Kolkata Police ने चोरबागान पंडाल हादसे में आयोजकों की लापरवाही और भ्रामक घोषणा को बताया वजह
कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को कहा कि महासप्तमी के उत्सव के दौरान अचानक तेज बारिश के बाद भीड़ का उचित प्रबंधन नहीं किए जाने और भ्रामक घोषणाओं के कारण लोगों में घबराहट फैल गई होगी, जिससे उत्तर कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ मच गई। अधिकारी ने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ-साथ स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से संकेत मिलता है कि शनिवार शाम पंडाल में भीड़ नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे, जिससे यह घटना हुई। पुलिस ने यह भी पाया कि आयोजन स्थल पर तैनात पुलिसकर्मियों और निजी सुरक्षा गार्डों की संख्या पर्याप्त नहीं थी, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।
पुलिस अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हमने पर्याप्त साक्ष्य जुटाए हैं जिसमें आयोजकों की गंभीर लापरवाही और कुप्रबंधन के संकेत हैं। बड़ी संख्या में आने वाले लोगों को संभालने की कोई स्पष्ट योजना नहीं थी और सारी व्यवस्था मौखिक निर्देशों के आधार पर चल रही थी। हमने सीसीटीवी फुटेज जुटाए हैं, स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए हैं तथा विभिन्न जानकारियों की पुष्टि की है।
सुरक्षा कर्मियों की संख्या भी अपर्याप्त थी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कुप्रबंधन के कारण भगदड़ के दौरान लोगों ने प्रवेश द्वार से ही बाहर निकलने की कोशिश की। दोनों द्वार और वहां तक पहुंचने वाली सड़क संकरी थी, जिससे हादसा हुआ।’’ उन्होंने कहा कि प्रवेश, निकास और भीड़ की आवाजाही को लेकर पर्याप्त घोषणाएं नहीं की गई थीं, जिससे भीड़ के दबाव के बीच लोग भ्रमित हो गए। अधिकारी ने कहा, ‘‘ हमारे पास एक घोषणा का वीडियो है, जिसमें लोगों से यह कहते हुए पंडाल खाली करने को कहा गया था कि उसकी संरचना ढहने वाली है।
हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह घोषणा किसने की थी और इसके पीछे क्या वजह थी।’’ स्थानीय लोगों ने भी पंडाल में पुलिस की अपर्याप्त तैनाती का आरोप लगाया। उनका कहना था कि पुलिसकर्मी मुख्य रूप से वीआईपी प्रवेश द्वार के पास तैनात थे। अधिकारी ने बताया कि फॉरेंसिक विशेषज्ञों की एक टीम ने शनिवार रात पंडाल का दौरा किया और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए।
उन्होंने कहा, ‘‘फॉरेंसिक विशेषज्ञों की एक अन्य टीम आज और साक्ष्य जुटाने के लिए पंडाल का दौरा करेगी। हमारी जांच के तहत खुफिया विभाग के अधिकारी भी घटनास्थल पर जाएंगे।’’ भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी ने बताया कि कोलकाता पुलिस जांच के तहत हादसे में बच गए लोगों से भी पूछताछ करने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा, ‘‘स्थानीय लोगों और अन्य प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर जुटाई गई जानकारी की पुष्टि करने के लिए हमें प्रत्यक्षदर्शियों के बयान चाहिए।
इससे जांच में मदद मिलेगी।’’ इस बीच, कोलकाता पुलिस आयुक्त अजय कुमार नंद ने रविवार सुबह उत्तर कोलकाता के चोरबागान सर्वजनिन दुर्गा पूजा पंडाल से सटी सड़कों पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी। यह आदेश बहुबाजार थाने के अधिकार क्षेत्र में आने वाले पंडाल के आसपास की सड़कों पर लोगों के जमावड़े पर रोक लगाता है। ये प्रतिबंध 20 अक्टूबर तक लागू रहेंगे।
शनिवार शाम बारिश के बीच अचानक भीड़ बढ़ने के कारण पंडाल में भगदड़ मच गई थी। इस घटना में 19 लोगों की मौत हो गई और 25 अन्य घायल हो गए।
पत्नी पर गोली चलाने के मामले में पति Sushant दोषी करार, Delhi Court ने माना हत्या का प्रयास
दिल्ली की एक अदालत ने 2018 में कनॉट प्लेस स्थित एक अस्पताल के बाहर अपनी पत्नी के पेट में गोली मारकर उसकी हत्या का प्रयास करने के मामले में एक व्यक्ति को दोषी ठहराते हुए कहा कि घायल महिला की गवाही भरोसेमंद है तथा आरोपी का अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र राणा ने 13 अक्टूबर को सुनाए गए फैसले में सुशांत को भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास) और शस्त्र अधिनियम की धारा 27 (हथियारों का इस्तेमाल) के तहत दोषी ठहराया। हालांकि, अदालत ने उसे शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत लगे अवैध रूप से आग्नेयास्त्र रखने के आरोप से बरी कर दिया।
अदालत ने कहा कि पिस्तौल रखने के मामले में सीलमपुर थाने में अलग प्राथमिकी दर्ज की गई थी और उस मामले की सुनवाई दूसरी अदालत में लंबित है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 24 नवंबर 2018 को कनॉट प्लेस स्थित कलावती अस्पताल के गेट नंबर पांच के बाहर हुई थी। पीड़िता पिंकी अस्पताल में सुरक्षा गार्ड के तौर पर काम करती थी।
वर्ष 2015 में एक अन्य मामले में उसके पति को जेल भेजे जाने के बाद से वह अपने मायके में रह रही थी। पिंकी ने अदालत को बताया कि जेल से रिहा हुआ सुशांत शाम के समय अस्पताल आया और उसे बाहर बुलाया। जब वह सड़क के दूसरी ओर खड़े एक ऑटो रिक्शे में बैठी, तो सुशांत ने उससे पूछा कि क्या वह अपने ससुराल लौटेगी और इनकार करने पर उसने पिंकी के पेट में गोली मार दी और फरार हो गया।
पीड़िता ने बताया कि उसी दिन उसका ऑपरेशन किया गया और करीब एक महीने तक अस्पताल में भर्ती रही तथा उसकी चार सर्जरी हुईं। अदालत ने कहा कि अस्पताल के कर्मचारियों की गवाही और सीसीटीवी फुटेज से साबित होता है कि आरोपी अस्पताल आया था और पीड़िता के घायल होने से कुछ समय पहले उसके साथ वहां से गया था। इसने यह भी कहा कि एक ऑटो रिक्शा के मालिक ने गवाही दी थी कि उसने घटना वाले दिन अपना वाहन सुशांत को दिया था, जो बाद में घटनास्थल के पास लावारिस हालत में मिला, जिस पर खून के धब्बे थे।
फॉरेंसिक जांच में वाहन से लिए गए खून के नमूने का पीड़िता के डीएनए से मिलान हुआ। उच्चतम न्यायालय के कई फैसलों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि घायल गवाह की गवाही को काफी महत्व दिया जाता है और विश्वसनीय गवाह की गवाही के आधार पर भी दोषसिद्धि की जा सकती है। अदालत ने कहा कि बचाव पक्ष ऐसा कोई कारण नहीं बता सका, जिससे यह लगे कि पिंकी अपने पति को झूठे मामले में फंसा सकती है।
इसने कहा कि वैवाहिक विवाद के कारण झूठा फंसाने का सामान्य आरोप लगाने के अलावा बचाव पक्ष ने कोई ठोस आधार नहीं दिया। न्यायाधीश ने कहा, ‘‘आरोपी ने पीड़िता के शरीर के एक महत्वपूर्ण अंग पर गोली चलाई। इसमें कोई संदेह नहीं है कि उसका इरादा पीड़िता की जान लेने का था, क्योंकि वह उसके साथ रहने के लिए तैयार नहीं थी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए अभियोजन पक्ष यह संदेह से परे साबित करने में सफल रहा है कि आरोपी ने अपनी पत्नी पिंकी की हत्या का प्रयास किया था।
उसे भादंसं की धारा 307 के तहत दोषी ठहराया जाता है।’’ सजा पर दलीलें अगली तारीख पर सुनी जाएंगी।
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