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राजाओं को लड़ने के लिए देवियों ने दी तलवारें, NCERT Book के नये अध्याय में भारतीय प्रतिरोध की कहानी ने बदल डाली तस्वीर!

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानि एनसीईआरटी एक बार फिर से सुर्खियों में है। दरअसल कक्षा नौ की सामाजिक विज्ञान पुस्तक ने भारतीय मध्यकालीन इतिहास को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। मंगलवार को जारी ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड—भाग दो’ में ‘रेजिस्टेंस एंड रेजिलिएंस’ यानी प्रतिरोध और दृढ़ता नामक अध्याय के जरिए सातवीं शताब्दी के बाद भारतीय उपमहाद्वीप में हुए लगातार आक्रमणों और उनके खिलाफ हुए प्रतिरोध को प्रमुखता दी गई है। पुस्तक में युद्ध और धार्मिक परंपराओं के संबंध का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि सातवीं शताब्दी से अनेक राजा और राजकुमार संघर्ष के समय काली, दुर्गा, भवानी और शक्ति के अन्य रूपों को रक्षक के रूप में मानते थे।

सबसे चर्चित हिस्सा उन देवी-प्रदत्त तलवारों का है, जिनका उल्लेख पुस्तक ऐतिहासिक परंपराओं के संदर्भ में करती है। पुस्तक के अनुसार, बस्तर के शासक अन्नमरजा के बारे में मान्यता है कि उन्हें माणिक्यदेवी यानी दंतेश्वरी से तलवार प्राप्त हुई थी। इसी तरह विजयनगर के कुमार कम्पण के बारे में कहा गया है कि उन्होंने मदुरै में सल्तनत की सेनाओं के खिलाफ देवी से प्राप्त तलवार का इस्तेमाल किया। मराठा शासक छत्रपति शिवाजी के बारे में भी पारंपरिक मान्यता का उल्लेख है कि उन्हें तुलजा भवानी से तलवार मिली थी।

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हम आपको बता दें कि पुस्तक मध्यकालीन भारत को केवल राजवंशों के उत्थान-पतन के रूप में नहीं, बल्कि आक्रमण, संघर्ष और प्रतिरोध के लंबे दौर के रूप में प्रस्तुत करती है। इसमें कहा गया है कि सातवीं शताब्दी के बाद उपमहाद्वीप में लगातार आक्रमण हुए, जिनके पीछे क्षेत्रीय विस्तार के साथ धार्मिक उद्देश्य भी रहे। पुस्तक अरब, तुर्क, मुगल और यूरोपीय शक्तियों के खिलाफ भारतीय शासकों और समुदायों के प्रतिरोध को दर्ज करती है। राजपूतों, अहोमों, विजयनगर, मराठों, सिखों और जाटों के संघर्षों को भी इसमें स्थान दिया गया है।

अध्याय में यह भी कहा गया है कि भारतीय समाज ने बाहरी चुनौतियों का सामना केवल सैन्य स्तर पर नहीं किया, बल्कि अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को भी बनाए रखा। महाराणा प्रताप का अकबर के खिलाफ संघर्ष, अहोमों द्वारा मुगल विस्तार का प्रतिरोध और सरायघाट का युद्ध, विजयनगर की भूमिका तथा मराठों की स्वराज्य की अवधारणा को इसी संदर्भ में रखा गया है। हालांकि पुस्तक में मुगलों के साथ कछवाहों जैसे कुछ राजपूत समूहों के सहयोग का भी उल्लेख है, लेकिन समग्र प्रस्तुति में प्रतिरोध को अपेक्षाकृत अधिक प्रमुखता मिली है।

वहीं सिख इतिहास के हिस्से में मुगल शासन के दौरान गुरु अर्जन देव, गुरु तेग बहादुर और गुरु गोबिंद सिंह से जुड़े संघर्ष और बलिदान का उल्लेख करते हुए पुस्तक मुगल राज्य की सिख गुरुओं के प्रति क्रूरता को इतिहास में दुर्लभ उदाहरणों वाला बताती है। मंदिरों के विध्वंस और पुनर्निर्माण, काशी विश्वनाथ मंदिर, भक्ति परंपरा और सूफी परंपरा का भी अध्याय में उल्लेख है।

इस पूरी तस्वीर के बीच एनसीईआरटी प्रमुख दिनेश सकलानी ने कहा है कि माध्यमिक स्तर पर सामाजिक विज्ञान की पढ़ाई का उद्देश्य विद्यार्थियों में विश्लेषणात्मक क्षमता, आलोचनात्मक जिज्ञासा, संवाद की क्षमता और विभिन्न संस्कृतियों को समझने की क्षमता विकसित करना है। उनके अनुसार, नई पुस्तक इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। देखा जाये तो नई किताब इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल इतिहास के कुछ नए प्रसंग नहीं जोड़ती, बल्कि विद्यार्थियों के सामने मध्यकालीन भारत को देखने का एक अलग ढांचा रखती है, जहां आक्रमण के साथ प्रतिरोध, युद्ध के साथ आस्था और सत्ता के साथ सांस्कृतिक अस्तित्व की लड़ाई को केंद्रीय स्थान दिया गया है।

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Pitru Paksha में Purnima Shraddh पर तर्पण और Panchabali की पूरी विधि

हिंदू धर्म में पितृपक्ष में पूर्वजों को याद किया जाता है और उनके प्रति श्रद्धा अर्पित की जाती है। इस दौरान लोग अपने पितरों की आत्मिक शांति के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान जैसे धार्मिक काम करते हैं। इस बार 26 सितंबर 2026, शनिवार को भाद्रपद पूर्णिमा का श्राद्ध किया जाएगा। वहीं इसके अगले दिन यानी की 27 सितंबर को आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि शुरू होगी। इस तिथि से मुख्य रूप से पितृपक्ष की शुरूआत मानी जाती है।

पूर्णिमा श्राद्ध

आज यानी की 26 सितंबर 2026 को पूर्णिमा श्राद्ध है, इस दिन उन पूर्वजों का याद किया जाता है और श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु पूर्णिमा तिथि को होती है। अगर घर-परिवार में किसी व्यक्ति की मृत्यु पूर्णिमा तिथि को हुई थी, तो पितृपक्ष में पूर्णिमा श्राद्ध की तिथि पर श्राद्ध किया जाता है। मुख्य पितृपक्ष से पहले आने वाली पूर्णिमा श्राद्ध को महत्वपूर्ण तिथि माना जाता है।

पूर्णिमा श्राद्ध और प्रतिपदा श्राद्ध में फर्क

पूर्णिमा श्राद्ध और प्रतिपदा श्राद्ध के बीच मुख्य अंतर तिथि का है। 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध उन पूर्वजों का किया जाता है, जिनकी मृत्यु पूर्णिमा तिथि को हुई थी। वहीं 27 सितंबर को प्रतिपदा श्राद्ध में उन पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को हुई थी।

जानें पूर्णिमा श्राद्ध की विधि

इस दिन सुबह उठकर स्नान करें और फिर साफ सफेद कपड़े पहनें। इसके बाद रौहिणी या कुतुप मुहूर्त में दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके बैठें। अब दाहिने हाथ की अनामिका उंगली में कुश की पवित्री पहनें। अब तांबे या कांसे के बर्तन में कच्चा दूध, शुद्ध जल, काले तिल, सफेद फूल और अक्षत मिलाएं। दोनों हाथों में कुश रखें और जल लेकर 'ॐ पितृभ्यः नमः' बोलते हुए अपने गोत्र का नाम लें। फिर अंगूठे के सहारे से जल को किसी बर्तन में गिराएं।

तर्पण के बाद प्याज-लहसुन के बिना बनाए गए खाने को छोटे-छोटे हिस्सों में कुत्ते, कौवे, गाय, चींटी और देवता के लिए अलग-अलग रखें। इसको पंचबलि भी कहा जाता है। वहीं संभव हो तो ब्राह्मणों को भोजन कराएं और यथासंभव दान दें। वहीं मंदिर या जरूरतमंद को आटा, चावल, सब्जी और फल आदि का दान दें। वहीं श्राद्ध कर्म के अंत में अगस्त्य ऋषि सहित अपने पूर्वजों से प्रार्थना करें और भूलचूक के लिए क्षमायाचना करें।

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  Sports

Australia के खिलाफ दूसरे Test में तेज गेंदबाज Anrich Nortje चोटिल होकर बाहर

दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मुकाबले में मेजबान टीम को बड़ा झटका लगा है। तेज गेंदबाज एनरिक नॉर्टजे दाहिनी जांघ और कमर के जोड़ के पास चोट लगने की आशंका के चलते मैदान से बाहर चले गए हैं। बुधवार को मैच के चौथे दिन लगी इस चोट ने उनकी आगे की उपलब्धता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, दक्षिण अफ्रीका की टीम ने पहली पारी में ऑस्ट्रेलिया को सस्ते में समेटकर मुकाबले पर मजबूत पकड़ बना ली है।

ईएसपीएनक्रिकइंफो की रिपोर्ट के मुताबिक, सेंट जॉर्ज पार्क में खेले जा रहे टेस्ट के चौथे दिन सुबह के सत्र में नॉर्टजे अपने चौथे ओवर की केवल 3 गेंदें फेंकने के बाद लंगड़ाते हुए मैदान से बाहर चले गए। क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका ने दूसरे सत्र की शुरुआत में बताया कि नॉर्टजे ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी के बाकी हिस्से में कम से कम गेंदबाजी करने के लिए मैदान पर नहीं उतरेंगे। उनकी चोट कितनी गंभीर है, इसे लेकर आगे की जानकारी का इंतजार है।

गौरतलब है कि नॉर्टजे ने डरबन में खेले गए पहले टेस्ट के दौरान लंबे समय बाद टेस्ट क्रिकेट में वापसी की थी। उन्होंने साढ़े 3 साल से अधिक समय के अंतराल के बाद अपना पहला टेस्ट और प्रथम श्रेणी मुकाबला खेलते हुए 40 ओवर गेंदबाजी की थी। दोनों टेस्ट के बीच कम समय होने के कारण उनकी फिटनेस को लेकर पहले भी सवाल उठे थे। हालांकि, दूसरे टेस्ट से 2 दिन पहले अभ्यास के दौरान उन्होंने तेज रफ्तार से गेंदबाजी कर अपनी तैयारी का संकेत दिया था।

मैदान छोड़ने से पहले नॉर्टजे ने दक्षिण अफ्रीका की गेंदबाजी में अहम योगदान दिया। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज मार्नस लाबुशेन को आउट करने में भूमिका निभाई। तीसरी स्लिप में साइमन हार्मर ने शानदार कैच पकड़कर लाबुशेन की पारी समाप्त की। उस समय ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 45 रन पर 4 विकेट हो गया था और टीम मुश्किल में नजर आ रही थी।

दक्षिण अफ्रीका के गेंदबाजों ने इसके बाद भी ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को संभलने का मौका नहीं दिया। मेहमान टीम अपनी पहली पारी में महज 99 रन पर सिमट गई। दक्षिण अफ्रीका की ओर से बाएं हाथ के तेज गेंदबाज मार्को यानसन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 5 विकेट झटके। वहीं, वियान मुल्डर ने 2 विकेट लेकर ऑस्ट्रेलिया की मुश्किलें बढ़ा दीं।

ऑस्ट्रेलिया की ओर से अनुभवी बल्लेबाज स्टीव स्मिथ ने सबसे ज्यादा 28 रन बनाए। उन्होंने 88 गेंदों का सामना करते हुए 2 चौके लगाए, लेकिन मुल्डर की गेंद पर बोल्ड हो गए। बाकी बल्लेबाज दक्षिण अफ्रीका की तेज गेंदबाजी के सामने टिक नहीं सके।

इससे पहले दक्षिण अफ्रीका ने अपनी पहली पारी में कप्तान टेम्बा बावुमा के शानदार 179 रन और मार्को यानसन के 85 रनों की मदद से मजबूत स्कोर खड़ा किया था। शुरुआती विकेट जल्दी गिरने के बावजूद दोनों बल्लेबाजों ने पारी को संभाला और टीम को मुकाबले में बढ़त दिलाई।

ऑस्ट्रेलिया को 99 रन पर आउट करने के बाद दक्षिण अफ्रीका ने उसे फॉलोऑन खेलने के लिए मजबूर कर दिया। इसका मतलब है कि ऑस्ट्रेलिया को पहली पारी में पिछड़ने के बाद दोबारा बल्लेबाजी करनी पड़ी है। अब मेजबान टीम की नजर इस बढ़त को जीत में बदलने पर है। 3 टेस्ट मैचों की इस सीरीज में दक्षिण अफ्रीका मुकाबला जीतकर सीरीज को 1-1 से बराबर करने की कोशिश कर रहा है। वहीं, नॉर्टजे की चोट टीम के लिए चिंता का विषय बनी हुई है, क्योंकि बाकी मैच में तेज गेंदबाजी का दबाव बनाए रखना बेहद जरूरी है।

Wed, 21 Oct 2026 19:57:00 +0530

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