Vijayadashami 2026: विजयदशमी पर करें भगवान राम के नाम का जाप, राम जी की आरती और चालीसा का पाठ, हर काम में मिलेगी सफलता
Vijayadashami 2026: हिंदू धर्म में आज यानी 20 अक्टूबर 2026 को मंगलवार के दिन दशहरे का पर्व मनाया जा रहा है. इस पर्व को अधर्म पर धर्म की विजय का पर्व माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था. इसलिए, इस पर्व को विजयादशमी भी कहते हैं. पौराणिक ग्रंथ रामायण के अनुसार, विजयादशमी के पर्व पर पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है. इसलिए, इस दिन पर भगवान राम जी आरती करनी चाहिए, उनकी चालीसा पढ़नी चाहिए और मंत्रों का जाप करना चाहिए.
राम नाम का जाप करने के लाभ
हिंदू धर्म में राम नाम का जाप करने से मानसिक, आध्यात्मिक और शारीरिक रूप से कई प्रकार के लाभ मिलते हैं. राम नाम का जाप करने से विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने के समान फल प्राप्त होता है. ऐसा माना जाता है कि राम नाम के निरंतर जाप करने से अनजाने में किए गए जन्म-जन्मांतर के पाप मिट जाते हैं. आपकी आत्मा की शुद्धि होती है. जीवन के अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है. वैज्ञानिक लाभों के अनुसार, भगवान राम के नाम का जाप करने से बीपी और रेस्पिरेटरी इश्यूज नियंत्रित रहते हैं. स्ट्रैस हार्मोन्स भी रिलीज होते हैं.
भगवान राम के प्रमुख नाम
- 1.श्रीराम
- 2.रामचंद्र
- 3.रामभद्र
- 4.शाश्वत
- 5.राजीवलोचन
- 6.श्रीमान् राजेंद्र
- 7.जानकीवल्लभ
- 8.जैत्र
- 9.मर्यादा पुरुषोत्तम
- 10.जनार्दन
- 11.राघव
ये भी पढ़ें- Aaj Ka Rashifal 20 October 2026: दशहरा के दिन श्रवण नक्षत्र रहेगा, शूल योग से राशियों को लाभ, पढ़ें आज का राशिफल
भगवान श्रीराम की आरती (Lord Shree Rama Aarti Lyrics in Hindi)
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन,हरण भवभय दारुणम्।
नव कंज लोचन, कंज मुख करकंज पद कंजारुणम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन॥
कन्दर्प अगणित अमित छवि,नव नील नीरद सुन्दरम्।
पट पीत मानहुं तड़ित रूचि-शुचिनौमि जनक सुतावरम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन॥
भजु दीनबंधु दिनेशदानव दैत्य वंश निकन्दनम्।
रघुनन्द आनन्द कन्द कौशलचन्द्र दशरथ नन्द्नम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन॥
सिर मुकुट कुंडल तिलकचारू उदारु अंग विभूषणम्।
आजानुभुज शर चाप-धर,संग्राम जित खरदूषणम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन॥
इति वदति तुलसीदास,शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
मम हृदय कंज निवास कुरु,कामादि खल दल गंजनम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन॥
मन जाहि राचेऊ मिलहिसो वर सहज सुन्दर सांवरो।
करुणा निधान सुजानशील सनेह जानत रावरो॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन॥
एहि भांति गौरी असीससुन सिय हित हिय हरषित अली।
तुलसी भवानिहि पूजी पुनि-पुनिमुदित मन मन्दिर चली॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन॥
श्री राम चालीसा (Shree Rama Chalisa Lyrics in Hindi)
चौपाई
श्री रघुबीर भक्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी॥
निशि दिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम भक्त और नहीं होई॥
ध्यान धरें शिवजी मन मांही। ब्रह्मा, इन्द्र पार नहीं पाहीं॥
दूत तुम्हार वीर हनुमाना। जासु प्रभाव तिहुं पुर जाना॥
जय, जय, जय रघुनाथ कृपाला। सदा करो संतन प्रतिपाला॥
तुव भुजदण्ड प्रचण्ड कृपाला। रावण मारि सुरन प्रतिपाला॥
तुम अनाथ के नाथ गोसाईं। दीनन के हो सदा सहाई॥
ब्रह्मादिक तव पार न पावैं। सदा ईश तुम्हरो यश गावैं॥
चारिउ भेद भरत हैं साखी। तुम भक्तन की लज्जा राखी॥
गुण गावत शारद मन माहीं। सुरपति ताको पार न पाहिं॥
नाम तुम्हार लेत जो कोई। ता सम धन्य और नहीं होई॥
राम नाम है अपरम्पारा। चारिहु वेदन जाहि पुकारा॥
गणपति नाम तुम्हारो लीन्हो। तिनको प्रथम पूज्य तुम कीन्हो॥
शेष रटत नित नाम तुम्हारा। महि को भार शीश पर धारा॥
फूल समान रहत सो भारा। पावत कोऊ न तुम्हरो पारा॥
भरत नाम तुम्हरो उर धारो। तासों कबहूं न रण में हारो॥
नाम शत्रुहन हृदय प्रकाशा। सुमिरत होत शत्रु कर नाशा॥
लखन तुम्हारे आज्ञाकारी। सदा करत सन्तन रखवारी॥
ताते रण जीते नहिं कोई।युद्ध जुरे यमहूं किन होई॥
महालक्ष्मी धर अवतारा। सब विधि करत पाप को छारा॥
सीता राम पुनीता गायो। भुवनेश्वरी प्रभाव दिखायो॥
घट सों प्रकट भई सो आई। जाको देखत चन्द्र लजाई॥
जो तुम्हरे नित पांव पलोटत। नवो निद्धि चरणन में लोटत॥
सिद्धि अठारह मंगलकारी। सो तुम पर जावै बलिहारी॥
औरहु जो अनेक प्रभुताई। सो सीतापति तुमहिं बनाई॥
इच्छा ते कोटिन संसारा। रचत न लागत पल की बारा॥
जो तुम्हरे चरणन चित लावै। ताकी मुक्ति अवसि हो जावै॥
सुनहु राम तुम तात हमारे। तुमहिं भरत कुल पूज्य प्रचारे॥
तुमहिं देव कुल देव हमारे। तुम गुरु देव प्राण के प्यारे॥
जो कुछ हो सो तुमहिं राजा। जय जय जय प्रभु राखो लाजा॥
राम आत्मा पोषण हारे। जय जय जय दशरथ के प्यारे॥
जय जय जय प्रभु ज्योति स्वरुपा। नर्गुण ब्रहृ अखण्ड अनूपा॥
सत्य सत्य जय सत्यव्रत स्वामी। सत्य सनातन अन्तर्यामी॥
सत्य भजन तुम्हरो जो गावै। सो निश्चय चारों फल पावै॥
सत्य शपथ गौरीपति कीन्हीं। तुमने भक्तिहिं सब सिधि दीन्हीं॥
ज्ञान हृदय दो ज्ञान स्वरुपा। नमो नमो जय जगपति भूपा॥
धन्य धन्य तुम धन्य प्रतापा। नाम तुम्हार हरत संतापा॥
सत्य शुद्ध देवन मुख गाया। बजी दुन्दुभी शंख बजाया॥
सत्य सत्य तुम सत्य सनातन। तुम ही हो हमरे तन-मन धन॥
याको पाठ करे जो कोई। ज्ञान प्रकट ताके उर होई॥
आवागमन मिटै तिहि केरा। सत्य वचन माने शिव मेरा॥
और आस मन में जो होई। मनवांछित फल पावे सोई॥
तीनहुं काल ध्यान जो ल्यावै। तुलसी दल अरु फूल चढ़ावै॥
साग पत्र सो भोग लगावै। सो नर सकल सिद्धता पावै॥
अन्त समय रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरि भक्त कहाई॥
श्री हरिदास कहै अरु गावै। सो बैकुण्ठ धाम को पावै॥
दोहा
सात दिवस जो नेम कर, पाठ करे चित लाय।
हरिदास हरि कृपा से, अवसि भक्ति को पाय॥
राम चालीसा जो पढ़े, राम चरण चित लाय।
जो इच्छा मन में करै, सकल सिद्ध हो जाय॥
भगवान राम के प्रमुख मंत्र
- ऊं श्री रामाय: नम
- ऊं रां रामाय नम:
- श्री राम जय राम जय जय राम
- ऊं दाशरथाय विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि। तन्नो रामः प्रचोदयात्॥
- ऊं आपदामपहर्तारम् दातारम् सर्वसम्पदाम्। लोकाभिरामम् श्रीरामम् भूयो-भूयो नमाम्यहम्॥
ये भी पढ़ें- Dussehra Ravan Dahan 2026: आज दशहरा के शुभ अवसर पर जानें कब होगा रावण दहन? नोट करें शुभ मुहूर्त और महत्व
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation
BBC News








