Explainer: इजरायल के चुनावों में सभी दलों के लिए कितना अहम है फिलिस्तीन का मुद्दा?
Explainer: इजरायल में 27 अक्टूबर को आम चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में हर कोई ये जानने को उत्सुक है कि क्या इजरायल में भी भारत की तरह देशभक्ति को लेकर संसदीय चुनाव में लोग मतदान करते हैं. जहां भारत के संसदीय चुनाव में देशभक्ति और पाकिस्तान बेहद अहम मुद्दा माना जाता है तो इजरायल के चुनावों में भी देशभक्ति बहुत बड़ा मुद्दा बन गया है.
दरअसल, फिलिस्तीनी राज्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रही बढ़ती मान्यता और गाजा में इजरायल द्वारा नरसंहार किए जाने के संयुक्त राष्ट्र निष्कर्ष के बीच इजराइल में 27 अक्टूबर के संसदीय चुनाव होने वाले हैं. इस चुनाव में मुख्य उम्मीदवार फिलिस्तीनी स्वतंत्रता के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं और अधिक सैन्य कार्रवाई का वादा कर रहे हैं.
नेतन्याहू की पार्टी ने गाजा और वेस्ट बैंक में सख्ती का लिया संकल्प
इजरायल के आम चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके दक्षिणपंथी गठबंधन ने गाजा और कब्जे वाले वेस्ट बैंक में अपनी नीतियों को और सख्ती से लागू करने का संकल्प लिया है. वहीं, विपक्ष के प्रमुख नेता भी फिलिस्तीनी राज्य के विचार को खारिज करते हैं.
वे गाजा में हुई तबाही के लिए नेतन्याहू की आलोचना करने के बजाय, हमास को खत्म करने में उनकी विफलता को लेकर उन पर निशाना साध रहे हैं, यानी इजरायल में सत्ताधारी और विपक्षी दोनों दलों के लिए फिलिस्तीन बेहद बड़ी मुद्दा है. ऐसे में दोनों ही दल फिलिस्तीन की आजादी के खिलाफ चुनाव प्रचार कर रहे हैं.
विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच फिलिस्तीनी क्षेत्रों के विलय, बस्तियों के विस्तार और फिलिस्तीनी इलाकों के प्रशासन को लेकर अलग-अलग राय है. लेकिन उनके रुख से यह संकेत मिलता है कि अगर नेतन्याहू की जगह कोई और आता भी है, तो भी उन नीतियों में बदलाव आने की संभावना कम है.
जिन्होंने कब्जे को लंबा खींचा है और फिलिस्तीनियों को उनकी संप्रभुता से वंचित रखा है. इस बार के संसदीय चुनाव में विपक्षी दलों के गठबंधन को 50 सीटें और नेतन्याहू के मौजूदा गठबंधन को 47 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है. लेकिन दोनों ही आंकड़े बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटों से कम हैं.
2022 में सत्ता में आई लिकुड पार्टी
नेतन्याहू की लिकुड पार्टी दिसंबर 2022 में सत्ता में आई सरकार का नेतृत्व कर रही है, जिसने गाजा को तबाह करने और सैन्य अभियान में लगभग 75,000 लोगों की जान ले ली. नेतन्याहू पर कथित युद्ध अपराधों और मानवता के विरुद्ध अपराधों, जिनमें भुखमरी को युद्ध के तरीके के रूप में इस्तेमाल करना भी शामिल है. जिसके लिए उनके खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय का गिरफ्तारी वारंट जारी है. फिर भी उनकी पार्टी 18 संभावित सीटों के साथ दूसरे स्थान पर है.
गाजा के मुद्दे पर, उनका कहना है कि इजरायली सेना द्वारा कब्जा समाप्त करने से पहले हमास को पूरी तरह से निरस्त्र होना होगा. लिकुड पार्टी फिलिस्तीनी राज्य को एक सुरक्षा खतरा बताती है और विपक्षी नेताओं पर इसका समर्थन करने का आरोप लगाती है, जबकि वे स्पष्ट रूप से इसका विरोध करते हैं.
नेतन्याहू की सरकार ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक में बस्तियों के विस्तार में तेजी लाई है, साथ ही मंत्री निर्माण को फिलिस्तीनी स्वतंत्रता को रोकने के साधन के रूप में दिखा रहे हैं. सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण में, नेतन्याहू ने वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों के खिलाफ इजरायली कब्जेदार हिंसा की रिकॉर्ड स्तर की खबरों को "मुट्ठी भर युवा किशोर अपराधियों" का मामला बताकर खारिज कर दिया था.
रिलिजियस जायनवाद ने किया बस्तियों के विस्तार का वादा
इजरायल के वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच की पार्टी 'रिलिजियस जायनवाद' (Religious Zionism)- जो नेतन्याहू के गठबंधन में एक कट्टर दक्षिणपंथी सहयोगी है- को अनुमानित 6 सीटें मिली हैं. यह पार्टी एक बार फिर नेतन्याहू को सरकार चलाने में मदद कर सकती है. सितंबर में एक पॉडकास्ट पर बोलते हुए, स्मोट्रिच ने फिलिस्तीनी प्राधिकरण को खत्म करने और इजरायल के विनाशकारी युद्ध को वेस्ट बैंक तक ले जाने की वकालत की थी. उन्होंने कहा था, "वहां भी वही करें जो हमने गाजा में किया है." उन्होंने गाजा के उस इलाके को भी इजरायल में मिलाने की मांग की, जिस पर अभी इजरायल का कब्ज़ा है.
सितंबर 2025 में पेश किए गए एक प्रस्ताव के तहत, वेस्ट बैंक को लेकर उनके एजेंडे में वहां के लगभग 82% इलाके को इजरायल में मिलाना शामिल है. इससे फिलिस्तीनी लोग एक एकजुट राज्य के बजाय अलग-अलग बिखरे हुए इलाकों में सिमट कर रह जाएंगे. इस रणनीति का मुख्य घोषित लक्ष्य एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की संभावना को हमेशा के लिए खत्म करना है.
'ज्यूइश पावर' (Jewish Power):
'ज्यूइश पावर' फिलिस्तीन में बड़े पैमाने पर लोगों को बेदखल करना चाहती है. जिसे पार्टी ने 'स्वैच्छिक पलायन' का नाम दिया गया है. राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर की पार्टी 'ज्यूइश पावर'- जो गठबंधन में एक और कट्टर दक्षिणपंथी सहयोगी है को अनुमानित 8 सीटें मिली हैं. सितंबर में एक चुनावी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, बेन-गवीर ने गाजा से 18.6 लाख फिलिस्तीनियों को सात साल के भीतर विस्थापित करने की योजना पेश की. उन्होंने इसे "स्वैच्छिक पलायन" का नाम दिया.
बेन-गवीर फिलिस्तीनियों के स्वशासन के बजाय गाजा में इजरायली बस्तियों को फिर से बसाने की वकालत करते हैं. उन्होंने फिलिस्तीनी कैदियों को मिलने वाले भोजन में कटौती जैसे कठोर कदमों का भी बचाव किया है. अगस्त 2026 में, उन्होंने इजरायली सेना से गाजा में हर रात "30 से 40" लोगों को मारने के लिए कहा, और साथ ही यह भी दावा किया कि "पूरा गाजा" इजराइल का है.
यशार के आइसेनकोट ने फिलिस्तीनी संप्रभुता को खारिज किया
पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाले 'यशार' गठबंधन को चुनावों में 20 सीटें मिलने का अनुमान है, जिससे वे विपक्षी सरकार का नेतृत्व करने के प्रमुख दावेदार बन गए हैं. 15 अक्टूबर को गाजा के पास बोलते हुए, आइसेनकोट ने प्रधानमंत्री बनने के 18 महीनों के भीतर हमास के शासन को खत्म करने का वादा किया. उन्होंने कहा कि यह काम या तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ढांचे के जरिए या फिर सैन्य कार्रवाई से किया जाएगा. इससे इस बात की संभावना बनी रहती है कि इस इलाके में इजरायली सेना आगे भी सैन्य अभियान चला सकती है.
11 अक्टूबर को 'चैनल 7' के एक पॉडकास्ट में, आइसेनकोट ने 'दो लोगों के लिए दो राज्यों' (टू-स्टेट सॉल्यूशन) के सिद्धांत को खारिज करते हुए कहा कि "यह एक गलती है." वे लाखों फिलिस्तीनियों को इजरायल में शामिल करने का भी विरोध करते हैं. उनका कहना है कि वे इजरायल में यहूदी बहुमत को मजबूत बनाए रखना चाहते हैं.
टुगेदर: बेनेट और लैपिड ने फिलिस्तीनी राज्य के गठन का विरोध किया
पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट और यायर लैपिड के 'टुगेदर' गठबंधन को 12 सीटें मिलने का अनुमान है. यह गठबंधन विपक्षी खेमे में एक अहम साझेदार के रूप में उभर सकता है. गाजा के भविष्य को लेकर दोनों के बीच मतभेद होने के बावजूद, दोनों ने निकट भविष्य में फिलिस्तीनी राज्य के गठन का विरोध किया है.
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बेनेट फिलिस्तीनी राज्य के गठन को खारिज करते हैं. उनका कहना है कि गाजा में इजरायली सैन्य अभियान तब तक जारी रहना चाहिए, जब तक कि हमास के हथियार न छीन लिए जाएं. हालांकि लैपिड ने लंबे समय के नजरिए से 'टू-स्टेट सॉल्यूशन' (दो-राज्य समाधान) का समर्थन किया है, लेकिन उन्होंने वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों के विस्तार को रोकने या पलटने का कोई वादा नहीं किया है.
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