और क्या ये वाकई दिल्ली के प्रदूषण से निपटने के लिए काफी हैं? खासकर जब हम घर के अंदर की बात करते हैं, तो इस पर चर्चा करने के लिए हमारे साथ डॉ. देशराज मौजूद हैं. वे भारत सरकार के साथ एक पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट हैं आज हम उनसे जानेंगे एयर प्यूरीफायर के बारे में कि कौन सा एयर प्यूरीफायर ठीक होता है सस्ता या महंगा. देखें ये रिपोर्ट...
वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत: वरिष्ठ अधिकारी
नई दिल्ली, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले आर्थिक मामलों के विभाग की सचिव अनुराधा ठाकुर ने मंगलवार को कहा कि भारत इस बात का एक प्रभावशाली उदाहरण है कि कैसे मजबूत व्यापक आर्थिक आधार वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अर्थव्यवस्था को मजबूती और निरंतर विकास प्रदान कर सकता है।
आरबीआई के ‘संवाद 2026’ के दूसरे दिन ‘वित्तीय स्थिरता’ विषय पर विशेष संबोधन देते हुए ठाकुर ने कहा कि भारत की राजकोषीय स्थिति विश्वसनीय रही है और लचीली मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारण व्यवस्था ने महंगाई संबंधी अपेक्षाओं को स्थिर बनाए रखा है।
वित्त मंत्रालय की अधिकारी ने कहा, “भारत मौजूदा चुनौतीपूर्ण वैश्विक हालातों का सामना व्यापक आर्थिक स्थिरता की मजबूत स्थिति से कर रहा है।”
पैनल चर्चा में आरबीआई की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने कहा कि वित्तीय स्थिरता अब अपने आप में एक नीतिगत उद्देश्य बन गई है। नीतिगत दृष्टिकोण व्यक्तिगत संस्थानों से हटकर पूरी वित्तीय प्रणाली पर केंद्रित हो गया है, जिसमें बैंकों के साथ-साथ गैर-बैंकिंग संस्थान भी शामिल हैं।
इस पैनल में शामिल भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) के अध्यक्ष अजय सेठ, भूटान की रॉयल मॉनेटरी अथॉरिटी की गवर्नर यांगचेन त्शोग्येल, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अथानासियोस वाम्वाकिडिस और इनवेस्को के पॉल जैक्सन भी शामिल थे।
पैनल के सदस्यों ने कहा कि अब ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि अब संकट पहले की तुलना में अधिक तेजी से आ रहे हैं और उनकी तीव्रता भी बढ़ रही है।
वित्तीय क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करते समय वित्तीय पुनर्गठन के दुष्प्रभावों से जुड़ी पिछली आर्थिक मंदियों और संकटों की सीख को नहीं भूलना चाहिए। इसके साथ ही, जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न जोखिमों, गैर-बैंक वित्तीय मध्यस्थों और फिनटेक कंपनियों की बढ़ती भूमिका तथा भू-राजनीति के मौजूदा असहयोगात्मक दौर को भी नीतिगत आकलन में उचित महत्व दिया जाना चाहिए।
पैनल के सदस्यों ने आगे कहा कि आंकड़ों को साझा करने में मौजूद कमियों और एआई एजेंटों के बढ़ते इस्तेमाल से उत्पन्न चिंताओं का समाधान किया जाना चाहिए। साथ ही, केवल बैंकों की बैलेंस शीट ही नहीं, बल्कि कंपनियों और परिवारों की वित्तीय स्थिति को भी झटकों का सामना करने में सक्षम बनाने पर ध्यान देना जरूरी है।
केंद्रीय बैंकों के लिए आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी ‘संवाद 2026’ का उद्घाटन सोमवार को आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने किया था। इस अवसर पर उन्होंने स्वागत भाषण दिया, जबकि केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुख्य संबोधन दिया था।
दो दिवसीय इस आयोजन में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों के गवर्नर, वरिष्ठ नीति निर्माता, अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि और विषय विशेषज्ञ एक साथ जुटे हैं। इसमें वैश्विक वित्तीय प्रणाली के सामने उभरती चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा की जा रही है।
--आईएएनएस
एबीएस
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