CJP नेता सौरव-आशुतोष केस की जांच क्राइम ब्रांच करेगी:कोर्ट ने कहा- दोनों कानून का सम्मान नहीं करते, भरोसा करना मुश्किल; हिरासत 2 दिन बढ़ाई
दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका के खिलाफ दर्ज मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। दोनों पर आरोप है कि वे निजी परिसर से होते हुए जंतर-मंतर पहुंचे, जहां प्रदर्शन पर रोक लगाई गई थी। इससे पहले दास और रांका की न्यायिक हिरासत सोमवार को दो दिन बढ़ा दी गई। सोमवार देर रात स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की ऑर्डर कॉपी सामने आई। मजिस्ट्रेट रितु राज ने कहा कि दास और रांका के व्यवहार से लगता है कि वे कानून का सम्मान नहीं करते। इससे शांति और व्यवस्था बिगड़ने का खतरा भी है। उन्होंने कहा कि दोनों कार्यकर्ताओं के दोबारा ऐसा नहीं करने के भरोसे पर विश्वास करना मुश्किल है। प्रतिबंधित या परमिशन न मिलने वाली जगहों पर बार-बार विरोध प्रदर्शन की अपील करना उनके व्यवहार को दर्शाता है। CJP नेता रांका और दास 14 अक्टूबर से तिहाड़ जेल में बंद हैं। दोनों को बुधवार को फिर पेश किया जाएगा। दोनों पर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान प्रतिबंधों के उल्लंघन का आरोप है। वहीं, CJP ने रिहाई में जानबूझकर देरी का आरोप लगाया है। जमानतदारों की पहचान पर उठे सवाल मजिस्ट्रेट ने दोनों नेताओं की ओर से पेश किए गए जमानतदारों की जांच में खामियां बताईं। एक जमानतदार के बांड और पहचान पत्र की तस्वीरों में अंतर मिला। वह दूसरा पहचान पत्र भी नहीं दिखा सका। वहीं, दूसरा जमानतदार उस व्यक्ति के बारे में बुनियादी जानकारी नहीं दे पाया, जिसके लिए वह जमानत लेने आया था। CJP नेताओं की गिरफ्तारी की टाइमलाइन 10 अक्टूबर: जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले दीपके-रांका-दास हिरासत में कॉकरोच जनता पार्टी SIR के विरोध और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही है। पार्टी ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन बुलाया था। उस दिन सुबह CJP फाउंडर अभिजीत दीपके, सौरव व आशुतोष को दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट से ही पुलिस ने हिरासत में लिया था। तीनों को 11 अक्टूबर को दिल्ली कैंट की विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया गया था। इसके बाद उन्हें 50-50 हजार रुपए के जमानती मुचलके पर रिहा कर दिया गया। 13 अक्टूबर: दास और रांका जंतर-मंतर पहुंचे जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की लिस्ट से हटाने के एक दिन बाद आशुतोष और सौरव वहां तिरंगा लेकर पहुंचे थे। उनके साथ कुछ प्रदर्शनकारी भी थे। पुलिस ने सभी को हिरासत में लिया था। 16-17 अक्टूबर: दीपके को हिरासत के 24 घंटे में जमानत आशुतोष और सौरव को हिरासत में लिए जाने के विरोध में CJP ने 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में लहरा दो तिरंगा रैली बुलाई थी। दीपके को रैली से पहले हिरासत में ले लिया गया था। इसके बाद उन्हें 50 हजार रुपए के बेल बॉन्ड पर 17 अक्टूबर को जमानत मिली थी। CJP के तिरंगा मार्च पर दिल्ली पुलिस की 3 FIR दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार के तिरंगा मार्च को लेकर शनिवार को कम से कम 3 FIR दर्ज कीं। इनमें CJP संस्थापक अभिजीत दीपके, AISA अध्यक्ष नेहा बोरा और AAP नेताओं समेत कई लोगों के नाम हैं। FIR कनॉट प्लेस और मंडी हाउस थानों में दर्ज की गई हैं। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर रोक के आदेश तोड़ने, सड़क के बीच मार्च करने और पुलिस का काम रोकने का आरोप लगाया है। कॉकरोच पार्टी ने जंतर-मंतर पर 36 दिन प्रदर्शन किया था कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जून से 25 जुलाई तक NEET पेपर लीक मामले में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए प्रदर्शन किया था। 36 दिन तक चले इस प्रदर्शन के दौरान एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भी भूख हड़ताल पर बैठे थे। 20 जुलाई को CJP ने संसद तक का मार्च भी किया था। 25 जुलाई को प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रदर्शन खत्म हो गया था। ---------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… CJP का दिल्ली पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम, कहा- प्रदर्शन की इजाजत नहीं मिली तो फिर आंदोलन करेंगे कॉकरोच जनता पार्टी ने दिल्ली पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उसने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की तारीख नहीं मिली तो फिर आंदोलन करेंगे। CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास सोमवार को प्रदर्शन की अनुमति मांगने पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। पूरी खबर पढ़ें…
दिल्ली में रावण के साथ कॉकरोच का पुतला जलेगा:इंदौर में 111, कोटा में 105 फीट ऊंचा रावण; 200 से जारी परंपरा
देशभर में आज दशहरा मनाया जाएगा। इंदौर में 111 फीट, कोटा और भोपाल में 105-105 फीट ऊंचे रावण का दहन होगा। रायपुर और उज्जैन में 101-101 फीट के पुतले जलाए जाएंगे। दिल्ली में रावण के साथ 30 फीट ऊंचा कॉकरोच भी जलेगा। देश में रावण दहन की परंपरा 200 साल से भी पुरानी है। मान्यता है कि 17वीं शताब्दी में तुलसीदास के शिष्य मेघा भगत ने वाराणसी में रामलीला शुरू की थी। हालांकि, ऐतिहासिक प्रमाण 1834 के ब्रिटिश कलाकार जेम्स प्रिन्सेप के एक चित्र में मिलता है। इसमें रामनगर में बनारस के राजा के सामने रामलीला का आयोजन और रावण दहन को दिखाया गया है। यह चित्र लंदन की ब्रिटिश लाइब्रेरी में मौजूद है। कहीं 5 हजार किलो का रावण, कहीं 250 फीट लंबी लंका मध्य प्रदेश: इंदौर में 111 फीट, भोपाल में 105 फीट का रावण मध्य प्रदेश में इंदौर में 111 फीट, भोपाल के कोलार में 105 फीट और उज्जैन में 101 फीट ऊंचे रावण का दहन होगा। इंदौर में 250 फीट लंबी लंका और डेढ़ घंटे की आतिशबाजी आकर्षण होगी। भोपाल में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले बनाने में करीब 20 लाख रुपए खर्च हुए हैं। उज्जैन में 45 मिनट आतिशबाजी होगी। मंदसौर में 80 फीट के रावण की आंखें झपकेंगी, गर्दन घूमेगी और तलवार वाला हाथ चलेगा। जबलपुर में 75 फीट और ग्वालियर में 65 फीट ऊंचे रावण का दहन होगा। ग्वालियर में राम जुलूस और 30 मिनट आतिशबाजी भी होगी। राजस्थान: 105 फीट का रावण, 70-70 फीट के कुंभकर्ण-मेघनाद कोटा में दशहरा मेले की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। यहां 105 फीट ऊंचे रावण का पुतला बनाया गया है, जिसका वजन करीब 5 हजार किलो है। कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले 70-70 फीट ऊंचे हैं। आतिशबाजी पर 4 लाख रुपए से ज्यादा खर्च किए गए हैं। मंगलवार शाम 5:30 बजे गढ़ पैलेस से लक्ष्मीनारायण जी की सवारी निकलेगी। यह दशहरा मैदान पहुंचेगी, जहां रावण दहन होगा। छत्तीसगढ़: 101 फीट का रावण, रेलवे ट्रैक के पास 250 जवान तैनात रायपुर के WRS मैदान में 101 फीट ऊंचे रावण का दहन होगा। बोरियाखुर्द में रावण के साथ कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले भी जलाए जाएंगे। इस बार पुतले बनाने की लागत में 15 से 20% की बढ़ोतरी हुई है। बांस, रंगीन कागज, कपड़े, पेंट और सजावट के दूसरे सामान की कीमतें बढ़ने से लागत बढ़ी है। कारीगर विक्रम नेताम का परिवार करीब 50 साल से पुतले बना रहा है। उनके मुताबिक, 28 फीट ऊंचे रावण के पुतले की कीमत 30 से 32 हजार रुपए तक है। देवनगर चौक पर पुतले बेचने वाली कविता पिछले 15-16 साल से यह काम कर रही हैं। उनके यहां 1 से 20 फीट तक के पुतले मिलते हैं। दिल्ली: रावण के साथ जलेगा 30 फीट का कॉकरोच दिल्ली के पीतमपुरा में श्री केशव रामलीला कमेटी इस दशहरे पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों के साथ 30 फीट ऊंचे कॉकरोच का पुतला भी जलाएगी। कमेटी ने घरों, आसपास के इलाकों और समाज से गंदगी खत्म करने का संदेश देने के लिए यह फैसला लिया है। कमेटी के अध्यक्ष अशोक गोयल देवराहा के मुताबिक, इससे पहले भी देश की समस्याओं को दिखाने के लिए अलग-अलग प्रतीकात्मक पुतले जलाए जाते रहे हैं। बिहार: बारिश से बचाने के लिए पुतलों में स्टील पाइप बिहार की राजधानी पटना के गांधी मैदान में रावण दहन होगा। इस बार रावण का पुतला 90 फीट, मेघनाद का 85 फीट और कुंभकर्ण का 80 फीट ऊंचा बनाया गया है। बारिश से पुतलों को बचाने के लिए इनके निर्माण में स्टील पाइप का इस्तेमाल किया गया है। आयोजन में मां पटन देवी के विग्रह की झलक भी देखने को मिलेगी। भीड़ को देखते हुए महिलाओं के लिए अलग गैलरी बनाई गई है। आयोजकों ने लोगों से बच्चों की जेब में नाम, पता और मोबाइल नंबर लिखी पर्ची रखने की अपील की है। झारखंड: रांची में 80 फीट का रावण, दो मंजिला लंका तैयार झारखंड की राजधानी रांची के मोराबादी मैदान में 80 फीट ऊंचा रावण का पुतला बनाया गया है। यहां दो मंजिला लंका भी तैयार की गई है और आतिशबाजी का खास इंतजाम किया गया है। वहीं, अरगोड़ा मैदान में रावण का पुतला 55 फीट और कुंभकर्ण-मेघनाथ के पुतले 50-50 फीट ऊंचे हैं। यहां भी आतिशबाजी होगी। एमपी के इस गांव का नाम रावण, पुतला दहन की बजाय करते हैं पूजा मध्य प्रदेश के विदिशा जिले की नटेरन तहसील में रावण के नाम पर गांव हैं। यहां दशहरे पर रावण के पुतले का दहन नहीं होता। बल्कि ग्रामीण रावण को ग्राम देवता मानकर ‘रावण बाबा’ के रूप में पूजते हैं। गांव के प्राचीन परमारकालीन मंदिर में रावण की 12 फीट लंबी लेटी हुई प्रतिमा है, जहां रोज पूजा और आरती होती है। दशहरे पर रामायण पाठ, भजन और सामूहिक भोज आयोजित किया जाता है। मैसूर और कुल्लू में रावण दहन नहीं, अलग परंपराएं 1. मैसूर, कर्नाटक: देवी चामुंडेश्वरी की विजय का उत्सव मैसूर में दशहरे को ‘नाडहब्बा’ कहा जाता है। यहां यह त्योहार देवी चामुंडेश्वरी की महिषासुर पर विजय के रूप में मनाया जाता है। विजयादशमी पर प्रसिद्ध जंबू सवारी निकाली जाती है। इसमें सजे-धजे हाथियों पर देवी चामुंडेश्वरी की स्वर्ण प्रतिमा रखी जाती है। शोभायात्रा में पारंपरिक झांकियां, लोकनृत्य और संगीत भी शामिल होते हैं। इस दौरान मैसूर पैलेस को हजारों लाइटों से सजाया जाता है। यहां उत्तर भारत की तरह रावण का पुतला जलाने के बजाय शाही परंपराओं और देवी की विजय का उत्सव मनाया जाता है। 2. कुल्लू, हिमाचल प्रदेश: सात दिन चलता है दशहरा उत्सव कुल्लू के ढालपुर मैदान में दशहरा उत्सव विजयादशमी के दिन शुरू होकर सात दिनों तक चलता है। यहां रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले नहीं जलाए जाते। उत्सव में आसपास के गांवों से सैकड़ों देवी-देवताओं की पालकियां और रथ पहुंचते हैं। वे भगवान रघुनाथ के दर्शन करते हैं। उत्सव के अंतिम दिन ब्यास नदी के किनारे घास और लकड़ियों से बनी संरचना में आग लगाई जाती है। इसे प्रतीकात्मक ‘लंका दहन’ कहा जाता है। इसके बाद भगवान रघुनाथ की विदाई के साथ उत्सव संपन्न होता है। दुनिया में पुतला दहन की परंपरा कैसे शुरू हुई? दुनिया में पुतला जलाने की परंपरा कब और कहां शुरू हुई, इसका कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है। पुराने समय में धार्मिक अनुष्ठानों और खास मौकों पर इंसान जैसी आकृतियों का इस्तेमाल किया जाता था। कई समाजों में इन पुतलों को बुराई, दुश्मन या दुर्भाग्य का प्रतीक मानकर जलाया या नष्ट किया जाता था। समय के साथ यह परंपरा धार्मिक उत्सवों, मौसमी त्योहारों और राजनीतिक विरोध का तरीका भी बनी। 1328 में रोम में जलाया गया पोप का पुतला 14वीं सदी में पवित्र रोमन साम्राज्य के सम्राट लुई चतुर्थ और पोप जॉन 22वें के बीच सत्ता को लेकर विवाद था। इसी दौरान, 1328 में लुई चतुर्थ के रोम पहुंचने पर पोप का पुतला जलाए जाने का उल्लेख मिलता है। इसे पोप की सत्ता के विरोध में की गई प्रतीकात्मक कार्रवाई माना जाता है। पोप जॉन 22वें और सम्राट लुई चतुर्थ के बीच संघर्ष का जिक्र कैथोलिक एनसाइक्लोपीडिया और 1911 की एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका में भी मिलता है। यूरोप में सदियों पुरानी है पुतले जलाने की परंपरा यूरोप में सदियों से धार्मिक और मौसमी त्योहारों पर आग जलाने की परंपरा रही है। कुछ जगहों पर इन आयोजनों में प्रतीकात्मक आकृतियां भी जलाई जाती थीं। इतिहासकार जेम्स फ्रेजर ने अपनी किताब द गोल्डन बाउ में इस तरह की परंपराओं का जिक्र किया है। हालांकि, इन परंपराओं की शुरुआत कब और कहां हुई, इसे लेकर स्पष्ट प्रमाण नहीं हैं। ब्रिटेन में 17वीं सदी में शुरू हुआ पुतला जलाने का चलन 5 नवंबर 1605 को ब्रिटेन में संसद को बारूद से उड़ाने की साजिश नाकाम कर दी गई थी। इस साजिश में गाइ फॉक्स भी शामिल था। इसके बाद 1606 से हर साल 5 नवंबर को इस घटना की याद में अलाव जलाए जाने लगे। ब्रिटेन की संसद के मुताबिक, राजा चार्ल्स प्रथम के शासनकाल (1625-1649) में पोप या शैतान के पुतले जलाने का चलन शुरू हुआ। बाद में गाइ फॉक्स का पुतला जलाना भी इस आयोजन का हिस्सा बन गया। यह परंपरा आज भी ब्रिटेन में जारी है।
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