EU के प्रतिबंधों को मात देने की तैयारी: रूस ने बनाई सीक्रेट गैस फ्लीट, दुनिया में बढ़ी नई टेंशन
यूरोपीय संघ द्वारा रूस पर लगाए गए एलएनजी आयात प्रतिबंधों के जवाब में, रूस अपनी 'शैडो फ्लीट' का विस्तार कर रहा है. यह गुप्त बेड़ा अंतरराष्ट्रीय नियमों और आर्थिक प्रतिबंधों से बचने के लिए बनाई गई पुरानी जहाजों का समूह है, जो रूस को अपनी ऊर्जा निर्यात जारी रखने में मदद कर रहा है.
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Explainer: श्रीलंका में टीम इंडिया की जीत या हार तय करेगी यह सबसे अहम कड़ी, कप्तान शुभमन गिल की होगी 'अग्निपरीक्षा'
IND vs SL: भारत और श्रीलंका के बीच 2 टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जानी है. इस सीरीज की शुरुआत 15 अगस्त से होगी. इस सीरीज के लिए टीम इंडिया 4 अगस्त को श्रीलंका पहुंच चुकी है. यह सीरीज टीम इंडिया के लिए बेहद अहम है. इस सीरीज के जरिए जहां एक तरफ टीम इंडिया पर विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के लिए प्वाइंट्स हासिल करने की चुनौती होगी, तो वहीं दूसरी ओर टेस्ट के लिए एक अच्छी टीम तैयार करने की चुनौती होगी. श्रीलंका की पारंपरिक और स्पिन-अनुकूल पिचों पर, खासकर गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में, टीम इंडिया का सामना सिर्फ श्रीलंकाई स्पिन जाल से नहीं, बल्कि अपनी खुद की तकनीक और रणनीतिक समझ से भी होना है. युवा कप्तान शुभमन गिल के नेतृत्व में उतरी इस युवा ब्रिगेड के लिए यह सीरीज किसी 'अग्निपरीक्षा' से कम नहीं होने वाली है, तो चलिए जानते हैं कि श्रीलंका के खिलाफ इस सीरीज में टीम इंडिया की अहम कड़ी क्या साबित हो सकती है.
गाले की पिच का मिजाज
गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम के इतिहास की बात करें तो यहाँ शुरुआती दो दिनों में पिच बल्लेबाजों के लिए अनुकूल हो सकती है, लेकिन तीसरे दिन के बाद पिच पूरी तरह से बदल जाती है. जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ता है, पिच पर दरारें चौड़ी होने लगती हैं और सतह से धूल उड़ने लगती है, जिसके बाद यहाँ स्पिनर्स काफी खतरनाक हो जाते हैं. स्पिन गेंदबाजों की गेंदें न सिर्फ तेजी से टर्न होती हैं, बल्कि काफी उछाल भी देखने को मिलता है. ऐसे में टॉस की भूमिका भी अहम होती है. इस मैदान पर टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करना हमेशा से फायदे का सौदा रहा है, क्योंकि चौथी पारी में यहाँ रन बनाना किसी अभिशाप जैसा होता है.
भारतीय बल्लेबाजों के लिए सबसे बड़ी चुनौती
पिछले कुछ सालों में स्पिन के खिलाफ भारतीय बल्लेबाजों का डिफेंस कमजोर रहा है. गॉल में श्रीलंकाई स्पिनर्स के सामने भारतीय टीम की सबसे अहम कड़ी उनके मिडिल ऑर्डर की बल्लेबाजी तकनीक होगी. बल्लेबाजों को सिर्फ फ्रंट फुट पर निर्भर रहने के बजाय बैकफुट का भी शानदार इस्तेमाल करना होगा. श्रीलंका के स्पिनर्स को अपनी लाइन-लेंथ बदलने पर मजबूर करने के लिए भारतीय बल्लेबाजों के स्वीप और पैडल स्वीप जैसे शॉट्स मुख्य हथियार साबित हो सकते हैं. टर्निंग पिचों पर गेंद अक्सर बल्ले का किनारा लेकर सिली पॉइंट या शॉर्ट लेग के पास जाती है. इससे बचने के लिए भारतीय बल्लेबाजों को हल्के हाथों से डिफेंस करना सीखना होगा.
भारतीय स्पिन अटैक
गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में अगर एक ओर श्रीलंकाई स्पिनर्स के खिलाफ भारतीय बल्लेबाजों की परीक्षा होगी, तो वहीं दूसरी ओर भारतीय टीम के पास भी स्पिन गेंदबाजी सबसे मजबूत कड़ी और जीत का मुख्य जरिया है. कुलदीप यादव और रवींद्र जडेजा जैसे अनुभवी स्पिनर इस पिच पर बेहद ही खतरनाक साबित हो सकते हैं. गॉल की पिच पर तीसरे और चौथे दिन जब दरारें पड़ेंगी तो जडेजा की सटीक लाइन-लेंथ और तेज गति से स्पिन कराने की क्षमता श्रीलंकाई बल्लेबाजों के लिए सबसे बड़ा खतरा बनेगी. जडेजा एक छोर से श्रीलंकाई बल्लेबाजों को रन बनाने से रोककर दबाव बना सकते हैं और विकेट निकाल सकते हैं.
वहीं गॉल की पिचों पर कुलदीप यादव की गुगली और हवा में गति का मिश्रण श्रीलंकाई बल्लेबाजों के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है. वह बीच के ओवरों में साझेदारी तोड़ने में अहम कड़ी साबित हो सकते हैं. जडेजा और कुलदीप पहले भी श्रीलंका में टेस्ट मैच खेल चुके हैं. हालांकि कुलदीप ने सिर्फ एक टेस्ट मैच खेला है, लेकिन फिर भी वह एक ऐसे स्पिनर हैं जो कहीं की भी स्पिन-फ्रेंडली पिच पर घातक साबित हो सकते हैं. वहीं टीम में युवा स्पिनर मानव सुथार को शामिल किया गया है. मानव सुथार ने इसी साल 6 जून 2026 को अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच में अपना इंटरनेशनल डेब्यू किया था. उन्होंने पहली ही टेस्ट पारी में शानदार गेंदबाजी करते हुए 33 रन देकर 6 विकेट लेने का कारनामा किया था. ऐसे में वह भी टीम इंडिया में अहम योगदान दे सकते हैं.
Team India have arrived in Sri Lanka ahead of the upcoming Test series! ????????????????????
— Sri Lanka Cricket ???????? (@OfficialSLC) August 4, 2026
The stage is set for an exciting battle between two cricketing nations. ????????#SLvIND #TestCricket #SriLankaCricket pic.twitter.com/oOhK4ASzOo
समुद्र की हवाएं और तेज गेंदबाजों का रोल
गॉल स्टेडियम हिंद महासागर के बिल्कुल किनारे पर स्थित है, जिसके कारण यहाँ लगातार तेज हवाएँ चलती हैं. पिच सूखी होने के कारण गेंद जल्दी पुरानी हो जाती है. हवा के बहाव का फायदा उठाकर मोहम्मद सिराज और हर्षित राणा जैसे तेज गेंदबाज पुरानी गेंद से 'रिवर्स स्विंग' हासिल कर सकते हैं. भले ही यह पिच स्पिनर्स के अनुकूल हो, लेकिन मैच के शुरुआती सेशन में नई गेंद से हवा में मूवमेंट मिलता है. भारतीय तेज गेंदबाजों की यह जिम्मेदारी होगी कि वे श्रीलंका के टॉप ऑर्डर को जल्दी पवेलियन भेजें ताकि स्पिनर्स आते ही दबाव बना सकें.
मानसिक मजबूती और DRS का सही इस्तेमाल
गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में अंपायरों के लिए भी फैसले लेना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि गेंद बहुत ज्यादा टर्न होती है. एलबीडब्ल्यू (LBW) और विकेट के पीछे के कैच फैसलों के लिए DRS का चतुर इस्तेमाल टीम इंडिया के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है. कप्तान और विकेटकीपर के बीच का तालमेल यहां सबसे अहम कड़ी बनेगा. जब विरोधी टीम के स्पिनर लगातार अपील कर रहे हों और दर्शक शोर मचा रहे हों, तब क्रीज पर धैर्य बनाए रखना ही टीम इंडिया को मैच में आगे रख सकता है.
भारत-श्रीलंका टेस्ट सीरीज की 15 अगस्त से होगी शुरुआत
भारत और श्रीलंका के बीच 2 टेस्ट मैचों की सीरीज की शुरुआत 15 अगस्त से होगी. पहला टेस्ट मैच 15 अगस्त से 19 अगस्त तक गाले इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा. इसके बाद दूसरा टेस्ट मैच 23 अगस्त से 27 अगस्त तक कोलंबो स्थित सिंहलीज स्पोर्ट्स क्लब में खेला जाएगा. सीरीज शुरू होने से पहले टीम इंडिया एक प्रैक्टिस मैच भी खेलेगी. यह 7 अगस्त से कोलंबो के एनसीसी ग्राउंड्स पर तीन दिवसीय वॉर्म-अप मैच खेला जाएगा. पहले यह 4 दिन का खेला जाना था, लेकिन बाद में बदलाव किया गया.
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