Durga Puja उत्सव का Kalparambha से होगा आगाज, 21 अक्टूबर को होगा Sindoor Khela
पश्चिम बंगाल का दुर्गा पूजा पूरी दुनिया में जाना जाता है। यह पर्व अनूठी परंपरा, भक्ति, उल्लास और सौहार्द के लिए जाना जाता है। उत्तर भारत की शारदीय नवरात्रि से दुर्गा पूजा थोड़ा अलग होता है। दुर्गा पूजा की शुरूआत आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि से होता है, तो वहीं शारदीय नवरात्रि की शुरूआत आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है। दुर्गा पूजा में षष्ठी से लेकर महानवमी तक देवी दुर्गा की पूजा की जाती है और दशमी के दिन सिंदूर खेला से दुर्गा विसर्जन होता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि दुर्गा पूजा, महासप्तमी, सिंदूर खेला और दुर्गा विसर्जन कब है।
दुर्गा पूजा तिथि और मुहूर्त
वैदिक पंचांग के मुताबिक आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि 16 अक्टूबर की सुबह 03:25 मिनट से हो रही है। वहीं अगले दिन यानी की 17 सितंबर की सुबह 05:54 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। ऐसे में उदयातिथि के आधार पर 16 अक्तूबर को आश्विन शुक्ल षष्ठी है। इसलिए 16 अक्तूबर से दुर्गा पूजा का शुभारंभ हो रहा है।
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दुर्गा पूजा का पहला दिन और कल्पारंभ
आज यानी की 16 अक्तूबर को दुर्गा पूजा का पहला दिन है। आज कल्पारम्भ होता है। बता दें कि कोलाबोऊ पूजा से एक दिन पहले षष्ठी को कल्पारम्भ पूजा की जाती है। इसको बिल्व निमंत्रण भी कहा जाता है। मां दुर्गा को कलश में या बिल्व वृक्ष में निवास के लिए आमंत्रित किया जाता है। इस दिन गणेशजी, देवी दुर्गा, कार्तिकेय और देवी सरस्वती की मूर्तियों का अनावरण होता है।
दुर्गा पूजा का दूसरा दिन - महासप्तमी
वहीं दुर्गा पूजा का दूसरा दिन महासप्तमी को होता है। 17 अक्तूबर को नवपत्रिका पूजा या कोलाबोऊ पूजा की जाएगी। फिर मां दुर्गा के महास्नान के बाद महासप्तमी की पूजा होगी। इस दौरान प्राणप्रतिष्ठा करने के बाद षोडशोपचार पूजा की जाती है। साल 2026 में सप्तमी तिथि दो दिन पड़ रही है। ऐसे में 18 अक्तूबर को भी महासप्तमी रहेगी और दुर्गा पूजा का तीसरा दिन रहेगा।
दुर्गा पूजा का चौथा दिन और महाष्टमी
19 अक्तूबर 2026 को दुर्गा पूजा के उत्सव की महाष्टमी है। इस दिन मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना होती है। वहीं अष्टमी तिथि के समापन और नवमी तिथि की शुरूआत पर संधि पूजा की जाती है। ऐसे में 19 अक्तूबर 2026 को संधि पूजा की जाएगी।
दुर्गा पूजा का पांचवा दिन और महानवमी
इस बार 20 अक्तूबर 2026 को दुर्गा पूजा की महानवमी पड़ रही है। इस दिन नवमी का हवन किया जाता है।
दुर्गा विसर्जन और सिंदूर खेला
वहीं 21 अक्तूबर 2026 को दुर्गा पूजा के समापन के साथ सिंदूर खेला होता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं और देवी दुर्गा को विदा करती हैं। इस दौरान ढोल-नगाड़ों के थाप पर मां दुर्गा की विदाई होती है और उनका विसर्जन किया जाता है।
Karwa Chauth 2026: पूजा थाली में मिट्टी के करवे से लेकर छलनी तक रखें ये सामग्री
करवा चौथ पर्व आने में अब ज्यादा दिन नहीं बचें। इस समय महिलाएं तैयारियों में लगी हुई हैं। इस साल करवा चौथ का व्रत 29 अक्तूबर 2026 को रखा जाएगा। गौरतलब है कि यह दिन सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास है। इस दिन सभी सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती है और फिर रात में चांद को देखकर अपना व्रत खोलती है। करवा चौथ का व्रत पति की दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए रखा जाता है।
अगर आप इस बार व्रत रखने जा रही हैं, तो सबसे पहले अपनी पूजी कि थाली तैयार कर लें। चलिए इस लेख में आपको बताते हैं पूजा की थाली में किन चीजों की जरुरत पड़ेगी।
करवा चौथ की पूजा थाली में क्या-क्या रखें?
करवा चौथ के दौरान भागदौड़ लगी रहती है, ऐसे में आप कुछ चीजें न भूल जाएं, इसलिए पहले से तैयार कर लें पूजा की थाली। इन चीजों को जरुर करें शामिल देखें लिस्ट।
सबसे पहले रखें करवा और जल का पात्र
पूजा के लिअ मिट्टी और उसके ढक्कन को साफ कर लें। इसके साथ ही चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए लोटा अलग से तैयार कर लें। बहुत से घरों में पूजा का करवा और अर्घ्य का पात्र अलग-अलग होता है, इसलिए पहले ही तय कर लें कि कौन से बर्तन की कब जरुरत पड़ सकती है। करवे में जल, अनाज या दूसरी सामग्री कैसे भरनी है, इसके लिए अपने घर की विधि को ही अपनाएं।
रोली, अक्षत और दीपक न भूलें
करवा चौथ की पूजा की थाली में रोली या कुमकुम, हल्दी, साबुत चावल (अक्षत) और मौली रखें। ध्यान रहे कि इन सबको छोटी कटोरियों में रखें। ऐसा करने से सामग्री आपस में मिलेगी नहीं और पूजा के बीच हाथ में लेना भी आसान होगा। अक्सर थाली में दीपक रखा जाता है, लेकिन जलाने के लिए कई बार माचिस नहीं मिलती है। इसलिए घी या तेल, रुई की बत्ती और माचिस भी अपने साथ रखें।
भोग की मिठाई रखें
भोग के लिए ताजे, साफ फल और मिठाई जरुर रखें। ज्योतिष के अनुसार, इस साल की ग्रह स्थिति को देखते हुए बेसन के लड्डू और नारियल से बनीं बर्फी रखना शुभ होगा। बता दें कि, इस दिन गुरु कर्क राशि में और शुक्र तुला राशि में रहेंगे। पारंपरिक ज्योतिषीय प्रतीकों में बेसन की पीली मिठाई गुरु से और नारियल की सफेद मिठाई चंद्रमा से संबंधित मानी जाती है। बेसन के लड्डू के साथ नारियल की बर्फी या नारियल के लड्डू चुने जा सकते हैं।
वहीं, आपके घर में हलवा, पूड़ी या कोई खास पकवान अर्पित करने की परंपरा है, तो उसे भी जरुर रखें।
सुहाग की सामग्री
असल में कई घरों में सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी, मेहंदी और चुनरी जैसी सुहाग सामग्री कई घरों में रख सकती हैं, क्योंकि इन्हें पूजा में अर्पित करने या बायने में देने की परंपरा होती है। आप इस बार बायने या सुहाग सामग्री में चंदन और गुलाब का इत्र जरुर रखें। इत्र की छोटी शीशी रखें। जिससे इसकी खुशबू भोग की चीजों में न घुले। बायने का सामान किसी अलग थाली या टोकरी में तैयार कर लें। जिससे पूजा की मेन थाली अच्छे व्यवस्थित रहे।
छलनी और कथा की व्यवस्था कर लें
अगर आपके यहां पर छलनी से देखकर व्रत को खोला जाता है, तो नई छलनी पहले ही रख लें। करवा चौथ की कथा पुस्तक और पूजा में इस्तेमाल होने वाला चित्र या कैलेंडर भी पूजा स्थल में तैयार रखें। चंद्रमा देखने के बाद व्रत खोलने के लिए पीने का पानी भी अलग कर लें।
खरीदारी से पहले मिला लें ये लिस्ट
करवा चौथ की पूजा थाली में इन सामान को जरुर रखें। एक बार इस लिस्ट से अपने सामान से मैच कर लें, जिससे कुछ गलती में छूट गया है, तो आप अभी खरीद लें।
- करवा और ढक्कन
- जल का लोटा
- रोली
- हल्दी
- अक्षत
-मौली
-दीपक
-घी या तेल
-रूई की बत्ती
-माचिस
-फूल
-धूप
-फल
-बेसन के लड्डू
-नारियल की मिठाई
-सुहाग सामग्री
-बायना
-चंदन
-गुलाब का इत्र
-पान-सुपारी
-छलनी
करवा चौथ पर इन बातों का रखें ध्यान
- पूजा के दौरान दीपक को स्थिर जगह पर रखें और इसके आस-पास कपड़ा या कागज न रखें।
- पूजा के समय और चंद्रोदय का वक्त अपने शहर के हिसाब से जरुर देख लें।
- इस बात का ध्यान रखें कि भोग बनाते समय किसी भी झूठे हाथ न लगाए।
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