पंजाब के इतिहास में पहली बार आई ऐसी सरकार, जो नशा बेचने वालों को खदेड़ रही है- अरविंद केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मोगा के किल्ली चहलां गांव में आयोजित ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ अभियान के तहत विलेज डिफेंस कमेटी (वीडीसी) के शपथ समारोह में हिस्सा लिया. इस दौरान हजारों लोगों की मौजूदगी में पंजाब को नशा मुक्त बनाने का संकल्प दोहराया गया.
नशे के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि राज्य में नशे के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में 2,000 किलो से अधिक नशा बरामद किया गया है. कई बड़े तस्करों को गिरफ्तार किया गया है और उनकी अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई की गई है. उन्होंने कहा कि अब लोगों के मन से डर खत्म हो रहा है और वे खुलकर जानकारी दे रहे हैं.
सरकार ने बनाया ये खास मोबाइल ऐप
सरकार ने हर गांव और वार्ड में विलेज डिफेंस कमेटियां बनाने की पहल की है. इन कमेटियों में गांव के सम्मानित लोग, रिटायर्ड शिक्षक, पूर्व सैनिक, युवा और सरपंच शामिल किए जा रहे हैं. कमेटी का काम नशा बेचने वालों की जानकारी देना और नशे के शिकार लोगों को इलाज के लिए नजदीकी केंद्र तक पहुंचाना है. सरकार ने इसके लिए एक मोबाइल ऐप भी शुरू किया है, जिसमें दी गई जानकारी गोपनीय रखी जाती है और सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचती है.
राज्य में बनाए जा रहे खेल मैदान
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खराब तबीयत के बावजूद समारोह में पहुंचकर लोगों को नशा मुक्त पंजाब की शपथ दिलाई. उन्होंने कहा कि सरकार ने नशा मुक्ति केंद्रों को मजबूत किया है, जहां इलाज और काउंसलिंग की सुविधा दी जा रही है. साथ ही युवाओं को खेल और रोजगार से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि राज्य में खेल मैदान बनाए जा रहे हैं और युवाओं को खेल सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी.
युवाओं को बिना रिश्वत सरकारी नौकरियां
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने अब तक हजारों युवाओं को बिना सिफारिश और रिश्वत के सरकारी नौकरियां दी हैं. आने वाले समय में स्कूलों के माध्यम से अभिभावकों को भी जागरूक किया जाएगा, ताकि बच्चे नशे से दूर रहें. दोनों नेताओं ने विश्वास जताया कि जनता के सहयोग से पंजाब को जल्द ही पूरी तरह नशा मुक्त बनाया जाएगा.
यह भी पढ़ें: Punjab News: पंजाब सरकार का ऑपरेशन प्रहार-2 शुरू, नशे-अपराध की कमर तोड़ने के लिए पुलिस का ताबड़तोड़ एक्शन
सूरज लामा मामले में एसआईटी जांच का नेतृत्व डीआईजी करेंगे: केरल हाईकोर्ट
कोच्चि, 16 फरवरी (आईएएनएस)। केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को सूरज लामा मामले में अपने पूर्व अंतरिम आदेश में संशोधन करते हुए निर्देश दिया कि मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) का नेतृत्व पुलिस आयुक्त के बजाय पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) करेंगे।
11 फरवरी को जारी अपने अंतरिम आदेश में, खंडपीठ ने निर्देश दिया था कि एसआईटी का नेतृत्व पुलिस आयुक्त या समकक्ष रैंक के अधिकारी करेंगे।
हालांकि, सरकारी वकील के अनुरोध पर, न्यायमूर्ति देवन रामचंद्रन और एमबी स्नेहलथा की पीठ ने निर्देश में संशोधन करते हुए कहा कि अब एसआईटी का नेतृत्व डीआईजी करेंगे।
अदालत ने एसआईटी को लामा के भारत आगमन से लेकर उनकी मृत्यु तक की घटनाओं के पूरे क्रम को दर्ज करने के लिए अपनी जांच जारी रखने को कहा है।
कुवैत से निर्वासित भारतीय नागरिक लामा कोच्चि में उतरने के बाद लापता हो गए थे। बाद में, कलामासेरी से बरामद शव की फोरेंसिक जांच से पुष्टि हुई कि वह लामा का ही था।
यह मामला न्यायिक जांच का विषय बन गया जब यह सामने आया कि कथित तौर पर स्पष्ट रूप से कमजोर स्थिति होने के बावजूद, उनकी स्पष्ट रूप से नाजुक स्थिति, जिसमें संज्ञानात्मक और अन्य संभावित अक्षमताएं शामिल थीं बावजूद इसके उन्हें आव्रजन और हवाई अड्डा सुरक्षा अधिकारियों द्वारा बिना किसी सहायता के हवाई अड्डे से बाहर जाने की अनुमति दे दी गई थी।
अदालत ने निर्वासितों के प्रशासनिक प्रबंधन पर चिंता व्यक्त करते हुए सवाल उठाया था कि क्या ऐसी परिस्थितियों में व्यक्तियों से निपटने के लिए कोई मानक प्रोटोकॉल मौजूद है।
लामा के शव की पहचान होने के बावजूद, पिछली सुनवाई के दौरान पीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को बंद करने से इनकार कर दिया।
अदालत ने एसआईटी को लामा के भारत आगमन के बाद की घटनाओं की जांच जारी रखने का निर्देश दिया और कहा कि इस स्तर पर हत्या की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
--आईएएनएस
एमएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation

















