पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पिछले कुछ वर्षों में अपने कालीघाट आवास पर कई सुरक्षा उल्लंघनों का आरोप लगाया है, जिनमें कथित तौर पर हथियार लेकर परिसर में प्रवेश करने की घटनाएं भी शामिल हैं। विधानसभा चुनाव से पहले एबीपी आनंद को दिए एक साक्षात्कार में बनर्जी ने दावा किया कि कम से कम तीन से चार बार घुसपैठ के प्रयास हुए हैं। उन्होंने बताया कि एक बार एक व्यक्ति लोहे की छड़ लेकर परिसर में घुसा, जबकि दूसरी बार एक व्यक्ति कथित तौर पर बंदूक लेकर आया था। उन्होंने कहा कि जब भी कुछ होता है, तो कहा जाता है कि वह व्यक्ति मनोरोगी या मानसिक रूप से अस्थिर है। अभी तक कोई उचित जांच नहीं हुई है।
सीसीटीवी कैमरों से छेड़छाड़: ममता बनर्जी
हाल ही की एक घटना का जिक्र करते हुए बनर्जी ने आरोप लगाया कि करीब छह महीने पहले कालीघाट रोड पर लगे सीसीटीवी कैमरों से छेड़छाड़ की गई थी। उन्होंने दावा किया कि एक राजनीतिक दल, जो अक्सर उनके लिए परेशानी खड़ी करता है, के सदस्यों ने कैमरों को बंद करवाने के लिए लोगों को भेजा था। उनके अनुसार, स्थानीय निवासियों ने हस्तक्षेप किया और इसमें शामिल लोगों को पकड़ लिया। उन्होंने आगे कहा कि उन्हें इस मामले में की गई किसी भी कार्रवाई की जानकारी नहीं है और उन्होंने पुलिस की ओर से लापरवाही का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री ने अपनी निजी सुरक्षा को लेकर जताई जा रही चिंताओं का भी जवाब दिया। गृह विभाग का प्रभार संभालते हुए उन्होंने कहा कि वे अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं देतीं। बनर्जी ने कहा कि मुझे अपनी चिंता नहीं है; मुझे दूसरों की चिंता है।” उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने कभी बुलेटप्रूफ गाड़ी का इस्तेमाल नहीं किया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी बुलेटप्रूफ कार पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य को सौंप दी थी और फिलहाल वे पार्टी की स्कॉर्पियो में सफर करती हैं, सरकारी गाड़ी में नहीं।
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भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) उपकरणों से तैयार की गई याचिकाओं में चिंताजनक वृद्धि पर गहरी आशंका व्यक्त की। सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली और बीवी नागरत्ना एवं जॉयमाल्य बागची की पीठ ने पाया कि एआई द्वारा तैयार की गई कई याचिकाओं में अब ऐसे न्यायिक निर्णयों का हवाला दिया जा रहा है जिनका अस्तित्व ही नहीं है, जिससे कानूनी मसौदा तैयार करने की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न उठते हैं। मुख्य न्यायाधीश ने "दया बनाम मानवता" जैसे काल्पनिक मामले के मनगढ़ंत उद्धरणों को देखकर चिंता व्यक्त की। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान उन्हें इस तरह के एक काल्पनिक फैसले का पता चला। मुख्य न्यायाधीश ने दीपांकर दत्ता की अदालत में हुई एक ऐसी ही घटना का जिक्र करते हुए कहा कि एक नहीं बल्कि ऐसे कई फैसले उद्धृत किए गए, जो सभी फर्जी निकले।
वकीलों द्वारा एआई पर निर्भरता की पीठ ने आलोचना की
पीठ ने कहा, "हमें यह जानकर चिंता हो रही है कि कुछ वकीलों ने याचिकाएँ तैयार करने के लिए एआई का उपयोग करना शुरू कर दिया है। यह बिल्कुल अनुचित है।" न्यायाधीशों ने चेतावनी दी कि इस तरह की प्रथाएँ न केवल अदालत को गुमराह करती हैं, बल्कि कानूनी कार्यवाही की विश्वसनीयता को भी खतरे में डालती हैं। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने आगे कहा कि भले ही उद्धृत फैसले वास्तविक हों, कुछ याचिकाओं में उन फैसलों से संबंधित फर्जी उद्धरण" होते हैं, जिससे न्यायाधीशों को बुनियादी तथ्यों को सत्यापित करने में अतिरिक्त समय लगाना पड़ता है। उन्होंने टिप्पणी की, "इससे न्यायाधीशों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
मामले का संदर्भ: राजनीतिक भाषण पर जनहित याचिका की सुनवाई
ये टिप्पणियाँ शिक्षाविद रूप रेखा वर्मा द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) की सुनवाई के दौरान की गईं, जिसमें राजनीतिक भाषणों पर दिशा-निर्देशों की मांग की गई थी। यद्यपि जनहित याचिका एक अलग मुद्दे से संबंधित थी, पीठ ने अदालती दस्तावेजों में उभर रहे इस चिंताजनक चलन पर ध्यान देने का अवसर लिया।
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