Saraswati Puja पर करें कलम और किताबों की पूजा, 17 अक्टूबर को बन रहा विशेष शुभ Muhurat
हिंदू धर्म में मां सरस्वती को बुद्धि, ज्ञान, वाणी और कला की अधिष्ठात्री देवी हैं। हर साल छात्र, शिक्षक और कला-संगीत से जुड़े लोग मां सरस्वती की कृपा पाने के लिए विशेष अनुष्ठान करते हैं। वैदिक पंचांग के मुताबिक साल में मुख्य रूप से दो बार सरस्वती पूजा का विधान मिलता है। पहला माघ शुक्ल पंचमी यानी की बसंत पंचमी और दूसरा आश्विन माह में शारदीय नवरात्रि के अंतिम दिनों में। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको मां सरस्वती की पूजा की सटीक तारीख, शुभ मुहूर्त और उन चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके बिना मां सरस्वती की पूजा अधूरी मानी जाती है।
तिथि और मुहूर्त
वैदिक पंचांग के मुताबिक 17 अक्टूबर 2026 को पूजा के लिए समय सबसे शुभ समय 06:22 बजे से दोपहर 12:06 बजे तक है। वहीं अभिजीत मुहूर्त 11:43 बजे से दोपहर 12:29 बजे तक है। वहीं ज्योतिष के मुताबिक सुबह 07:00 बजे से 11:00 बजे तक का समय मां सरस्वती की चौकी सजाने और पूजा संपन्न करने के लिए शुभ माना जाता है।
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पूजन सामग्री
हल्दी, कुमकुम, सिंदूर और रोली
अक्षत (अन्न के दाने)
लकड़ी की चौकी
आम के पत्ते
पीले फूल और फूलों की माला
पीला वस्त्र या चुनरी / साड़ी
कलश
पके हुए केले की फली और नारियल
भोग के लिए: मालपुआ, तिल के लड्डू, दूध या घी से बनी मिठाई
धूपबत्ती, इत्र और गुलाल
श्रृंगार का सामान
पूजन विधि
इस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद पूजा स्थल को साफ करें। फिर लकड़ी की चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाएं। इसके बाद चौकी पर मां सरस्वती की प्रतिमा को स्थापित करें। अब मां सरस्वती का आचमन करवाकर स्नान कराएं और फूल-माला अर्पित करें। इसके बाद फूल, माला और आम के पत्ते चढ़ाएं और फिर सिंदूर, अक्षत और श्रृंगार का सामान अर्पित करें। मां सरस्वती को पीला वस्त्र अर्पित करें और किताबें, कॉपी और कलम की पूजा करें।
फिर जरूरतमंदों को पढ़ाई का सामान दान करें और मां सरस्वती के साथ भगवान गणेश की पूजा करें। पूजा के बाद परिवार के सदस्यों को भोग या प्रसाद अर्पित करें। शाम को भी देवी सरस्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें।
महत्व
मां सरस्वती को विद्या और बुद्धि की देवी हैं। मां सरस्वती की पूजा करने से ध्यान और एकाग्रता बढ़ती है। पढ़ाई और परीक्षा में सफलता के लिए बेहद शुभ माना जाता है। बच्चों और स्टूडेंट्स के लिए अक्षरज्ञान और विद्यारंभ के लिए अच्छा मौका है। पूजा से सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास बढ़ता है।
एक ही दिन में है Maha Ashtami और महानवमी , जानिए सही तिथि और कन्या पूजन का समय
शारदीय नवरात्रि में भक्तजन मां दुर्गा पूजा-अर्चना कर रहे हैं और व्रत भी रख रहे हैं। नौ दिनों तक मां दु्र्गा के अलग-अलग स्वरुपों की पूजा की जाती है। इस बार अष्टमी और नवमी तिथि, दोनों ही 19 अक्तूबर को पड़ रही है। जिसको लेकर भक्तों के बीच भ्रम की स्थिति बनी है।
शारदीय नवरात्रि का त्योहार 11 अक्तूबर से 20 अक्तूबर तक मनाया जाएगा। इसमें सप्तमी तिथि का प्रभाव आने वाली तिथियों पर रहने वाला है। हिंदू पंचांग के अनुसार, ये दोनों त्योहार सोमवार, 19 अक्तूबर 2026 को मनाए जाएंगे। आइए आपको बताते हैं दुर्गा अष्टमी और नवमी का शुभ मुहूर्त।
महा अष्टमी 2026 तिथि और तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार, 19 अक्तूबर को लोग महा-अष्टमी का त्योहार मनाएंगे, जिसे दुर्गा अष्टमी भी कहा जाता है। 19 अक्तूबर को ही यह पर्व मनाया जाएगा, क्योंकि अष्टमी तिथि 18 अक्तूबर को शुरु होने के बावजूद, उस दिन सूर्योदय के समय मौजूद रहेगी।
महा अष्टमी की सही तिथि और समय
अष्टमी तिथि प्रारम्भ - रविवार, 18 अक्टूबर प्रातः 8:27 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त - सोमवार, 19 अक्टूबर सुबह 10:51 बजे
महा अष्टमी व्रत - सोमवार, 19 अक्टूबर, 2026
देवी की पूजा - मां महागौरी, दुर्गा का आठवां रूप
महानवमी 2026 तिथि और तिथि
द्रिंक पंचांग के अनुसार, 19 अक्तूबर को महानवमी तिथि है, जिसे दुर्गा नवमी भी कहा जाता है। अष्टमी समाप्त होने के ठीक बाद नवमी तिथि प्रारंभ होती है।
महानवमी की सही तिथि और समय
नवमी तिथि प्रारंभ - सोमवार, 19 अक्टूबर सुबह 10:51 बजे
नवमी तिथि समाप्त - मंगलवार, 20 अक्टूबर दोपहर 12:50 बजे
महानवमी का पालन - दिल्ली कैलेंडर के अनुसार 19 अक्टूबर
देवी की पूजा - मां सिद्धिदात्री, दुर्गा का नौवां रूप
आपको बताते चलें कि, इसमें क्षेत्रीय अंतर है। बंगाली दुर्गा पूजा कैलेंडर के अनुसार, महानवमी 20 अक्तूबर को पड़ रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि नवमी तिथि 20 अक्तूबर को दोपहर तक रहती है और बंगाली परंपरा में पूजा-पाठ के अलग-अलग नियम माने जाते हैं।
क्या अष्टमी और नवमी एक ही दिन हैं?
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार महाअष्टमी और महानवमी की तिथि दोनों ही 19 अक्तूबर को पड़ रही है। वहीं, अष्टमी तिथि सुबह 10:18 बजे समाप्त होगी और इसके तुरंत बाद नवमी शुरु हो जाएगी। जो लोग दिल्ली के पंचांग को मानने वाले है, वे सभी लोग इसी दिन पर्व मनाएंगे।
जबकि बंगाल पूजा कैलेंडर का पालन करने वाले लोग 20 अक्तूबर को नवमी मनाएंगे। ऐसे में कन्या पूजन 19 अक्तूबर को की जाएगी। अष्टमी तिथि का शुभ मुहूर्त सुबह 8 बजकर 29 मिनट से लेकर 10 बजकर 16 मिनट तक रहने वाला है। नवमी के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक है।
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