RBI हस्तक्षेप से संभला Rupee, शुरुआती कारोबार में Dollar के मुकाबले 94.80 पर पहुंचा
रुपया सोमवार को शुरुआती कारोबार में नौ पैसे मजबूत होकर 94.80 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के विदेशी मुद्रा बाजार में संरचनात्मक हस्तक्षेपों से घरेलू मुद्रा को समर्थन मिला। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि रुपये में सात महीने की सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई है।
हालांकि, ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रुपये के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 94.90 प्रति डॉलर पर खुला। फिर मजबूत होकर 94.80 प्रति डॉलर पर पहुंच गया जो पिछले बंद भाव के मुकाबले नौ पैसे की बढ़त है।
रुपया शुक्रवार को 10 पैसे मजबूत होकर 94.89 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.01 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 101.83 पर रहा। घरेलू शेयर बाजार में सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 470.50 अंक टूटकर 74,318 अंक पर जबकि निफ्टी 147.10 अंक फिसलकर 22,999.05 अंक पर रहा।
अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट कच्चा तेल का भाव वायदा कारोबार में 1.88 प्रतिशत घटकर 107.79 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। हालांकि अब भी यह काफी ऊंचे स्तर पर है। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों, तेल आपूर्ति में व्यवधान और सऊदी अरब के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की धमकियों से लंबे समय तक आपूर्ति बाधित रहने की आशंकाएं फिर बढ़ गई हैं।
शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को शुद्ध रूप से 1,165.92 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे।
Shardiya Navratri में Saraswati Visarjan आज, शुभ मुहूर्त में प्रतिमा विसर्जन से पूर्ण होगी पूजा
सनातन धर्म में देवी सरस्वती को संगीत, कला, ज्ञान, बुद्धि और विद्या की देवी हैं। नवरात्रि के समय की जाने वाली चार दिवसीय सरस्वती पूजा के चौथे और आखिरी दिन सरस्वती विसर्जन का होता है। सरस्वती विसर्जन को सरस्वती उद्वासन के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मां सरस्वती की विधि-विधान से पूजा की जाती है और उनका विसर्जन कर विदा ली जाती है। इस दौरान मां सरस्वती से विद्या, बुद्धि और ज्ञान प्रदान किए जाने का आशीर्वाद मांगना चाहिए। इस बार आज यानी की 19 अक्तूबर को सरस्वती विसर्जन किया जा रहा है।
तिथि और मुहूर्त
वैदिक पंचांग के मुताबिक सरस्वती विसर्जन 19 अक्तूबर 2026 को किया जा रहा है। इस दौरान 19 अक्टूबर को श्रवण नक्षत्र के दौरान लगभग दोपहर 3:38 बजे से रात 10:14 बजे तक विसर्जन का शुभ समय है। हालांकि पंचांग के हिसाब से मुहूर्त अलग-अलग हो सकता है।
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पूजन विधि
विसर्जन से पहले देवी सरस्वती की विधिवत पूजा की जाती है। फिर देवी को पुष्प अर्पित करें। अक्षत, चंदन और नैवेद्य चढ़ाएं। पुस्तकों, वाद्य यंत्रों और अध्ययन सामग्री की भी पूजा करें। सरस्वती मंत्र का जाप करें। ज्ञान और विवेक की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करें। आरती करें। इसके बाद श्रद्धा और स्थानीय परंपरा के अनुसार देवी की प्रतिमा का विसर्जन करें। पंचांग परंपरा में सरस्वती विसर्जन को सरस्वती उद्वासन भी कहा जाता है।
महत्व
शारदीय नवरात्रि में मां सरस्वती की पूजा का विशेष विधान माना जाता है। दक्षिण भारत और कुछ अन्य क्षेत्रों में इस दौरान मां सरस्वती आह्वान, सरस्वती पूजा और सरस्वती विसर्जन की परंपरा है। सरस्वती विसर्जन सिर्फ देवी सरस्वती की प्रतिमा को विदा करने की परंपरा नहीं बल्कि मां सरस्वती से ज्ञान, बुद्धि और रचनात्मकता प्राप्त करने का साधन भी है।
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