अजित पवार विमान क्रैश-AAIB का दावा, ब्लैक बॉक्स खाक हुआ:रोहित पवार बोले- ये धमाकों से सुरक्षित रह सकता है राजनीति से नहीं
महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार की मौत के मामले में एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने कहा है कि क्रैश विमान के दोनों फ्लाइट रिकॉर्डर (ब्लैक बॉक्स) आग में खाक हो गए थे। एजेंसी के मुताबिक एक रिकॉर्डर का डेटा डाउनलोड हो चुका है। ब्लैक बॉक्स बनाने वाले देश अमेरिका से सहायता मांगी है। ब्लैक बॉक्स जलने के दावे पर NCP (शरद) के विधायक और अजित पवार के भतीजे रोहित पवार ने कहा कि ब्लैक बॉक्स भीषण आग और धमाकों से सुरक्षित रह सकता है, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति से नहीं। पुणे जिले के बारामती में 28 जनवरी को NCP नेता और उपमुख्यमंत्री अजित पवार का विमान क्रैश हुआ था। इस हादसे में उपमुख्यमंत्री सहित 5 लोगों की मौत हुई थी। 2 फरवरी को रोहित पवार ने आरोप लगाया था कि उनके चाचा की मौत में साजिश हुई है। मामले की एक्सपर्ट एजेंसियां जांच करें। एक्सपर्ट्स बोले- ब्लैक बॉक्स खाक होना नामुमकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक ब्लैक बॉक्स 1100° डिग्री में 1 घंटे, 260° डिग्री 10 घंटे तक झेल सकता है। बारामती में विमान जमीन से कुछ फीट ऊंचाई पर था। आग सीमित थी। बॉक्स का पूरी तरह से जल जाना असंभव है। सुनेत्रा पवार ने CBI जांच को लेकर CM से मुलाकात की महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और NCP नेताओं ने मंगलवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर बारामती विमान हादसे की CBI जांच की मांग की। सुनेत्रा के साथ उनके बड़े बेटे पार्थ पवार, NCP नेता सुनील तटकरे, प्रफुल्ल पटेल, हसन मुश्रीफ भी थे। सुनेत्रा ने CBI जांच की मांग को लेकर CM को एक पत्र सौंपा। तटकरे ने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय से बात करने का भरोसा दिया है। इधर, विमान दुर्घटना जांच एजेंसी (AAIB) ने लियरजेट-45 के कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर से डेटा निकालने के लिए विशेष सहयोग मांगा है। DGCA बोला- CVR की तकनीकी जांच जारी केंद्र के नागरिक उड्डयन मंत्रालय (DGCA) ने मंगलवार को बताया कि बारामती प्लेन क्रैश की जांच AAIB को सौंपी गई है। मंत्रालय ने कहा- हादसे की जांच दुर्घटना और घटना जांच नियम, 2017 और ICAO Annex-13 के इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के तहत की जा रही है। DGCA ने बताया प्लेन में दो फ्लाइट रिकॉर्डर लगे थे, जो हादसे के दौरान लंबे समय तक आग और अत्यधिक गर्मी के संपर्क में रहे। डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (DFDR) से सफलतापूर्वक डेटा डाउनलोड कर लिया गया है। मंत्रालय ने कहा कि कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) की तकनीकी जांच अभी जारी है। डेटा निकालने में मदद के लिए उस देश के विशेषज्ञों की भी सहायता ली जा रही है, जहां यह उपकरण बनाया गया था। वहीं, AAIB ने कहा कि जांच पूरी तरह तकनीकी और नियमों के अनुसार की जा रही है, ताकि निष्पक्ष और सबूत आधारित निष्कर्ष निकाला जा सके। ब्यूरो ने अपील की है कि जांच पूरी होने तक सभी लोग अटकलों से बचे रहें। जांच की डिटेल जल्द ही शेयर की जाएगी। हादसे के दूसरे दिन मिला था प्लेन का ब्लैक बॉक्स 28 जनवरी की सुबह VSR वेंचर्स कंपनी का लेयरजेट 45 प्लेन बारामती में क्रैश हुआ था। इसका ब्लैक बॉक्स अगले दिन बरामद किया गया था। इसी में ब्लैक बॉक्स में फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर भी है। अजित पवार VSR वेंचर्स कंपनी की लेयरजेट 45 प्लेन सुबह 8:10 बजे मुंबई से रवाना हुए थे। लगभग 8:45 बजे प्लेन क्रैश हो गया। पवार स्थानीय निकाय चुनावों से पहले अपने होमटाउन बारामती में चार चुनावी रैलियों को संबोधित करने वाले थे। ब्लैक बॉक्स क्या होता है, 4 ग्राफिक्स और 6 सवाल-जबाव में जानिए… ब्लैक बॉक्स से संबंधित 6 जरूरी सवाल-जवाब 1. इसे ब्लैक बॉक्स क्यों कहते हैं? "ब्लैक बॉक्स" नाम को लेकर कई बातें कही जाती हैं। एक मान्यता है कि पहले इसके अंदर का हिस्सा काला होता था, इसलिए इसे यह नाम मिला। दूसरी राय यह है कि हादसे के बाद आग से जलकर इसका रंग काला हो जाता है, इसलिए लोग इसे "ब्लैक बॉक्स" कहने लगे। 2. ब्लैक बॉक्स दिखता कैसा है? ब्लैक बॉक्स असल में ओरेंज रंग का होता है और बॉक्स जैसा नहीं दिखता। यह अलग-अलग आकार का हो सकता है—जैसे गोल, बेलनाकार या गुंबद जैसा। इसका आकार इतना बड़ा होता है कि प्लेन के मलबे में आसानी से मिल सके। 3. ब्लैक बॉक्स को हादसे के बाद कैसे खोजते हैं? अगर विमान पानी में गिरता है तो ब्लैक बॉक्स का अंडरवाटर बीकन पानी छूते ही सिग्नल भेजना शुरू कर देता है। अगर हादसा जमीन पर होता है तो इसका चमकीला नारंगी रंग इसे ढूंढने में मदद करता है। 4. कैसे बचाता है डेटा? ब्लैक बॉक्स को विमान के सबसे सुरक्षित हिस्से, आमतौर पर टेल सेक्शन में रखा जाता है। यह टाइटेनियम या स्टेनलेस स्टील से बना होता है। 1100 डिग्री सेल्सियस तापमान व समुद्र की गहराई में दबाव को झेल सकता है। पानी में गिरने पर यह 14,000 फीट गहराई तक से सिग्नल भेज सकता है। 5. ब्लैक बॉक्स मिलने में समय लग सकता है? कुछ हादसों में ब्लैक बॉक्स ढूंढने में बहुत समय लगता है। कई बार ऐसा भी हो सकता है कि नहीं मिले। उदाहरण: 5. भारत में जांच कहां होती है? दिल्ली में हाल ही में DFDR CVR लैब की शुरुआत हुई है, जहां ब्लैक बॉक्स से डाटा निकाला और एनालिसिस किया जा सकता है। यहीं पर इस ब्लैक बॉक्स की जांच भी की जाएगी। ………………. महाराष्ट्र डिप्टी सीएम प्लेन हादसे से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… महाराष्ट्र डिप्टी CM अजित पवार का प्लेन क्रैश में निधन: बारामती में लैंडिंग के दौरान गिरकर खाक, सभी 5 सवार मारे गए महाराष्ट्र के डिप्टी CM अजित पवार का निधन हो गया है। बुधवार सुबह 8.45 बजे बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान उनका चार्टर्ड प्लेन क्रैश हो गया। वे 66 साल के थे। हादसे में पवार के सुरक्षाकर्मी, दो पायलट और एक महिला क्रू मेंबर समेत 5 लोगों की जान गई। पूरी खबर पढ़ें…
ओडिशा के कोणार्क मंदिर के गर्भगृह में जा सकेंगे श्रद्धालु:122 साल से भरी हुई रेत हटा रहे एक्सपर्ट्स; इसमें 3 महीने लगेंगे
ओडिशा में स्थित 13वीं शताब्दी के कोणार्क मंदिर के गर्भगृह में अब श्रद्धालु जा सकेंगे। अभी इसमें रेत भरी हुई है जिसे हटाने का काम जारी है। मंदिर के पीछे 15 फीट उंची दीवार है। इसे गिरने से बचाने के लिए अंग्रेजों ने 1903-04 में मंदिर के गर्भगृह में हजारों टन रेत भरवा दी थी। एक सदी से ज्यादा वक्त बीत चुका है, लेकिन आज तक मंदिर के गर्भगृह(जगमोहन हॉल) में कोई नहीं जा सका। भारतीय पुरातत्व विभाग (ASI) और आईआईटी मद्रास के एक्सपर्ट्स की 30 लोगों की टीम को इसे हटाने का टास्क दिया गया है। ASI पुरी सर्किल के सुपरीटेंडेंट डीबी गढ़नायक ने बताया कि पूरी तरह रेत निकालने में 3 महीने लगेंगे। सबकुछ ठीक रहा तो एक साल बाद श्रद्धालु पहली बार इस ऐतिहासिक मंदिर के गर्भगृह में जा सकेंगे। रिपोर्ट आने के बाद मंदिर रीस्ट्रक्चर किया जाएगा अंदर दीवारों का क्या हाल है? गर्भगृह का ढांचा कैसा है? यही जानने के लिए 127 फीट ऊंचे इस मंदिर में 80 फीट ऊंचाई पर इन दिनों जीरो वाइब्रेशन के साथ ड्रिल (डायमंड ड्रिल) की जा रही है। ड्रिल करके 8.5 मी. लंबा और 160 एमएम चौड़ा पत्थर और अंदर भरी रेत का सैंपल निकालकर सैंपल आईआईटी मद्रास भेज दिया गया है। भैजे गए सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद गर्भगृह से वैज्ञानिक तरीके से रेत निकाली जाएगी और फिर मंदिर को रीस्ट्रक्चर किया जाएगा। रेत निकालने के बाद जब गर्भगृह खाली हो जाएगा, तो दोबारा से ढांचे को पहले जैसा बनाया जाएगा, जैसा निर्माण के समय था। इस मंदिर में हर साल 35 लाख से ज्यादा पर्यटक आते है। देश के ASI स्मारकों में ताजमहल के बाद यह मंदिर दूसरे स्थान पर है। ये ASI का अबतक का सबसे बड़ा ऑपरेशन ASI के संरक्षण सहायक त्रैलोक्यनाथ बेहरे ने बताया कि मंदिर को अगले हजार साल तक सुरक्षित रखने के लिए ही अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन शुरू किया गया है। उन्होंने ये भी बताया… अंदर की रेत बैठ चुकी है, ऊपरी हिस्सा खाली हो गया कोणार्क सूर्य मंदिर में गाइड का काम कर रहे सुकंत कुमार पाड़ी ने बताया कि गर्भगृह में क्या है, यह कोई नहीं जानता। काफी पहले गर्भगृह के बाहर कुछ हिस्से में काम चल रहा था, तब पाइप के माध्यम से मैंने आवाज लगाई तो दूसरी ओर जा रही थी यानी रेत नीचे आ चुकी है। उन्होंने बताया कि इस मंदिर को 13वीं सदी में राजा नरसिंह देव (प्रथम) ने 12 साल में बनवाया था। यह सूर्य उपासना के साथ समुद्री शक्ति का प्रतीक है। इसके बाहरी हिस्से में खोंडालाइट और गर्भगृह के अंदर की ओर लैटराइट पत्थर लगा है। इनमें एक पत्थर भारी तो दूसरा हल्का होता है। मंदिर निर्माण के कुछ साल बाद गर्भगृह का एक हिस्सा गिर गया था। जगमोहन हॉल बच गया था, लेकिन जब वह भी दरकने की स्थिति में पहुंचा तो ब्रिटिश अधिकारी जेए बॉर्डियन ने इसमें रेत भरवा दी थी। इसके चारों ओर ऊंची दीवार बनाकर बंद कर दिया था।
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