Explainer: लाइमलाइट में बने रहने के लिए सेलेब्स कौन-सी ट्रिक्स अपनाते हैं? जानिए कैसे मिलता है फायदा और कब बन जाता है नुकसान
Bollywood Celebrity Publicity Tricks: आज के दौर में बॉलीवुड सेलेब्स के लिए सिर्फ फिल्मों में काम करना ही काफी नहीं है. सोशल मीडिया, पैपराजी और लगातार बदलती खबरों के बीच खुद सुर्खियों में बनाए रखना भी एक स्ट्रैटेजी बन चुकी है. आपने कई बार गौर करा होगा कि जब किसी सेलेब की कोई फोटो वायरल हो जाती है, एयरपोर्ट लुक चर्चा में आ जाता है. वहीं, कभी सोशल मीडिया पर ऐसा पोस्ट कर देता है जिस पर बहस शुरू हो जाती है या फिर किसी स्टार का नाम अचानक किसी फिल्म, फेयर या कॉन्ट्रोवर्सी से जुड़ जाता है. इनमें से कुछ चीजें अचानक होती हैं, लेकिन कई बार इनके पीछे सेलेब्स की पीआर टीम की सोच-समझी चाल होती है. जिसे पब्लिसिटी स्ट्रैटेजी या पीआर स्टंट भी कहा जाता है.आइए इस एक्सप्लेनर में जानते हैं कि आखिर सेलेब्स लाइमलाइट में रहने के लिए कौन-कौन से तरीके अपनाते हैं, इससे उन्हें क्या फायदा होता है और कब यही पब्लिसिटी उनके लिए मुसीबत बन जाती है.
लाइम लाइट बटोरने के लिए सोशल मीडिया सबसे बड़ा हथियार
आज किसी सेलिब्रिटी को लाइमलाइट में आने के लिए पहले की तरह टीवी शो या अखबार की जरूरत नहीं होती है. अब Instagram, YouTube, X और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सीधे फैंस से जुड़ने का बेहरीन जरिया बन चुके हैं. एक फोटो, वीडियो, स्टोरी या छोटा सा बयान कुछ ही मिनटों में हजारों-लाखों लोगों तक पहुंच जाता है. यही वजह है कि सेलेब्स अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर काफी सतर्क रहते हैं. कभी नया लुक शेयर किया जाता है, कभी जिम वीडियो, कभी फिल्म का छोटा सा अपडेट और कभी पर्सनल लाइ से जुड़े तस्वीर चर्चा में आ जाती है. इसका सबसे बड़ा फायदा है कि स्टार खुद अपनी पब्लिक इमेज को कंट्रोल कर सकता है. अगर किसी एक्टर की फिल्म आने वाली है, उसे प्रमोट करने में मदद मिलती है. सोशल मीडिया की एक और खासियत यह है कि यहां फैंस सिर्फ दर्शक नहीं रहते, बल्कि कमेंट, शेयर और रिएक्शन के जरिए खुद प्रमोशन का हिस्सा बन जाते हैं.
पैपराजी रखते हैं सेलेब्स को लगातार खबरों में
मुंबई बॉलीवुड और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का बड़ा हिस्सा है. एयरपोर्ट, जिम, रेस्टोरेंट, फिल्म सेट और इवेंट के बाहर सेलेब्स की फोटो और वीडियो अक्सर सोशल मीडिया पर तेजी से फैलते हैं. किसी स्टार की ड्रेस, हेयरस्टाइल, एक्सप्रेशन या किसी दूसरे सेलिब्रिटी के साथ दिखाई देना भी खबर बन जाता है.हालांकि यहां पर एक जरूरी फर्क समझना चाहिए. हर पैपराजी फोटो प्लांटेड हो, ऐसा कहना सही नहीं होगा क्योंकि कई बार फोटो अचानक खींची जाती हैं. लेकिन सेलिब्रिटी पब्लिसिटी में पैपराजी विजिबिलिटी को स्ट्रैटेजी के तौर पर यूज किया जाना भी कोई नई बात नहीं है. कई बार सेलेब्रिटी पब्लिक में बने रहने के लिए अलग-अलग ट्रिक अपनाते हैं.
पब्लिसिटी फॉर्मूला कैसे काम करता है
सेलेब्स के लिए सबसे आसान और जोखिम भरा रास्ता कॉन्ट्रोवर्सी भी हो सकता है. कोई बयान, सोशल मीडिया पोस्ट या इंटरव्यू में कही गई बात अगर लोगों का ध्यान खींच ले तो वह तुरंत खबर बन सकती है. इसके बाद दूसरे सेलेब्स रिएक्शन देते हैं, सोशल मीडिया पर बहस शुरू होती है और मीडिया में कई स्टोरी बन जाती हैं. यही वजह है कि कई बार किसी स्टार का नाम उसकी फिल्म से ज्यादा उसके रिएक्शन के कारण चर्चा में आ जाता है. इसका फायदा यह हो सकता है कि जिस सेलिब्रिटी का नाम लाइमलाइट में नहीं था वह अचानक ट्रेंड करने लग जाते हैं. लेकिन यहां सबसे बड़ा खतरा भी है. कॉन्ट्रवर्सी जरूरत से ज्यादा बढ़ जाए तो स्टार की इमेज को नुकसान पहुंच सकता है. ब्रांड कंपनियां भी किसी सेलिब्रिटी की पब्लिक इमेज को लेकर काफी सतर्क रहती हैं. इसलिए जरूरी नहीं है कि लाइमलाइट हमेशा फायदे में बदले.
पर्सनल लाइफ से भी आते हैं लाइमलाइट में
सेलेब्स की पर्सनल लाइफ के बारे में जानने के लिए फैंस काफी दिलचस्पी रखते हैं. कौन किसे डेट कर रहा है, किसकी शादी होने वाली है, किसके ब्रेकअप की खबर है या कौन किसके साथ दिखाई दिया. ऐसी खबरें अक्सर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होती हैं. कई बार सेलिब्रिटी खुद अपनी पर्सनल लाइफ की फोटो या जानकारी शेयर करते हैं. इससे फैंस के साथ कनेक्शन स्ट्रॉन्ग हो सकता है. लेकिन पर्सनल लाइफ को पब्लिक करने का नुकसान यह है कि एक बार जानकारी बाहर जाता है तो उसे कन्ट्रोल करना मुश्किल हो जाता है. इसलिए लाइमलाइट पाने और अपनी प्राइवेसी बचाने के बीच बैलेंस रखना बेहद जरूरी हो जाता है.
कभी-कभी वायरल होना भी बन जाता है स्ट्रैटेजी
आज के सोशल मीडिया दौर में 'वायरल' होना अपने आप में एक बड़ा गोल बन चुका है. किसी सेलेब का अजीब फैशन, मजेदार वीडियो, यूनिक फोटोशूट या कोई ऐसा कंटेंट जो लोगों को रिएक्ट देने के लिए मजबूर करे, तेजी से फैलता है. लेकिन वायरल और स्ट्रैटेजिक पब्लिसिटी में अंतर है. अगर लोग स्टार के वीडियो को इसलिए शेयर कर रहे हैं कि वह मजेदार है तो यह अच्छी विजिबिलिटी हो सकती है. लेकिन अगर वायरल होने के बाद लोग ट्रोल करने लग जाएं तो इससे नुकसान हो सकता है.दरअसल, सोशल मीडिया पर निगेटिविटी ज्यादा तेजी से फैलती है.
लाइमलाइट से होती है कमाई
अब सबसे बड़ा सवाल कि आखिर सेलेब्स को लाइमलाइट में बने रहने से क्या फायदा होता है. इसका सीधा संबंध उनकी brand value से है. किसी सेलिब्रिटी की पॉपुलैरिटी जितनी ज्यादा होती है, उसके पास ब्रांड एंडोर्समेंट, इवेंट, फिल्म प्रमोशन और दूसरे कमर्शियल प्रोजेक्ट्स मिलने के चांस उतने ज्यादा होते हैं. हालांकि, सिर्फ वायरल होना किसी स्टार की कमाई तय नहीं करता. फॉलोअर्स की संख्या, ऑडियंस की क्वालिटी, स्टार की इमेज भी और ब्रांड वैल्यू भी मायने रखती है.
लाइमलाइट का सबसे बड़ा नुकसान क्या है?
लाइमलाइट का सबसे बड़ा नुकसान यह है, जो सेलिब्रिटी लगातार खबरों में रहता है, उसकी हर छोटी-बड़ी चीजों पर लोगों की नजर रहती है. एक गलत बयान, कॉन्ट्रोवर्सी या पर्सनल लाइफ से जुड़ी कोई बात उसके खिलाफ जा सकती है. इसके अलावा लगातार पब्लिक में बने रहने से ओवर एक्सपोजर का डर होता है. अगर लोग किसी स्टार को हर जगह और हर टाइम नोटिस करते हैं तो उसकी वैल्यू कम हो सकती है. सबसे बड़ी समस्या तब आती है जब पब्लिसिटी और काम के बीच बैलेंस बहुत ज्यादा हो जाए. अगर स्टार लगातार चर्चा में रहता है लेकिन उसकी फिल्म या काम लोगों को पसंद नहीं आ रहा, तो पब्लिसिटी लंबे समय तक उसके लिए फायदेमंद नहीं होती है.
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सीएसएएम और व्हाट्सएप यूजरनेम फीचर पर मेटा से जवाब मांगेगी सरकार, 5 अगस्त को हो सकती है अहम बैठक
नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्र सरकार सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ती सुरक्षा और कंटेंट मॉडरेशन संबंधी चिंताओं को लेकर मेटा के वरिष्ठ अधिकारियों से जवाब मांगने की तैयारी में है। सरकार 5 अगस्त को मेटा के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक कर सकती है, जिसमें बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम), व्हाट्सएप के यूजरनेम फीचर, और वेरिफाइड व हाई-प्रोफाइल अकाउंट्स से जुड़े कंटेंट हटाने की प्रक्रिया सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के सचिव एस. कृष्णन ने मंगलवार को बताया कि सरकार पिछले कुछ समय से उठ रही विभिन्न चिंताओं पर कंपनी से स्पष्टीकरण चाहती है। उन्होंने यह जानकारी वॉयस ऑफ इंडिया नामक स्वतंत्र मल्टीमॉडल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मूल्यांकन प्लेटफॉर्म के लॉन्च के दौरान दी, जिसे एआई4भारत और जोश टॉक्स एआई ने संयुक्त रूप से विकसित किया है।
बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दों में से एक मेटा के प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम) से निपटने के लिए उठाए गए कदम होंगे। सरकार यह जानना चाहती है कि कंपनी ने इस प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए क्या उपाय किए हैं और वे कितने प्रभावी साबित हो रहे हैं।
एस. कृष्णन ने कहा कि इस विषय को पहले भी कंपनी के सामने उठाया गया था और अब सरकार यह समझना चाहती है कि मेटा ने इस दिशा में क्या प्रगति की है।
सरकार व्हाट्सएप के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर को लेकर भी अपनी चिंताएं दोहरा सकती है। मंत्रालय पहले ही व्हाट्सएप से कह चुका है कि वह इस फीचर को तब तक लागू न करे, जब तक पहचान की चोरी, ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराध से जुड़े जोखिमों का संतोषजनक समाधान नहीं किया जाता।
सरकार का मानना है कि यदि उचित सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, तो यह फीचर लोगों के नाम पर फर्जी अकाउंट बनाकर ठगी करने वालों के लिए नया माध्यम बन सकता है।
बैठक में मेटा की कंटेंट मॉडरेशन नीति और विशेष रूप से वेरिफाइड एवं प्रमुख व्यक्तियों के अकाउंट्स से जुड़े पोस्ट हटाने की प्रक्रिया पर भी चर्चा होने की संभावना है। सरकार का कहना है कि किसी वेरिफाइड यूजर का कंटेंट हटाने से पहले पर्याप्त जांच और सुरक्षा व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि गलती से महत्वपूर्ण सामग्री न हटे।
अधिकारियों के अनुसार, मेटा से यह भी पूछा जा सकता है कि इन मामलों में उसकी आंतरिक प्रक्रियाएं क्या हैं, मौजूदा व्यवस्था कहां कमजोर पड़ रही है और कंपनी को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब हाल ही में मेटा को अपनी कंटेंट मॉडरेशन नीति को लेकर सरकार की नाराजगी का सामना करना पड़ा है। कुछ दिन पहले सरकार ने मेटा के ग्लोबल अफेयर्स प्रमुख जोएल कपलान को तलब कर कंपनी की नीतियों पर स्पष्टीकरण मांगा था।
विवाद तब शुरू हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक सोशल मीडिया पोस्ट हटा दी गई थी। उस पोस्ट में उन्होंने परीक्षा प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं से निपटने के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को संबोधित किया था।
बाद में मेटा ने स्पष्ट किया कि पोस्ट को उसकी स्वचालित मॉडरेशन प्रणाली की तकनीकी त्रुटि के कारण हटाया गया था। कंपनी ने इस गलती के लिए खेद भी जताया था और कहा था कि पोस्ट को अनजाने में हटाया गया था।
पिछले कुछ हफ्तों में मेटा विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार की जांच के दायरे में रहा है। सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही बढ़ाने, साइबर अपराधों पर नियंत्रण और ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत बनाने पर जोर दे रही है। ऐसे में 5 अगस्त को प्रस्तावित बैठक मेटा और सरकार के बीच डिजिटल सुरक्षा तथा कंटेंट मॉडरेशन से जुड़े मुद्दों पर महत्वपूर्ण चर्चा का मंच बन सकती है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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