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दशहरे का सोना कहलाने वाला कचनार आयुर्वेद में भी खास, जानिए इसके औषधीय गुण

नई दिल्ली, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत में त्योहार केवल पूजा-पाठ और उत्सव मनाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे कई रोचक परंपराएं और प्रकृति से जुड़े संदेश भी छिपे हैं। दशहरा यानी विजयादशमी भी ऐसा ही एक पर्व है। इस दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाने के साथ कई जगहों पर एक-दूसरे को कचनार के पत्ते देकर सोना पत्ती की परंपरा निभाई जाती है। महाराष्ट्र में यह परंपरा खास तौर पर प्रचलित है, जहां कचनार के पत्तों को सोने का प्रतीक मानकर परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों को दिया जाता है। दिलचस्प बात यह है कि कचनार नाम से पहचाना जाने वाला पेड़ आयुर्वेद में भी अपनी खास पहचान रखता है।

कचनार एक ऐसा पेड़ है, जिसका इस्तेमाल पारंपरिक आयुर्वेद में लंबे समय से किया जाता रहा है। इसकी छाल, फूल और अन्य हिस्सों का उल्लेख विभिन्न पारंपरिक औषधीय प्रयोगों में मिलता है। आयुर्वेद में कचनार को विशेष रूप से कफ और पित्त से जुड़ी समस्याओं के संदर्भ में देखा जाता है। इसकी छाल से कचनार गुग्गुलु नाम का एक पारंपरिक आयुर्वेदिक योग भी तैयार किया जाता है। इसका इस्तेमाल कुछ स्थितियों में ग्रंथियों की सूजन और गांठों से जुड़ी समस्याओं के लिए किया जाता रहा है। हालांकि, इसका सेवन विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए।

आयुर्वेद में कचनार के कसैले गुणों का भी उल्लेख मिलता है। पारंपरिक तौर पर इसका इस्तेमाल त्वचा संबंधी कुछ समस्याओं में किया जाता रहा है। यह रक्त को शुद्ध करके कील-मुहासे, दाद-खुजली और फोड़े-फुंसियों जैसी समस्याओं को खत्म करता है।

कचनार में प्राकृतिक एंटी-ट्यूमर और शोथहर गुण होते हैं। यह शरीर में किसी भी प्रकार की अवांछित गांठ, रसौली या सिस्ट (पीसीओएस/पीसीओडी) को घोलने में मदद करता है। यह बवासीर, आंतों के अल्सर और अत्यधिक रक्तस्राव को रोकने में अत्यंत लाभकारी है। इसके फूल और छाल का काढ़ा पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है।

हालांकि, किसी भी समस्या में कचनार या अन्य किसी का इस्तेमाल करने से पहले योग्य आयुर्वेद विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहद जरूरी है।

--आईएएनएस

पीआईएम/डीकेपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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भारत-न्यूजीलैंड एफटीए लागू: किसानों की सुरक्षा के साथ एमएसएमई को वैश्विक बाजारों तक बड़ी पहुंच

नई दिल्ली, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) मंगलवार से लागू हो गया है। यह समझौता भारतीय एमएसएमई, किसानों और श्रम-प्रधान क्षेत्रों को न्यूजीलैंड के बाजार में व्यापक पहुंच प्रदान करेगा। साथ ही भारतीय निर्यात को 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच मिलेगी, जबकि डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को पूरी तरह संरक्षण दिया गया है।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारतीय निर्यात को 100 प्रतिशत ड्यूटी-फ्री पहुंच मिलने से एमएसएमई, किसानों, महिलाओं, युवाओं और श्रम-प्रधान उद्योगों के लिए नए अवसर खुलेंगे।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, यह समझौता हमारे पेशेवरों के लिए भी नए अवसरों के द्वार खोलेगा, जबकि भारत के मूलभूत हित पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।

गोयल ने कहा कि भारतीय किसानों को फलों, सब्जियों, मसालों और अन्य कृषि उत्पादों के लिए अधिक बाजार पहुंच मिलेगी। इसके साथ ही उत्पादकता बढ़ाने, किसानों की आय मजबूत करने और आजीविका को बेहतर बनाने के लिए सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि डेयरी सहित संवेदनशील क्षेत्रों को पूरी तरह संरक्षित रखा गया है और किसानों के कल्याण को इस समझौते के केंद्र में रखा गया है।

मंत्री ने कहा, विजयादशमी के शुभ अवसर पर भारत और न्यूजीलैंड अपनी आर्थिक साझेदारी के नए अध्याय की शुरुआत कर रहे हैं। भारत-न्यूजीलैंड एफटीए का लागू होना दोनों देशों के लिए एक सच्ची विजय है।

गोयल ने यह भी कहा कि न्यूजीलैंड अब मेड इन इंडिया जेसीबी मशीनों का उपयोग करेगा। उन्होंने महाराष्ट्र के पुणे में निर्मित पहली जेसीबी मशीन के न्यूजीलैंड निर्यात को हरी झंडी दिखाते हुए कहा कि यह समझौता भारतीय विनिर्माण क्षेत्र के लिए नए अवसर पैदा कर रहा है।

इससे पहले, वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि व्यापार समझौते केवल शुल्क कम करने तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे व्यापार, निवेश और आपूर्ति श्रृंखला के एकीकरण को बढ़ावा देने वाली गहरी और दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारियां स्थापित करते हैं।

उन्होंने कहा, एफटीए का उद्देश्य मजबूत आर्थिक साझेदारी बनाना है।

अग्रवाल ने कहा कि ऐसे समझौते नियामकीय मंजूरियों की प्रक्रिया को तेज करते हैं और दोनों देशों के बीच कारोबार सुगमता को भी बढ़ाते हैं।

सरकार का मानना है कि भारत-न्यूजीलैंड एफटीए द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती देगा और आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार को दोगुना करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, यह समझौता कृषि, विनिर्माण, बुनियादी ढांचा और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में न्यूजीलैंड से भारत में 20 अरब डॉलर तक के निवेश का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।

सेवा क्षेत्र के लिए भी यह समझौता महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी, पेशेवर सेवाएं, निर्माण, पर्यटन और ऑडियो-विजुअल सेवाओं के क्षेत्र में भारतीय कंपनियों को न्यूजीलैंड के बाजार में व्यापक अवसर प्राप्त होंगे।

भारतीय फार्मास्यूटिकल और मेडिकल डिवाइस निर्यातकों को भी इसका लाभ मिलेगा, क्योंकि न्यूजीलैंड अब वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त नियामकों द्वारा जारी निरीक्षण मंजूरियों को स्वीकार करेगा। इससे अनुपालन प्रक्रिया कम होगी और बाजार तक पहुंच तेज हो सकेगी।

--आईएएनएस

डीबीपी

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