ऑनलाइन प्राइवेसी है जरूरी! क्रोम से सफारी तक, हर ब्राउजर में हिस्ट्री डिलीट करने का जानिए तरीका
गूगल क्रोम, फायरफाक्स, एज, सफारी और ओपेरा में ब्राउजर हिस्ट्री हटाने के आसान स्टेप्स जानें. प्राइवेसी सुरक्षित रखें और डिवाइस की परफॉर्मेंस बेहतर बनाएं
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ब्लड टेस्ट से कैंसर की शुरुआती पहचान अब संभव? चीन के वैज्ञानिकों ने विकसित किया हाई-टेक प्रकाश सेंसर
Cancer Test: कैंसर की शुरुआती पहचान को लेकर साइंस की दुनिया से एक राहत देने वाली रिपोर्ट सामने आई है. चीन के शेन्जेन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक शक्तिशाली लाइट बेस्ड सेंसर विकसित किया है, जो खून में मौजूद कैंसर के बेहद बायोमार्कर का पता लगाने में सक्षम है. यह तकनीक भविष्य में सिर्फ एक साधारण ब्लड टेस्ट के जरिए कैंसर की प्रारंभिक चेतावनी देने में मदद कर सकती है.
क्या मिला रिसर्च में?
यह रिसर्च प्रतिष्ठित साइंस जर्नल ऑप्टिका में प्रकाशित हुआ है, जिसे Optica Publishing Group द्वारा जारी किया जाता है. रिसर्च टीम के प्रमुख हान झांग के अनुसार, यह सेंसर DNA नैनोसंरचनाओं, क्वांटम डॉट्स और CRISPR-Cas12a जीन एडिटिंग तकनीक को मिलाकर काम करता है. इसमें सेकंड हार्मोनिक जनरेशन (SHG) नामक एक विशेष प्रकाशीय प्रक्रिया का उपयोग किया गया है, जिससे बेहद कमजोर बायोमार्कर संकेतों को भी सटीक रूप से पहचाना जा सकता है.
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कैसे काम करेगा यह टेस्ट?
आम तौर पर कैंसर की शुरुआती अवस्था में बायोमार्कर बहुत कम मात्रा में मौजूद होते हैं, जिससे पारंपरिक परीक्षण उन्हें पकड़ नहीं पाते है. लेकिन इस नए सेंसर ने उप-एटोमोलर स्तर तक फेफड़ों के कैंसर से जुड़े माइक्रोआरएनए miR-21 का पता लगाने में सफलता हासिल की. यहां तक कि जब सैंपल में केवल कुछ अणु ही मौजूद थे, तब भी सिस्टम ने स्पष्ट और मापने योग्य संकेत दिया है.
क्या खास है इस टेस्ट में?
इस तकनीक की खास बात यह है कि इसमें केमिकल एम्प्लीफिकेशन की जरूरत नहीं पड़ती है, जिस वजह से इस जांच की प्रक्रिया तेज, सरल और कम खर्चीली हो जाती है. शोधकर्ताओं का मानना है कि यदि यह तकनीक क्लिनिकल स्तर पर सफल साबित होती है, तो डॉक्टर CT स्कैन में ट्यूमर दिखने से पहले ही ब्लड टेस्ट के जरिए कैंसर के संकेत ढूंढ लेगी.
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