टेलीग्राम को एप्पल के अनुप्रयोग भंडार से कुछ समय के लिए हटाए जाने की घटना ने एक बार फिर डिजिटल मंचों पर सामग्री की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज कर दी है। हालांकि टेलीग्राम की ओर से त्वरित कार्रवाई किए जाने के बाद एप्पल ने उसी दिन इस अनुप्रयोग को दोबारा उपलब्ध करा दिया। पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि बड़े संचार मंचों पर आपत्तिजनक सामग्री की निगरानी किस तरह की जानी चाहिए।
मौजूद जानकारी के अनुसार, एप्पल ने बताया कि उसके समीक्षा तंत्र को एक उपयोगकर्ता द्वारा बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी प्रतिबंधित सामग्री साझा किए जाने की जानकारी मिली थी। कंपनी की नीतियों के तहत इस प्रकार की सामग्री पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसी कारण एहतियात के तौर पर टेलीग्राम को कुछ समय के लिए अनुप्रयोग भंडार से हटा दिया गया।
बता दें कि टेलीग्राम ने मामले की जानकारी मिलते ही संबंधित सामग्री को तुरंत हटाया और उसे साझा करने वाले उपयोगकर्ता के खाते पर स्थायी रोक लगा दी। इसके बाद एप्पल ने दोबारा समीक्षा की और अनुप्रयोग को उसी दिन फिर से अपने अनुप्रयोग भंडार में बहाल कर दिया।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब टेलीग्राम को इस तरह की कार्रवाई का सामना करना पड़ा हो। वर्ष 2018 में भी एप्पल ने आपत्तिजनक सामग्री मिलने के कारण कुछ समय के लिए इस अनुप्रयोग को हटा दिया था। उस समय टेलीग्राम के संस्थापक पावेल दुरोव ने सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने का भरोसा दिया था, जिसके बाद सेवा बहाल कर दी गई थी।
टेलीग्राम का कहना है कि बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी किसी भी सामग्री के प्रति उसकी शून्य सहनशीलता की नीति है। कंपनी के अनुसार, केवल इस वर्ष ही उसने ऐसी सामग्री से जुड़े लगभग तीन लाख अड़तीस हजार समूहों और माध्यमों को बंद किया है। कंपनी का दावा है कि वह पहचान करने वाली आधुनिक प्रणालियों का उपयोग कर इस तरह की सामग्री के प्रसार को रोकने का लगातार प्रयास कर रही है।
इस घटनाक्रम पर एपिक गेम्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टिम स्वीनी ने भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी एक उपयोगकर्ता द्वारा साझा की गई अवैध सामग्री के आधार पर पूरे अनुप्रयोग को हटाया जाता है, तो इतने बड़े स्तर पर चलने वाले किसी भी संचार मंच के लिए काम करना कठिन हो सकता है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या यही मानक सभी अन्य संदेश सेवा अनुप्रयोगों पर भी समान रूप से लागू किया जाएगा।
मौजूद जानकारी के अनुसार, हाल के महीनों में टेलीग्राम कई देशों के नियामकों की निगरानी में रहा है। अप्रैल में ब्रिटेन के संचार नियामक ऑफकॉम ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री के प्रसार को लेकर जांच शुरू की थी। हालांकि टेलीग्राम ने इन आरोपों से साफ इनकार करते हुए कहा था कि वर्ष 2018 के बाद से उसने पहचान करने वाली तकनीकों की मदद से सार्वजनिक मंचों पर ऐसी सामग्री के प्रसार को लगभग समाप्त कर दिया है। वहीं ऑस्ट्रेलिया के ऑनलाइन सुरक्षा नियामक ने भी इस वर्ष आवश्यक जानकारी देने में देरी को लेकर कंपनी पर जुर्माना लगाया था। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते डिजिटल उपयोग के दौर में सभी तकनीकी कंपनियों के लिए सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।
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