Sri Ganganagar: हिरासत में लिए गए साथियों की रिहाई पर बिरधवाल हेड से हटे किसान
राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में सिंचाई के पानी की मांग को लेकर बिरधवाल हेड पहुंचे किसानों ने हिरासत में लिए गए आंदोलनकारियों की रिहाई पर सहमति बनने के बाद सोमवार सुबह अपना पड़ाव समाप्त कर दिया और घड़साना लौट गए। हालांकि, किसानों ने आंदोलन जारी रखने और घड़साना में दोबारा धरना देकर आगे की रणनीति तय करने की घोषणा की। अधिकारियों ने बताया कि किसानों के हटने के बाद प्रशासन ने सूरतगढ़-छतरगढ़ मार्ग से बैरिकेड और ट्रकों को हटाया।
मार्ग को सोमवार सुबह करीब साढ़े दस बजे यातायात के लिए खोल दिया गया, जिससे सड़क के दोनों ओर फंसे वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई। इंदिरा गांधी नहर परियोजना (आईजीएनपी) की अनूपगढ़ शाखा में सिंचाई का पानी देने की मांग को लेकर रावला, घड़साना, अनूपगढ़ और खाजूवाला क्षेत्र के चार से पांच हजार किसान रविवार रात बिरधवाल हेड के पास जमा रहे। किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से वहां पहुंचे थे।
पुलिस ने उन्हें नहर के गेट तक पहुंचने से रोकने के लिए व्यापक इंतजाम किए थे। अधिकारियों के मुताबिक, किसानों की शनिवार को जयपुर में प्रशासन के साथ हुई वार्ता विफल रहने के बाद उन्होंने रविवार को बिरधवाल हेड की ओर कूच किया था। उन्होंने बताया कि किसानों को रोकने के लिए प्रशासन ने गोपालसर चौराहे से पहले 330 आरडी के पास सड़क पर बैरिकेड लगाए थे और ट्रक खड़े कर रास्ता बंद कर दिया था।
अधिकारियों के अनुसार, इस दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच झड़प हुई, जिसके बाद पुलिस ने कई किसानों को हिरासत में ले लिया। अधिकारियों ने बताया कि आंदोलनकारियों की रिहाई की मांग को लेकर किसानों ने बिरधवाल हेड के पास सड़क पर पड़ाव डाल दिया और रातभर वहीं डटे रहे। मौके पर श्रीगंगानगर जिले के विभिन्न थानों की पुलिस, संभागीय पुलिस बल और राजस्थान सशस्त्र कांस्टेबुलरी (आरएसी) के जवान तैनात रहे।
श्रीगंगानगर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) हरिशंकर यादव भी रातभर मौके पर मौजूद रहे। किसानों ने कहा कि हिरासत में लिए गए साथियों की रिहाई पर सहमति बनने के बाद उन्होंने पड़ाव समाप्त किया है, लेकिन सिंचाई के लिए पानी की मांग पूरी होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि घड़साना में फिर से धरना देकर आंदोलन की आगामी दिशा तय की जाएगी।
कर्नाटक में Sugarcane Farmers ने स्थगित किया आंदोलन, सरकार को 26 नवंबर तक अल्टीमेटम
उत्तरी कर्नाटक के गन्ना किसानों ने सोमवार को धारवाड़ के पास यारिकोप्पा में अधिकारियों और कृषक प्रतिनिधियों के बीच वार्ता के बाद हफ्ते भर का अपना हुब्बल्ली चलो आंदोलन स्थगित कर दिया तथा केंद्र और राज्य सरकारों को अपनी मांगें पूरी करने के लिए 26 नवंबर तक का समय दिया है। किसानों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं मानी गयीं तो वे 27 नवंबर को अपना आंदोलन फिर से शुरू करेंगे तथा केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी के आवास का घेराव करेंगे। उत्तरी कर्नाटक के गन्ना किसान, बेलगावी के पास पुणे-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग को कुछ समय तक तक अवरुद्ध करने के बाद, हुब्बल्ली में जोशी के आवास की ओर पैदल मार्च कर रहे थे।
गन्ना किसानों द्वारा उठाए गए मुद्दों की जांच के लिए एक समिति गठित किये जाने के बावजूद, जब केंद्र सरकार ने उनकी मांगों पर कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया, तो प्रदर्शनकारियों ने अपना आंदोलन जोशी के दरवाजे तक ले जाने का फैसला किया। किसान गन्ने के लिए 5,500 रुपये प्रति टन का दाम, चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत बढ़ाकर 60 रुपये प्रति किलो करने, और गन्ने से बनने वाले इथेनॉल की खरीद नीति की समीक्षा करने जैसी कई मांगें कर रहे हैं। रविवार देर रात हुब्बल्ली में किसान नेताओं तथा जोशी, पूर्व मुख्यमंत्री एवं बेलगावी के सांसद जगदीश शेट्टार, विधायकों और अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद, विरोध प्रदर्शन को स्थगित करने का फैसला किया गया।
किसान नेताओं ने सोमवार को अलग-अलग जिलों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की, ताकि यह तय किया जा सके कि पदयात्रा जारी रखी जाए या आंदोलन को कुछ समय के लिए रोक दिया जाए। हावेरी से आ रहे किसानों का जत्था दोपहर करीब दो बजे हुब्बल्ली के बाहरी इलाके यारिकोप्पा पहुंचा, जबकि बेलगावी से आया एक अन्य समूह तेगुर के रास्ते वहां पहुंचा। जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के साथ चर्चा के बाद, नेताओं ने आंदोलन को रोकने की घोषणा की।
किसान नेता चुनप्पा पुजारी ने कहा कि जोशी ने उनकी मांगों पर विचार करने के लिए समय मांगा है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi








