West Bengal Durga Puja | पश्चिम बंगाल में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई महाष्टमी! बेलूर मठ से लेकर कूचबिहार के बोरो देवी मंदिर तक उमड़ा जनसैलाब।
पश्चिम बंगाल में शारदीय नवरात्र के सबसे महत्वपूर्ण दिन महाष्टमी के अवसर पर सोमवार सुबह से ही राजधानी कोलकाता समेत राज्य भर के दुर्गा पूजा पंडालों और ऐतिहासिक मंदिरों में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। अनुष्ठानों के लिए निर्धारित शुभ मुहूर्त के अनुसार श्रद्धालुओं ने पारंपरिक उत्सवी परिधान पहनकर जगज्जननी मां दुर्गा के चरणों में पुष्पांजलि अर्पित की और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। कोलकाता के भव्य सामुदायिक पूजा पंडालों से लेकर जिलों के पारंपरिक रजवाड़ों, घरेलू आयोजनों और सदियों पुराने मंदिरों में पुजारियों द्वारा उच्चारित वेदों और संस्कृत मंत्रों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। तड़के से ही बच्चे, युवा और बुजुर्ग अपने परिवारों के साथ पंडालों में मां के दर्शन के लिए पहुंचने लगे थे।
महाष्टमी पर सुबह जल्दी पूजा शुरू होने के कारण कई पूजा स्थलों पर तड़के ही श्रद्धालु जुटने लगे। परिवार मां दुर्गा का आशीर्वाद लेने पहुंचे, जहां बच्चे अपने माता-पिता के साथ आए और बुजुर्ग श्रद्धालुओं ने युवा पीढ़ी के साथ मिलकर अनुष्ठानों में हिस्सा लिया। हालांकि, उत्तर कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा मंडप में दो दिन पहले हुई भगदड़ में 19 लोगों की मौत के बाद माहौल गमगीन रहा। वहां आमतौर पर दिखने वाला उत्सवी उल्लास मातम में बदल गया। स्थानीय महिलाओं और बच्चों ने इस त्रासदी पर दुख जताया। कई स्थानीय निवासियों ने कहा कि वे इस साल मंडप में अंजलि देने से हिचकिचा रहे थे और इससे वर्षों से चली आ रही उनकी परंपरा टूट सकती है।
रामकृष्ण मठ और मिशन के मुख्यालय बेलूर मठ में सुबह से ही श्रद्धालुओं का लगातार आना-जाना लगा रहा। वहीं, स्थापित परंपराओं के अनुरूप कामारपुकुर में भी विशेष अनुष्ठान किए गए। हुगली जिले का कामारपुकुर रामकृष्ण परमहंस की जन्मस्थली है। कई पूजा स्थलों पर कुमारी पूजा का आयोजन किया गया, जिसमें एक छोटी बच्ची को दिव्य स्त्री शक्ति के स्वरूप में पूजा जाता है। उत्तर बंगाल के कूचबिहार में कोच राजवंश के इतिहास और शाही परंपराओं से गहराई से जुड़ी बोरो देवी की सदियों पुरानी पूजा के तहत श्रद्धालुओं ने सुबह-सुबह मंदिर में महाष्टमी की अंजलि अर्पित की।
पांच सौ साल से भी अधिक समय से चली आ रही यह पूजा इस क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा बनी हुई है। अष्टमी पर विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं, जिनमें रात के समय होने वाली ‘गुप्त पूजा’ भी शामिल है। महाष्टमी से महानवमी में प्रवेश के समय होने वाला महत्वपूर्ण अनुष्ठान संधि पूजा के रूप में पूरे राज्य में किया गया। इस अनुष्ठान में परंपरागत रूप से देवी के चामुंडा स्वरूप की आराधना करते हुए 108 कमल पुष्प अर्पित किए जाते हैं और 108 दीप जलाए जाते हैं।
CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई अटकी, SEM को धमकी मिलने पर दर्ज हुई FIR
'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नेता रविवार को मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में लगभग पांच घंटे तक इंतजार करते रहे। वे पार्टी के संयोजक सौरभ दास और आशुतोष रंका की रिहाई के मामले में सुनवाई का इंतजार कर रहे थे, जो 14 अक्टूबर से न्यायिक हिरासत में हैं। हालांकि, मामले की सुनवाई करने वाले विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) ने धमकियों और मानसिक उत्पीड़न का हवाला देते हुए कार्यवाही को महज 8-10 मिनट में ही खत्म कर दिया। इस वजह से, लगातार पांचवें दिन भी उनकी रिहाई का मामला अनसुलझा ही रह गया।
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CJP प्रतिनिधियों के अनुसार, SEM दोपहर करीब 1.30 से 2 बजे के बीच पुलिस स्टेशन पहुंचे, लेकिन सुनवाई शाम करीब 5 बजे शुरू हुई। संगठन का आरोप है कि 15 अक्टूबर से बार-बार ज़मानत बॉन्ड जमा करने और ज़रूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद, उनके सदस्यों को इंतज़ार करना पड़ा, क्योंकि अलग-अलग चरणों में नई आपत्तियां उठाई गईं। सुनवाई के दौरान, पुलिस ने आरोप लगाया कि CJP नेता अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका एक और विरोध प्रदर्शन की योजना बना रहे थे।
पुलिस ने रविवार को एयरपोर्ट पर दिपके द्वारा दिए गए उस बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि पार्टी अपनी आगे की रणनीति तय करेगी। हालांकि, CJP के एक प्रवक्ता ने कहा कि उनकी कोई विरोध प्रदर्शन करने की योजना नहीं है और वे सोशल मीडिया पर भी इसके बारे में कुछ पोस्ट नहीं कर रहे हैं। संक्षिप्त कार्यवाही के दौरान, एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि SEM (पुलिस अधिकारी) महेश कुमार मीना को इन दो लोगों को न्यायिक हिरासत में रखने के कारण धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है और उन्हें खतरा भी है।
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वहां मौजूद लोगों के अनुसार, जब SEM जाने की तैयारी कर रहे थे, तब सरकारी वकील ने कहा कि इस मामले की जांच होनी चाहिए। CJP सदस्यों का आरोप है कि सरकारी वकील तब सामने आए, जब इन दोनों की रिहाई को लेकर तीन दिनों तक कार्यवाही चली थी। बाद में पुलिस ने पुष्टि की कि SEM को मिली धमकियों की शिकायत के आधार पर एक FIR दर्ज की गई है।
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