भारत की आर्थिक प्रगति जश्न मनाने लायक, अगले वर्षों में भी मजबूत विकास की संभावनाएं : शीर्ष अर्थशास्त्री
नई दिल्ली, 18 अक्टूबर (आईएएनएस)। शीर्ष अर्थशास्त्री क्युंघून किम ने रविवार को कहा कि पिछले एक दशक में भारत की आर्थिक प्रगति सराहना की हकदार है। उन्होंने कहा कि देश की लगातार मजबूत आर्थिक वृद्धि और बेहतर होती आर्थिक स्थिति भविष्य के लिए आशावाद के पर्याप्त कारण प्रदान करती है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट में किम ने कहा कि भारत के सामने अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद आर्थिक रूप से तेजी से आगे बढ़ने की देश की क्षमता और मध्यम अवधि की विकास संभावनाएं बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।
उन्होंने कहा, मेरा निष्कर्ष वही है। भारत के सामने कई चुनौतियां हैं, लेकिन विशेष रूप से पिछले दशक में उसकी आर्थिक प्रगति और मध्यम अवधि में सकारात्मक विकास संभावनाएं जश्न मनाने योग्य हैं। 1.4 अरब लोगों वाले देश के लिए यह प्रगति बेहद महत्वपूर्ण है।
किम की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब उन्होंने एक दिन पहले ही भारत की मजबूत विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा था कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ), एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और विश्व बैंक जैसे लगभग सभी प्रमुख वैश्विक संस्थानों ने चालू वर्ष और अगले वर्ष के लिए भारत की विकास दर के अनुमान को बढ़ाकर 7 प्रतिशत से अधिक कर दिया है।
अर्थशास्त्री के अनुसार, कोविड-19 महामारी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था ने असाधारण मजबूती का प्रदर्शन किया है। महामारी के दौरान अर्थव्यवस्था में 5.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई थी, लेकिन इसके बाद 2021 में 9.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई और अगले चार वर्षों तक विकास दर 7 प्रतिशत से ऊपर बनी रही।
किम ने कहा कि उनके सहित कई अर्थशास्त्रियों को लगातार अपनी विकास दर संबंधी भविष्यवाणियों में ऊपर की ओर संशोधन करना पड़ा, क्योंकि प्रत्येक तिमाही के जीडीपी आंकड़े उम्मीदों से बेहतर रहे।
उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप भारत ने लगातार पांच वर्षों तक 7 प्रतिशत से अधिक की विकास दर दर्ज की है। यह प्रदर्शन 2003 से 2007 के उस दौर के बराबर है, जब भारत पहली बार दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ था।
किम ने यह भी कहा कि वर्ष 2021 से 2025 के दौरान 7.83 प्रतिशत की औसत वार्षिक विकास दर 1960 के बाद किसी भी पांच वर्षीय अवधि की दूसरी सबसे ऊंची औसत वृद्धि दर है। इससे अधिक केवल 2003 से 2007 के दौरान 7.89 प्रतिशत की औसत वृद्धि दर रही थी।
भारत की अर्थव्यवस्था के बढ़ते आकार का उल्लेख करते हुए किम ने कहा कि आज का भारत दो दशक पहले की तुलना में बिल्कुल अलग आर्थिक स्तर पर खड़ा है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2007 में भारत की अर्थव्यवस्था का आकार 1 ट्रिलियन डॉलर से थोड़ा अधिक था, जबकि अब यह 4 ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंच रही है। ऐसे में समान विकास दर का अर्थ अब कहीं अधिक बड़े पैमाने पर आर्थिक विस्तार और मूल्य सृजन से है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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रामलीलाओं में फिल्मी तड़का, स्कॉर्पियो से शूर्पणखा की एंट्री और लक्ष्मण को 'I Love You', देखें वीडियो
Ramleela Viral Videos: नवरात्रि के दौरान देशभर में रामलीलाओं का मंचन किया जाता है. इनका उद्देश्य भगवान राम के जीवन, उनके आदर्शों और मर्यादा को लोगों तक पहुंचाना है. लेकिन इस बार हरियाणा की कुछ रामलीलाएं अपनी अलग तरह की प्रस्तुतियों को लेकर चर्चा में हैं. कहीं शूर्पणखा स्कॉर्पियो के बोनट पर लेटकर ग्रैंड एंट्री करती नजर आईं, तो कहीं उन्होंने भगवान लक्ष्मण को 'I Love You' कहकर शादी के लिए प्रपोज कर दिया. इन दृश्यों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. इन्हें देखकर जहां कुछ लोग मनोरंजन कर रहे हैं, वहीं कई लोग धार्मिक परंपराओं और रामलीला की प्रस्तुति पर सवाल उठा रहे हैं.
स्कॉर्पियो पर सवार होकर आईं शूर्पणखा,
हरियाणा के नरवाना, करनाल और फतेहाबाद के लोहागढ़ में आयोजित रामलीलाओं के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं. इनमें आधुनिक अंदाज में रामायण के प्रसंगों को पेश किया गया है. सबसे ज्यादा चर्चा नरवाना की रामलीला की हो रही है, जहां शूर्पणखा की एंट्री पारंपरिक तरीके के बजाय स्कॉर्पियो गाड़ी के साथ दिखाई गई. वायरल वीडियो में शूर्पणखा गाड़ी के बोनट पर लेटी नजर आती हैं.
हरियाणा में आयोजित रामलीला में सूर्पणखा की एंट्री स्कॉर्पियों पर बैठकर कराई गई है. pic.twitter.com/vAVEWEjT3r
— Ashutosh shukla (@Ashu9621101476) October 17, 2026
लक्ष्मण को किया प्रपोज
इसके बाद पंचवटी के दृश्य में वह भगवान लक्ष्मण के सामने शादी का प्रस्ताव रखती हैं. इस दौरान उनके मुंह से 'I Love You' जैसे शब्द भी सुनाई देते हैं. मंच पर इस दृश्य को फिल्मी अंदाज में पेश किया गया, जिसने दर्शकों का ध्यान खींचा.
ऐसा तो हिंदू राष्ट्र नहीं हो सकता जहां मॉडर्न सूर्पणखा हो और वो इंग्लिश बोलती हो की मैं तुमसे प्यार करती हूं!
— Neha Bharti ???? (@IAmNehaBhart) October 17, 2026
मतलब इंग्लिश में बोलती हो I Love You ???? pic.twitter.com/2uffec0AOZ
रामायण की कथा में शूर्पणखा भगवान राम और लक्ष्मण के सामने विवाह का प्रस्ताव रखती हैं. लक्ष्मण के इनकार के बाद घटनाक्रम आगे बढ़ता है और इसी प्रसंग से जुड़ी घटनाएं राम-रावण युद्ध की पृष्ठभूमि तैयार करती हैं. हालांकि, वायरल प्रस्तुतियों में इस प्रसंग को आधुनिक संवादों और मनोरंजन के अंदाज में दिखाया गया है.
Disrespectful!!! Ye konsi Ramleela chal rahi hai???
— Chulbuli (@BetiGoneBad) October 14, 2026
Ramleela is a sacred representation of Ramayana, not a place for drinking and disrespecting our culture.
Disappointing and unacceptable! pic.twitter.com/i5wFhwatwx
सोशल मीडिया पर छाए रामलीला के वीडियो
नरवाना की रामलीला के वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तेजी से साझा किए जा रहे हैं. कुछ वीडियो में शूर्पणखा को फिल्मी गानों पर अभिनय करते देखा जा सकता है. एक वायरल क्लिप में वह 'आप जो इस तरह से तड़पाएंगे...' गाने पर नृत्य करती नजर आती हैं.
वहीं, करनाल की रामलीला का एक वीडियो भी चर्चा में है. इसमें ताड़का के किरदार को 'लैला ओ लैला' गाने पर डांस करते दिखाया गया है. इन प्रस्तुतियों के सामने आने के बाद रामलीला में फिल्मी गानों और आधुनिक अंदाज के इस्तेमाल को लेकर बहस शुरू हो गई है.
अगर पेट्रोल मे गन्ने का ज्यूस मिलाया जाएगा तो यही होगा ???????? pic.twitter.com/pl7kAOMXNT
— दिव्या कुमारी (@divyakumaari) October 17, 2026
सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स का कहना है कि धार्मिक आयोजनों में इस तरह के प्रयोग मनोरंजन के नाम पर किए जा रहे हैं. वहीं, कुछ लोग इन्हें दर्शकों को आकर्षित करने का तरीका मान रहे हैं. हालांकि, वायरल वीडियो को लेकर सामने आ रही प्रतिक्रियाएं सोशल मीडिया यूजर्स की राय हैं, इन्हें सभी दर्शकों की सोच नहीं माना जा सकता.
बड़े शहरों की रामलीलाओं को टक्कर दे रहा नरवाना का आयोजन
नरवाना की रामलीला का आयोजन हुडा ग्राउंड में किया गया है. यहां मंचन में आधुनिक तकनीक, गाड़ियों और फिल्मी अंदाज का इस्तेमाल किया जा रहा है. वायरल वीडियो के बाद यह आयोजन बड़े शहरों में होने वाली रामलीलाओं की तरह चर्चा में आ गया है.
इस रामलीला में अमन वर्मा भगवान राम, रामप्रकाश लक्ष्मण, प्रिंस धीमान सीता, प्रेम अरोड़ा रावण, हिमांशु गोयल शूर्पणखा और पंडित मेहर चंद पुजारी मारीच की भूमिका निभा रहे हैं.
आयोजन में लोगों की भीड़ जुट रही है. सोशल मीडिया पर वीडियो साझा किए जाने से रामलीला को व्यापक पहचान भी मिल रही है. हालांकि, इस लोकप्रियता के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या दर्शकों को आकर्षित करने के लिए रामायण के पारंपरिक प्रसंगों में बदलाव करना उचित है?
रामलीला में फिल्मी गानों के इस्तेमाल पर क्यों उठ रहे सवाल?
रामलीला केवल एक नाटक नहीं है, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का भी हिस्सा है. इसके जरिए लोगों को भगवान राम के जीवन, उनके आदर्शों, धर्म और मर्यादा से परिचित कराया जाता है. ऐसे में जब रामायण के गंभीर प्रसंगों में आधुनिक संवादों और फिल्मी गानों का इस्तेमाल होता है, तो कुछ लोगों को लगता है कि कथा का मूल संदेश पीछे छूट रहा है.
एक्स पर साझा की जा रही कुछ पोस्ट में सवाल उठाया गया है कि क्या रामलीला का उद्देश्य भगवान राम की शिक्षाओं को लोगों तक पहुंचाना है या केवल भीड़ जुटाना और मनोरंजन करना? कुछ यूजर्स ने शूर्पणखा के किरदार को रोमांटिक अंदाज में दिखाने और लक्ष्मण के सामने प्रेम प्रस्ताव रखने के दृश्य पर भी आपत्ति जताई है.
Ramleela was meant to spread the values of Lord Ram, but what are some performances turning into these days?
— Pinki (@PinkiPragya) October 16, 2026
Instead of devotion, discipline, and respect for our cultural traditions, we’re increasingly seeing performances that raise serious questions about what’s happening on…
हालांकि, रामलीला के मंचन में समय के साथ तकनीक और प्रस्तुति के तरीकों में बदलाव होते रहे हैं. आधुनिक साधनों का इस्तेमाल अपने आप में गलत नहीं है. सवाल यह है कि इन बदलावों के दौरान कथा की गरिमा, उसके मूल भाव और धार्मिक मान्यताओं का कितना ध्यान रखा जा रहा है.
परंपरा और मनोरंजन के बीच संतुलन जरूरी
रामलीला में नई तकनीक, बेहतर मंच सज्जा और आकर्षक प्रस्तुतियों से दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ाई जा सकती है. लेकिन इसके साथ यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि रामायण के प्रसंगों को पेश करते समय उनकी मूल भावना बनी रहे.
हरियाणा की रामलीलाओं के वायरल वीडियो ने इसी मुद्दे पर नई बहस छेड़ दी है. कुछ लोग इन प्रस्तुतियों को आधुनिक मनोरंजन का हिस्सा मान रहे हैं, जबकि दूसरे इन्हें धार्मिक परंपरा के अनुरूप नहीं मानते.
फिलहाल, सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं. इस बहस के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि रामलीला को आधुनिक बनाने की कोशिश में उसकी सांस्कृतिक पहचान और मूल संदेश को कैसे बरकरार रखा जाए.
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