RML हॉस्पिटल: फायर सेफ्टी की खामियों पर HC सख्त, CPWD को तुरंत सुधार के निर्देश
RML हॉस्पिटल के सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक में फायर सेफ्टी की कमियों पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने CPWD को दिल्ली फायर सर्विस की रिपोर्ट के आधार पर खामियों को तुरंत दूर करने का निर्देश दिया और इसे जनहित में जरूरी बताया।
उदयनिधि स्टालिन को 90 मिनट पूछताछ के बाद किया रिहा, सियासी पारा हुआ हाई
तमिलनाडु की राजनीति में मंगलवार को उस समय हलचल तेज हो गई, जब विपक्ष के नेता और डीएमके विधायक उदयनिधि स्टालिन को एक मामले में हिरासत में लिया गया. मद्रास हाई कोर्ट के निर्देश के बाद पुलिस उन्हें पूछताछ के लिए तंजावुर दक्षिण पुलिस स्टेशन लेकर जा रही थी. हालांकि, उनके वहां पहुंचने से पहले ही बड़ी संख्या में डीएमके कार्यकर्ता और समर्थक पुलिस स्टेशन के बाहर जमा हो गए.
समर्थकों की बढ़ती भीड़ के कारण इलाके में तनाव और अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई. पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पूछताछ का स्थान बदलने का फैसला किया. इसके बाद उदयनिधि स्टालिन को तंजावुर दक्षिण पुलिस स्टेशन के बजाय करीब 21 किलोमीटर दूर स्थित सेंगीपट्टी पुलिस स्टेशन ले जाया गया.
#WATCH | Tamil Nadu: DMK cadres jostle with Police outside Sengipatti Police Station in Thanjavur where State LoP and party leader Udhayanidhi Stalin has been brought. He was detained by the Police earlier today, in connection with a case registered over his alleged remarks… pic.twitter.com/1zua3SqF9q
— ANI (@ANI) August 4, 2026
पुलिस स्टेशन बदलने पर वैन से उतरने से किया इनकार
सेंगीपट्टी पुलिस स्टेशन पहुंचने के बाद घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया. उदयनिधि स्टालिन ने कथित तौर पर पुलिस वाहन से बाहर निकलने से इनकार कर दिया. उनका कहना था कि अदालत के समक्ष जिस पुलिस स्टेशन का उल्लेख किया गया था, पूछताछ के लिए उन्हें वहां नहीं लाया गया.
उन्होंने पुलिस स्टेशन बदलने पर आपत्ति जताई और कहा कि सेंगीपट्टी का नाम अदालत में हुई चर्चा के दौरान नहीं लिया गया था. हालांकि, पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए पूछताछ का स्थान बदलने के फैसले को जरूरी बताया.इस घटनाक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों और उदयनिधि के समर्थकों के बीच तनाव की स्थिति बनी रही.
#WATCH | Tamil Nadu LoP and DMK leader Udhayanidhi Stalin greets party cadres as he leaves from Sengipatti Police Station in Thanjavur. He was detained by the Police earlier today, in connection with a case registered over his alleged remarks during a public meeting.
— ANI (@ANI) August 4, 2026
(Video:… pic.twitter.com/Zgc2byObEN
पुलिस और डीएमके समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की
सेंगीपट्टी पुलिस स्टेशन के बाहर भी बड़ी संख्या में डीएमके कार्यकर्ता और समर्थक जमा हो गए. समर्थकों ने उदयनिधि स्टालिन के समर्थन में नारे लगाए और पुलिस कार्रवाई के खिलाफ विरोध जताया.
भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान पुलिस और कुछ समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की की घटनाएं भी सामने आईं. पुलिस ने अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया.
पुलिस अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और जांच प्रक्रिया में बाधा नहीं डालने की अपील की. पूछताछ के दौरान पुलिस स्टेशन के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई.
अदालत में सरकारी पक्ष ने रखी अपनी दलील
मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने मद्रास हाई कोर्ट को बताया कि जांच एजेंसी का उदयनिधि स्टालिन को लंबे समय तक गिरफ्तार रखने का इरादा नहीं है. सरकारी पक्ष के अनुसार, मामला एक महिला की गरिमा और सम्मान से जुड़े आरोपों का है, इसलिए कानूनी प्रक्रिया के तहत पूछताछ आवश्यक थी.
सरकारी वकील ने अदालत के समक्ष यह भी कहा कि मामले की जांच के लिए उदयनिधि से कुछ सवाल पूछे जाने जरूरी हैं. हालांकि, पूछताछ का उद्देश्य उन्हें अनावश्यक रूप से हिरासत में रखना नहीं है.
हाई कोर्ट ने पूछताछ के बाद रिहा करने के दिए निर्देश
सरकारी पक्ष की दलीलों पर विचार करते हुए मद्रास हाई कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसियां कानून के तहत पूछताछ कर सकती हैं. साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पूछताछ की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उदयनिधि स्टालिन को रिहा किया जाना चाहिए.
अदालत के निर्देश के बाद पुलिस ने सेंगीपट्टी पुलिस स्टेशन में उनसे पूछताछ की. पूछताछ पूरी होने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया.
रिहाई के बाद समर्थकों का जताया आभार
पुलिस हिरासत से रिहा होने के बाद उदयनिधि स्टालिन ने पुलिस स्टेशन के बाहर मौजूद अपने समर्थकों का आभार व्यक्त किया. बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उनके समर्थन में वहां मौजूद रहे और नारेबाजी करते रहे.
इस पूरे घटनाक्रम ने तमिलनाडु की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. एक ओर सरकार का कहना है कि कानून के तहत जरूरी कार्रवाई की गई, वहीं डीएमके समर्थकों ने इसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामला बताया. आने वाले दिनों में इस प्रकरण को लेकर राज्य की राजनीति में बयानबाजी और तेज होने की संभावना है.
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